यमुनानगर। जिले में बाढ़ से प्रभावित 90.50 एकड़ क्षेत्र की सुरक्षा के लिए 32 साइटों पर नए कार्य प्रस्तावित किए गए हैं। इन सभी योजनाओं पर कुल 42 करोड़ 70 लाख 717 हजार रुपये खर्च किए जाएंगे।
प्रस्तावित कार्यों में आबादी और कृषि भूमि को यमुना, सोम व अन्य सहायक नदियों के कटाव से बचाने के लिए पत्थर स्टेनिंग, बंड निर्माण, ड्रेन मरम्मत और क्रॉस ड्रेनेज ढांचे की पुनर्स्थापना शामिल है। यह प्रस्ताव सिंचाई विभाग की 57वीं बैठक में प्रस्तुत किया गया है। जिले के जगाधरी, साढौरा और रादौर विधानसभा क्षेत्रों की 32 साइटों को इस योजना में शामिल किया गया है। सबसे अधिक कार्य जगाधरी हलके में प्रस्तावित हैं, जहां यमुना और सोम नदी के किनारे बसे गांव हर वर्ष बाढ़ के खतरे से जूझते हैं। जगाधरी के गांव ओधरी में 500 एकड़ क्षेत्र की सुरक्षा के लिए 2.85 करोड़ रुपये से चार स्टोन स्टड व 750 फुट स्टेनिंग का कार्य होगा।
गांव लापरा में 200 एकड़ के लिए 1.69 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। मुजफ्फत भंगेरी में 300 एकड़ क्षेत्र के लिए 60.46 लाख रुपये की लागत से 1200 फुट स्टोन पिचिंग होगी। बेलगढ़ में 500 एकड़ भूमि की सुरक्षा पर 1.02 करोड़ रुपये खर्च होंगे। लक्कर माई प्रतापपुर (300 एकड़) में 72 लाख, मेहर माजरा (200 एकड़) में 21.14 लाख, तिहानो (300 एकड़) में 37.29 लाख और कनालसी (300 एकड़) में 1.98 करोड़ रुपये से कार्य प्रस्तावित हैं।
दादूपुर व सुढाल क्षेत्र में क्रॉस ड्रेनेज और सायफन मरम्मत पर 60 लाख रुपये खर्च होंगे। खदर व किशनपुरा माजरा (100 एकड़) में 1 करोड़ रुपये, आरएलडीएसई बंध की मरम्मत (200 एकड़) पर 4.50 करोड़ रुपये का प्रावधान है। कोटरा कहान सिंह (500 एकड़) में 86.13 लाख और माली माजरा-नवापुर (100 एकड़) में 72 लाख रुपये की स्टोन स्टेनिंग कराई जाएगी। साढौरा क्षेत्र के गांव पथराला, मगलौर, उझापुर और आसपास के इलाकों में 130 से 450 एकड़ तक क्षेत्र को कवर करते हुए अलग-अलग योजनाएं बनाई गई हैं। इन पर 27.58 लाख से लेकर 79.47 लाख रुपये तक खर्च प्रस्तावित है। गांव नागला, मगलौर और चहत्रौर में स्टोन स्टेनिंग और बंड निर्माण पर क्रमश: 72.81 लाख, 66.19 लाख और 31.83 लाख रुपये खर्च होंगे।
रादौर हलके में ड्रेन नंबर 2 और 3 की डिज़ाइन सेक्शन बहाली, वीआर ब्रिज पुनर्निर्माण और पत्थर पिचिंग के कार्य प्रस्तावित हैं। इन योजनाओं पर 55 लाख, 85 लाख और 1.10 करोड़ रुपये का प्रावधान रखा गया है। समालखा व इसराना क्षेत्र से सटे यमुना तटबंधों की मजबूती पर 2.50 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। संवाद
कृषि भूमि और आबादी को होगा फायदा ः एक्सईएन
प्रस्तावित 32 योजनाओं में अधिकांश कार्य प्रोटेक्शन ऑफ आबादी और प्रोटेक्शन ऑफ एग्रीकल्चरल लैंड श्रेणी में हैं। कई गांवों में हर वर्ष बाढ़ के कारण फसलें खराब होती हैं और मकानों तक पानी पहुंच जाता है। इन परियोजनाओं के पूरा होने से हजारों किसानों को सीधा लाभ मिलेगा और ग्रामीणों को मानसून के दौरान राहत मिलेगी। सिंचाई विभाग के एक्सईएन राहिल सैनी ने बताया कि सभी प्रस्तावों को स्वीकृति मिलने के बाद चरणबद्ध तरीके से कार्य शुरू किए जाएंगे ताकि आगामी बरसात से पहले संवेदनशील स्थलों को सुरक्षित किया जा सके।