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बैंक में चोरी से भड़के ग्राहक

Thu, 15 Nov 2012 12:00 PM IST
Yamuna Nagar
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यमुनानगर। बैंक में चोरी होने का पता जब ग्राहकों को लगा तो वे बैंक में आने शुरू हो गए। गुस्साए ग्राहकों ने बुधवार सुबह जाम लगा दिया और बैंक प्रबंधन पर गुबार निकाला। एसएचओ संदीप कुमार ने लोगों को आश्वासन दिया कि बैंक मैनेजर के खिलाफ लापरवाही का मामला दर्ज किया जा रहा है। उन्होंने बैंक मैनेजर को गिरफ्तार करने की बात कही। इसके बाद नाराज लोगों ने जाम खोल दिया।
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लुट गई जिंदगी भर की कमाई
चोरों ने लॉकर नंबर 154, 155, 156, 160, 161, 162 को तोड़कर उसमें रखे जेवर व अन्य कीमती सामान चोरी कर लिया। तोेड़े गए लॉकर के भीतर लोहे की दीवार को तोड़कर बगल के लॉकर से कीमती सामान निकाला गया। चोर छह लाकर को तोड़ने में पूरी तरह कामयाब रहे। लॉकर नंबर 171 और 173 को भी तोड़ने का प्रयास किया गया, लेकिन चोर इसे तोड़ नहीं पाए। चोरों ने स्ट्रांग रूम में मौजूद बैंक की तिजोरी को भी तोड़ने का प्रयास किया, लेकिन उन्हें कामयाबी नहीं मिली।
बैंक प्रशासन द्वारा लॉकर्स की सुरक्षा में लापरवाही बरतने का सबसे अधिक खामियाजा रेनू अरोड़ा को भुगतना पड़ा है। उनके लॉकर का नंबर 154 है, जिसमें से एक किलो सौ ग्राम से अधिक सोने के जेवर, सिक्के और डेढ़ किलो चांदी के जेवर थे। येे जेवर अरोड़ा परिवार के कई रिश्तेदाराें के थे। इनमें कई जेवर पीढ़ियों से इस परिवार के पास थे।
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लॉकर नंबर 155 हरमिंद्र सेठी का है। उनके लॉकर में उनके परिवार के करीब 35 तोले सोने के जेवर और सोने के सिक्के थे। हरमिंद्र का पूरा परिवार बैंक में आ गया। जेवर चोरी होने का गम इस परिवार के हर सदस्य के चेहरे पर साफ नजर आ रहा था।
वहीं, लॉकर नंबर 156 कपिल के नाम एलाट है। कपिल ने बताया कि उनके लॉकर में 826 ग्राम सोने के जेवर और 214 ग्राम चांदी के जेवर थे। शहर में आए-दिन चोरियां होेने के कारण उन्हें इन्हें बैंक के लॉकर में यह सोचकर रखवा दिया कि वह यहां महफूज रहेंगे, लेकिन बैंक की लापरवाही से उन्हें लाखों का नुकसान हो गया। लॉकर नंबर 160 वेद व्यास इंजीनियरिंग कालेज में लेक्चरर सुमन का है। लॉकर तोडे़ जाने का पता चलने पर सुमन और उसकी मां पुष्पा रानी फौरन बैंक पहुंचे। अपना लॉकर टूटा देखकर पुष्पा देवी स्ट्रांग रूम में ही गश खाकर गिर गई। सुमन और पुष्पा देवी दहाड़े मार-मारकर रोने लगी। सुमन की तीन साल की बेटी कभी दादी तो कभी अपनी मां के आंसू पोंछती रही। छोटी सी बच्ची को यह नहीं पता था कि उसकी मां की सारी जमा-पूंजी अब जा चुकी है। सुमन ने रोते-रोते बताया कि लॉकर में करीब 35 तोले सोने के जेवर व मकान की रजिस्ट्री थी। सुमन के पिता का देहांत हो चुका है और उनका तलाक हो चुका है। सुमन की सर्विस से ही उसके परिवार का खर्च चलता है। उसने अपनी मासूम बच्ची की शादी के लिए जेवर संभाल कर रखे थे।
लॉकर नंबर 161 सुमित का है। उन्होंने बताया कि लॉकर में करीब 50 तोले सोने के जेवर थे। सोने की बढ़ती कीमतों के कारण उन्होंने इसे संभाल कर रखा था, ताकि जरूरत पर ये काम आ जाए, लेकिन एक झटके मेें इनकी कई दशकों की मेहनत की कमाई लुट गई, वहीं, लॉकर नंबर 162 रविंद्र सिंह के नाम है। रविंद्र सिंह भाग्यशाली रहे, क्योंकि उनके लॉकर में कोई भी कीमती सामान नहीं था।

दोयम दर्जे की सुरक्षा व्यवस्था, आसानी से लगी सेंध
पंजाब एंड सिंध बैंक में दो सौ लॉकर हैं, जिनमें लाखों करोड़ों के जेवर व अन्य कीमती सामान पड़ा है। इसके अलावा बैंक की करोड़ों की नगदी भी स्ट्रांग रूम की तिजोरी में है। इसके बावजूद बैंक की सुरक्षा के लिए कोई भी पुख्ता प्रबंध नहीं किए गए हैं। बैंक के प्रवेश गेट के दोनों तरफ ग्रिल लगी है। इन ग्रिल की मोटाई काफी कम है, जिसका चोरों ने फायदा उठाया। चोर एक किनारे पर लगी ग्रिल के तीन सरिये को काटकर मोड़ा और भीतर घुस गए। बैंक के भीतर स्ट्रांग रूम में भारी भरकम लोहे का दरवाजा लगा है। यहां लगे एग्जास्ट फैन के आगे लोहे की पतली ग्रिल लगी है। चोरों ने पहले ग्रिल में लगी पांच सरिये को काटा और फिर अन्य औजारों की मदद से इन्हें मोड़कर भीतर घुसने का रास्ता बना लिया। काटे गए सरिये को मोड़ने के लिए लोहे के पाइप और बैंक में रखे पंखे के मोटे पाइप का इस्तेमाल किया गया। बैंक में दीवाली का अवकाश होने का चोरों ने पूरा फायदा उठाया। इससे चोरों को दो रातें और एक दिन का समय मिल गया। अंदाजा लगाया जा रहा है कि चोर पहली रात बैंक के भीतर घुसे और अगले दिन और रात को उन्होंने चोरी को अंजाम दिया।

सुरक्षित नहीं अन्य ग्राहकों की जमा-पूंजी
बैंक के प्रवेश गेट के आसपास दीवारें कम और ग्रिल अधिक हैं। ग्रिल के सरियों पर जंग लगा है, जिन्हें तोड़ना ज्यादा मुश्किल नहीं है। एक किनारे पर दीवार में ईंटों को लंबे आकार में तिरछा फिक्स किया गया है। इन ईंटों को आसानी से निकालकर बैंक के भीतर घुसा जा सकता है। दिलचस्प है कि बैंक में क्लोज सर्किट कैमरे का कोई प्रबंध नहीं है। स्ट्रांग रूम की सुरक्षा के लिए बैंकों में सायरन लगाया जाता है, लेकिन यहां सायरन सिर्फ दिखावे भर का है। हैरत की बात यह है कि बैंक में रात के समय कोई भी सुरक्षा गार्ड तैनात नहीं किया गया। बैंक मैनेजर का कहना है कि गार्ड दिन के लिए ही रखे जाते हैं, रात को नहीं।
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