यमुनानगर। पानी की गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ गई है। अप्रैल 2025 से 9 जनवरी 2026 तक नौ माह के निरीक्षण में कुल 7,298 पानी के सैंपल जांचे गए, जिनमें से कई में स्वास्थ्य के लिए हानिकारक तत्व पाए गए। बैक्टीरियोलॉजिकल जांच में 292 सैंपल फेल हुए, जिसमें नगर क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित रहा। वहीं यह स्थिति सीधे तौर पर जिले में लोगों के स्वास्थ्य के लिए खतरे की घंटी है। वहीं, लैब में हाल ही में कराई गई जांच में ट्यूबवेलों के पानी का टीडीएस स्तर 100 से 300 के बीच पाया गया, जो निर्धारित मानकों के अनुरूप माना जा रहा है।
पेस्टिसाइड टेस्ट रहा शून्य
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि पूरे समय अवधि में पेस्टिसाइड टेस्ट के तहत एक भी सैंपल की जांच नहीं की गई। विशेषज्ञों का कहना है कि कृषि प्रधान जिले में कीटनाशकों का असर जल स्रोतों पर पड़ सकता है, इसलिए पेस्टिसाइड जांच बेहद जरूरी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार बैक्टीरिया युक्त पानी से डायरिया, टाइफाइड और अन्य संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में जिले में पाइपलाइन, टंकियों और जल स्रोतों की नियमित सफाई व निगरानी जरूरी है।
नालियों के पास से गुजर रही पाइपलाइन
जानकारी के अनुसार जिले में कई जगहों पर पेयजल पाइपलाइन नाली के बीच या फिर पास से गुजर रही है। बात करें तो आजादनगर कॉलोनी व जगाधरी शहर में इस तरह के उदाहरण काफी मिल जाएंगे। जोकि स्वास्थ्य के लिए काफी खतरनाक है। क्योंकि इससे नालियों में अक्सर गंदा पानी, सीवेज और औद्योगिक अपशिष्ट बहते हैं। अगर पाइपलाइन में किसी भी तरह का दरार, लीकेज या कमजोर जोड़ है, तो यह गंदा पानी पाइप में चला सकता है।इससे पानी में बैक्टीरिया, वायरस और अन्य हानिकारक सूक्ष्मजीव मिल सकते हैं। इतना ही नहीं इससे जलजनित रोग जैसे टाइफाइड, हैजा, डायरिया, त्वचा और आंखों से जुड़े संक्रमण हो सकता है।
जहां-जहां पुरानी पाइपलाइन है उन्हें बदला जा रहा है। इसके अलावा जहां-जहां पुरानी पाइपलाइन है उसका सर्वे भी किया जाता है। फिर बजट बनाकर उसे बदलने की प्रक्रिया होती है। लोगों को स्वच्छ जल मिले यही हमारी प्राथमिकता रहती है।
-दिनेश गाबा, एक्सईएन, जनस्वास्थ्य विभाग।
आजाद नगर में नाली के बीच से गुजर रही पेयजल पाइपलाइन को ठक करते कर्मी। संवाद