संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। जिले में ओलिंपिक से जुड़े अधिकांश खेलों के सरकारी कोच नहीं है। यह स्थिति कई वर्षों से बनी हुई है। हालात ऐसे हैं कि जिला खेल विभाग में कोच के कुल 44 पद स्वीकृत हैं, लेकिन कोच सिर्फ दस ही हैं। कोच के 34 पद रिक्त पड़े हैं। ऐसे में खिलाड़ी प्रशिक्षण के लिए दूसरे जिलों या राज्यों में जाने को मजबूर हैं।
खिलाड़ी हजारों रुपये खर्च कर निजी स्तर पर कोचिंग ले रहे हैं और जो खिलाड़ी यह वहन नहीं कर पा रहे हैं, वे खेलों से दूरी बनाने के लिए मजबूरहैं। खेल एवं युवा कार्यक्रम विभाग की ओर से सरकारी स्तर पर तेजली खेल परिसर में बैडमिंटन, भारोत्तोलन, तलवारबाजी, कुश्ती, हॉकी, कबड्डी, बॉक्सिंग, लॉन टेनिस, टेबल टेनिस के कोच हैं।
ओलिंपिक गेम्स 2028 में होने हैं। प्रशिक्षण के लिए जिले के खिलाड़ियों के पास कोच ही नहीं है। हालांकि खेल एवं युवा कार्यक्रम विभाग की ओर से जिले के तमाम सरकारी व निजी संस्थानों में खेल नर्सरियां भी शुरू की हैं, परंतु इनमें भी 20 खेल कवर हो रहे हैं। इनमें कई खेल ऐसे हैं, जिनके सरकारी स्तर पर पहले से कोच हैं।
खेल नर्सरियों में 12 ही खेलों के प्रशिक्षण की सुविधा हुई हैं, जिनके सरकारी स्तर पर कोच नहीं हैं। इसके अलावा आर्चरी, कराटे, क्रिकेट, क्रॉस कंट्री स्कीइंग, गोल्फ, घुड़सवारी, जूडो, ताइक्वांडो, बेसबॉल/सॉफ्टबॉल, रोइंग, साइकिलिंग, हैंडबॉल जैसे खेलों के प्रशिक्षण की सरकारी स्तर पर सुविधा नहीं है। इनके प्रशिक्षण के लिए खिलाड़ी जिले की निजी अकादमियों या फिर दूसरे जिलों व राज्यों की दौड़ लगाने पर मजबूर हैं।
खिलाड़ी एवं खेल प्रेमी चिराग, राहुल, लक्ष्मण, सतेंद्र, राजकुमार, शुभम, कुलदीप, वासु, अर्पित ने बताया कि खेल के मैदान व सामान से लेकर स्टाफ के वेतन पर करोड़ों रुपये खर्च होता है। कोचों की कमी में यह सब व्यर्थ साबित हो रहा है। खेल मैदान, सामान व स्टाफ पर खर्च का मकसद खेलों के लिए खिलाड़ी तैयार करना है, जो बिना कोच के संभव नहीं है। सरकार को खासकर ओलिंपिक व युवाओं के ज्यादा रुझान वाले सभी कोचों की सरकारी स्तर पर सुविधा करनी चाहिए।
कोचों की कमी के लिए निदेशालय को सूचित किया गया है। प्रक्रिया भी चल रही है। जल्द ही कोच की कमी दूर हो जाएगी। - शिल्पा गुप्ता, जिला खेल एवं युवा कार्यक्रम अधिकारी।