संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) में प्रवेश के लिए पसंदीदा ट्रेड भरने की प्रक्रिया शुक्रवार से शुरू हो गई। यह प्रक्रिया 15 जुलाई तक चलेगी। पहले दिन आईटीआई पहुंचकर कुल 292 विद्यार्थियों ने पसंद की ट्रेड भरी। इसके अलावा काफी विद्यार्थियों ने सीएससी और निजी स्तर पर भी ट्रेड का चयन किया है, जिसकी जानकारी संस्थान के पास नहीं है।
संस्थान में पहले दिन सबसे ज्यादा इलेक्ट्रिशियन ड्यूल ट्रेड विद्यार्थियों की पसंद रही। यह ट्रेड 39 विद्यार्थियों ने अपनी प्राथमिकता में शामिल की। वहीं, कोपा के लिए 36 ने पसंद भरी। इसी तरह फिटर के लिए 33 और वायरमैन के लिए 22 ने आवेदन किया है। इलेक्ट्रॉनिक्स में 19, वेल्डर में 14, रेफ्रीजरेशन एंड एयर कंडीशनिंग टेक्निशियन में 14, स्टेनो अंग्रेजी में 13, मोटर व्हीकल मैकेनिक 12, डाटा एंट्री ओपरेटर में 10 ने रूझान दिखाया है। इसके अलावा अन्य ट्रेड एक से नौ तक ही आवेदन हुए हैं।
इस बार दाखिले को लेकर विद्यार्थियों में पिछले वर्षों जैसा उत्साह नहीं दिख रहा है। मानना जा रहा है कि बदले नियमों के कारण इस बार आवेदन और दाखिलों की संख्या कम रह सकती है। इस बार प्रवेश प्रक्रिया में डायरेक्टरेट जनरल ऑफ ट्रेनिंग (डीजीटी) की ओर से किए बदलावों ने विद्यार्थियों के साथ संस्थानों की भी चिंता बढ़ा दी है।
नए नियमों के तहत आईटीआई अपने संस्थान में आए आवेदनों और विभिन्न ट्रेडों में पसंद भरने वाले विद्यार्थियों की संख्या नहीं देख पा रहे हैं। इससे संस्थान स्तर पर प्रवेश प्रक्रिया की निगरानी और योजना बनाना कठिन हो गया है। जिले की नोडल आईटीआई में सबसे अधिक 1348 सीटें उपलब्ध हैं। यहां विभिन्न व्यवसायों की 61 यूनिट संचालित होती हैं।
बेहतर संसाधनों और अधिक ट्रेड होने के कारण हर वर्ष सबसे ज्यादा विद्यार्थियों की पहली पसंद यही संस्थान रहता है। यही कारण है कि पिछले वर्ष नोडल आईटीआई में करीब 12,000 विद्यार्थियों ने दाखिले के लिए आवेदन किया था। आईटीआई प्रबंधन का कहना है कि विद्यार्थियों को निर्धारित अवधि के भीतर अपनी पसंद के ट्रेड भरने चाहिए। किसी भी संशय की स्थिति में विद्यार्थी संस्थान से संपर्क कर सकते हैं। विभाग ने अभी वरीयता सूची को लेकर कोई शेड्यूल नहीं जारी किया है।
नए नियमों के तहत आईटीआई में ट्रेड भरने की प्रक्रिया चल रही है। संस्थान के अलावा विद्यार्थियों सीएससी और निजी स्तर पर भी ट्रेड भरी हैं, जिसकी उन्हें जानकारी नहीं है। चूंकि इस बार पोर्टल पर यह नहीं देखी जा सकती है। - भूपेंद्र सिंह सांगवान, प्राचार्य नोडल आईटीआई।