जगाधरी की काली मंदिर कालोनी निवासी किशन पासवान ने बताया कि भगदड़ के कारण उनके दो बेटे 15 साल का दीपक व 14 साल का गुड्डू उनसे पूजा के दौरान बिछुड़ गए। देर शाम तक ढूंढने के बाद भी उनके बेटे उनसे मिल नहीं पाए।
सब्जी मंडी के पास से आई सीता देवी घंटो अपनी 17 वर्षीय पुत्री किरण को तलाशती रही। परंतु अत्याधिक भीड़ और अंधेरा होने के कारण वह उसे नहीं मिल पाई। सीता देवी ने बताया कि वह दोपहर के समय घाट पर पहुंची थी और शाम करीब साढ़े 5 बजे उसकी बेटी उसे अलग हो गई जो देर शाम तक नहीं मिल पाई।
जगाधरी की दुर्गा गार्डन से यमुना घाट पर छठ पूजन के लिए आई जनक लली भगदड़ के दौरान गिरकर बेहोश हो गई, जिसे किसी तरह पूर्वांचल सभा द्वारा लगाए गए कंट्रोल रूम तक पहुंचाया गया।
एक दर्जन से अधिक बच्चे हुए लापता
भगदड़ के दौरान एक दर्जन से अधिक बच्चे लापता हुए, जिसमें तीन साल से लेकर 17 साल तक के बच्चे शामिल थे। कई बड़े भी अपने परिजनों से बिछुड़ गए। पूर्वांचल सभा के कंट्रोल रूम पर लापता लोगों की घोषणाएं करवाने के लिए लोगों की भीड़ लगी रही।
यह बच्चे बिछुड़े अपनों से
5 साल के अजय के न मिलने पर पारिवारिक सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया।
6 साल का बाटा अपने अभिभावकों से अलग हो गया।
दुर्गा गार्डन निवासी ऊषा अपने पारिवारिक जनों से बिछुड़ गई।
जगाधरी निवासी रितु कंट्रोल रूम में अपने परिजनों के लिए बिलखती रही।
सब्जीमंडी से आई किरण अपने परिवार से बिछुड़ गई।
बच्ची खुशी को तलाशने के लिए कई बार कंट्रोल रूम पर एनाउंसमेंट करवाई गई।
10 वर्षीय किशन मिश्रा के बिछुड़ने से उसके परिजनों बिलखते रहे।
12 साल का रोहित अपने माता-पिता से बिछुड़ गया।
जगाधरी निवासी दीपक व गुड्डू अपने परिवार से बिछुड़ गए।
इसके अतिरिक्त सोनू, मोनू, इंदू, रानी, प्रतिभा, ऊषा, रितु भी अपने परिजनों से लग हो गए थे।
वहीं कुछ बड़े मोहन, राजेश, कन्हैया, रामप्रसाद, रामधनी, चमन आदि को भी उनके परिजन घंटों ढूंढते रहे।aभगदड़ से सहमे श्रद्धालु