संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। निपुण हरियाणा मिशन के अंतर्गत विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की पहचान के लिए जिले की सभी राजकीय प्राथमिक पाठशालाओं में बच्चों का मूल्यांकन किया गया। निपुण एप के माध्यम से किए गए मूल्यांकन बच्चों से कई तरह की गतिविधियां करवाई गईं थी। इसके बाद 450 बच्चों की स्क्रीनिंग रिपोर्ट बनाई जा रही है।
अब इन बच्चों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि उन्हें मुख्य धारा में शामिल हों। इसके साथ ही शीतकालीन अवकाश के दौरान भी इन बच्चों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। अवकाश गृह कार्य के दौरान बच्चों को तैयार किया जाएगा। इस दौरान दादा-दादी, नाना-नानी की कहानियां, किस्से, रोजमर्रा के जीवन में व्यवहार, पारिवारिक बातचीत करने पर जोर दिया जाएगा। इसका उद्देश्य बच्चों की बौद्धिक क्षमता व भावनात्मक विकास करना है। इस गृहकार्य पहली से पांचवीं तक के बच्चों के लिए नवाचार के अनुसार तैयार किया गया है। इसमें अभिभावक व परिवार के बड़े सदस्य शिक्षक की भूमिका निभाएंगे। वे बच्चों के साथ समय बिताएंगे और उनके सवालों के जवाब देंगे और बच्चों से भी प्रश्न पूछेंगे। बच्चों को प्रश्नों के उत्तर ढूंढने में सहायता करनी होगी। वहीं, इसका महत्व भी बताना होगा।
निपुण मूल्यांकन से विभाग विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की खोज की जाएगी। इसके बाद उन बच्चों की स्थिति के अनुसार विशेष सहयोग व सुविधा उपलब्ध करवाई जाएगी। जिले के 591 प्राथमिक पाठशालाओं में चलाया गया, इसमें पहली से पांचवीं के बच्चों को शामिल किया गया।
इस स्क्रीनिंग के दौरान जिले के 35,000 बच्चों का टेस्ट हुआ। मूल्यांकन के दौरान शिक्षकों ने बच्चों को कई तरह की दिक्कतों का सामना करते देखा। इस दौरान बच्चों को शब्दों के उच्चारण, शब्दों की पहचान इत्यादि की परेशानी आई थी। शिक्षा विभाग के अनुसार जिले में तीन प्रतिशत बच्चे ऐसे हैं, जो सामान्य से कुछ कम हैं। इन बच्चों की पहचान करके उन्हें निपुण बनाने के लिए शिक्षा विभाग ने कार्यक्रम शुरू किया है। अभी शिक्षा विभाग के पास विशेष आवश्यकता वाले एक प्रतिशत बच्चों की ही जानकारी है।
इस कार्यक्रम से उनका पता लगाया जाना है। पहले यह केवल विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए करवाया जाना था। परंतु फिर इसमें सभी विद्यार्थियों को शामिल किया।
डाटा किया जा रहा एकत्र : संजीव सैनी
जिला एफएलएन समन्वयक संजीव सैनी ने बताया कि बच्चों का मूल्यांकन निपुण एप पर किया गया था। एप पर बच्चों की गतिविधियों का डाटा एकत्र किया गया है। इसके बाद अब एप के विशेषज्ञ इसकी समीक्षा करेंगे और इसकी रिपोर्ट तैयार की जाएगी। रिपोर्ट के आधार पर बच्चों का दूसरे चरण पर मूल्यांकन किया जाएगा। ताकि उनकी क्षमता व आवश्यकताओं का पता चल सके। मूल्यांकन पूरा होने के बाद बच्चों को विशेष सहयोग व सुविधा दी जाएगी, जिससे उनका अन्य बच्चों की तरह उनका विकास हो सके।