जिले में पशुपालन एवं डेयरी विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार शुक्रवार को लंपी वायरस के 360 नए केस मिले हैं। इस तरह अब तक के कुल 7200 गाय लंपी वायरस की चपेट में आ चुकी हैं, इनमें से 2500 ठीक भी हो चुकी हैं। लंपी वायरस की रोकथाम के लिए विभाग की ओर से मुख्यालय को वैक्सीन और जिला प्रशासन को फॉगिंग कराने के लिए लिखा गया है, किंतु अभी तक न वैक्सीन आई है और न ही लंपी वायरस से प्रभावित इलाकों में फॉगिंग हो पाई है।
पशुपालन एवं डेयरी विभाग से एसडीओ डॉ. सतबीर ने बताया कि लंपी वायरस के इतनी तेजी से फैलने की बड़ी वजह मक्खी मच्छर माने जा रहे है, इसलिए फॉगिंग जरूरी है। इसके लिए प्रशासन को लिखा गया है। मुख्यालय को वैक्सीन के लिए डिमांड भेजी गई है। जहां से अभी वैक्सीन नहीं भेजी गई है। उन्होंने कहा कि कोरोना संक्रमण की तरह लंपी वायरस में भी इसके लक्षण दिखने पर गायों को अन्य गायों व पशुओं से अलग रखना चाहिए। साथ ही वायरस ग्रस्त गायों के चारे, पानी व अन्य प्रबंध भी अलग होने चाहिए। वायरस के लक्षण वाली व अन्य गायों व पशुओं को नहलाने व चारा खिलाने से पहले व बाद में हाथ जरूर धोएं। क्योंकि जरूरी नहीं है कि वायरस के लक्षण तुरंत दिखें। कई मामलों में वायरस की चपेट में आने के बाद लक्षण दिखने में कई दिन व हफ्ते भी लग रहे हैं। वायरस ग्रस्त व अन्य गायों के दूध को लेकर लोगों में फैली भ्रांति गलत है। क्योंकि दूध को उबालकर पीने से किसी तरह का नुकसान नहीं है।