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Yamuna Nagar News: सदियों पुराने 507 पेड़ों को मिल रही पेंशन

Fri, 05 Jun 2026 12:29 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, यमुना नगर
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रादौर में गोगा मेड़ी परिसर में लगा पिलखन का पेड़। वन विभाग - फोटो : 1
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संवाद न्यूज एजेंसी
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यमुनानगर। तेजी से बढ़ते शहरीकरण के दौर में जिले के सैकड़ों साल पुराने वृक्ष पर्यावरण संरक्षण का जीवंत संदेश दे रहे हैं। इन विरासत वृक्षों को बचाने के लिए हरियाणा सरकार की प्राण वायु देवता पौधा योजना प्रभावी साबित हो रही है। जिले में वर्ष 2023-24 से इस योजना के तहत 507 पुराने और विरासत वृक्षों को सालाना पेंशन दी जा रही है। हाल ही में इस पेंशन राशि को 2750 रुपये से बढ़ाकर 3000 रुपये प्रति वर्ष कर दिया गया है।
वन विभाग के अनुसार जिले में 45 नए पात्र वृक्षों की पहचान भी कर ली गई है। इन पेड़ों का प्रस्ताव मुख्यालय भेजा गया है और मंजूरी मिलने के बाद इन्हें भी योजना के तहत पेंशन का लाभ मिलेगा। इस पहल का उद्देश्य केवल पेड़ों की सुरक्षा करना नहीं है, बल्कि लोगों को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ना और विरासत वृक्षों के महत्व के प्रति जागरूक करना भी है।
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जिले में सूचीबद्ध अधिकांश पुराने वृक्ष पीपल, पिलखन, बरगद और बड़ प्रजाति के हैं। ये वृक्ष न केवल दशकों और सदियों से पर्यावरण संतुलन बनाए हुए हैं, बल्कि निरंतर ऑक्सीजन प्रदान कर मानव जीवन को भी सहारा दे रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार एक परिपक्व वृक्ष प्रतिवर्ष हजारों किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित कर वातावरण को शुद्ध बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
नंदगढ़ व दड़वा गांव में 400 साल से ज्यादा पुराने पेड़
जिले के नंदगढ़ गांव में स्थित लगभग 400 वर्ष पुराना पीपल का वृक्ष इस योजना की सबसे बड़ी पहचान बनकर उभरा है। धार्मिक महत्व रखने वाले इस वृक्ष के नीचे लोग पूजा-अर्चना भी करते हैं। इसका फैलाव करीब 44 मीटर है। इसी प्रकार दड़वा गांव में मौजूद लगभग 400 वर्ष पुराना पिलखन का वृक्ष भी प्रकृति की अनमोल धरोहर माना जाता है, जिसका फैलाव करीब 25 मीटर है।
सबसे फैली शाखाओं का पेड़ महलांवाली में
महलांवाली गांव का 80 वर्ष पुराना पिलखन का पेड़े जिले में सबसे अधिक फैलाव वाला माना जाता है। इसकी शाखाएं और छाया करीब 114 मीटर क्षेत्र में फैली हुई हैं। वहीं दामला गांव में धर्मेंद्र सिंह की जमीन पर 106 वर्ष पुराना पिलखन का वृक्ष आज भी मजबूती से खड़ा है और लोगों को पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रहा है।
गुंदियाना में 250 साल पुराने दो पेड़
टोपरा खुर्द और धौलरा गांव में लगभग 200-200 वर्ष पुराने बरगद के वृक्ष मौजूद हैं। रादौर में 150 वर्ष पुराना गूलर का वृक्ष, सतगौली और बलसुआ गांव में 200 वर्ष पुराने पीपल के वृक्ष तथा खेड़ी लक्खा सिंह गांव में 200 वर्ष पुराना बरगद आज भी प्राकृतिक विरासत के रूप में संरक्षित हैं। गुंदियाना गांव में 250 वर्ष पुराने बरगद और पीपल के वृक्ष, बेगमपुर में 300 वर्ष पुराना पिलखन, इस्माइलपुर में 180 वर्ष पुराना पिलखन तथा मोहीदीनपुर में 200 वर्ष पुराना बरगद लोगों को प्रकृति के महत्व का एहसास कराते हैं। सलेमपुर कोही गांव में 250 वर्ष पुराना तथा चबूतरों गांव में 205 वर्ष पुराना पीपल का वृक्ष भी इस सूची में शामिल है। वहीं सादिकपुर गांव में परमवीर सिंह द्वारा लगभग 150 वर्ष पुराने बड़ के वृक्ष का संरक्षण किया जा रहा है।

प्राण वायु देवता पौधा योजना कारगर : प्रो.सैनी
हरियाणा एन्वायमेंट सोसाइटी के अध्यक्ष एवं ग्रीन मैन के नाम से मशहूर प्रो. एसएल सैनी का कहना है कि विश्व पर्यावरण दिवस जैसे अवसर केवल पौधरोपण तक सीमित नहीं होने चाहिए, बल्कि पुराने और विरासत वृक्षों के संरक्षण पर भी समान रूप से ध्यान देना जरूरी है। प्राण वायु देवता पौधा योजना इसी सोच को मजबूत करते हुए लोगों को प्रकृति की इस अनमोल धरोहर को बचाने के लिए प्रेरित कर रही है।
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वर्जन:
सैकड़ों साल पुराने पेड़ हमारी धरोहर है। इनकी वजह से हमें जिंदा रहने के लिए ऑक्सीजन मिल रही है। इसी सोच के साथ सरकार ने पुराने पेड़ों के लिए पेंशन योजना शुरू की है। - संदीप सैनी, जिला वन अधिकारी, यमुनानगर।

रादौर में गोगा मेड़ी परिसर में लगा पिलखन का पेड़। वन विभाग- फोटो : 1

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