यमुनानगर। सीएमआर (कस्टम मिल्ड राइस) योजना के तहत राइस मिलरों को 30 जून तक धान की कुटाई के बाद पूरा चावल भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) को लौटाना था। अब तक करीब 70 प्रतिशत चावल ही एफसीआई को लौटाया गया है। ऐसे में सरकार ने जिले की राइस मिलों में भौतिक सत्यापन शुरू कर दिया है। सत्यापन के लिए 24 टीमें लगाई गई हैं।
राइस मिलरों का तर्क है कि एफसीआई के गोदामों में पर्याप्त जगह उपलब्ध नहीं होने के कारण वे पूरा चावल जमा नहीं करा सके। इसी आधार पर मिलर सरकार से समय सीमा बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। हालांकि पिछले वर्ष सामने आए बहुचर्चित धान घोटाले के बाद सरकार इस बार कोई जोखिम लेने के मूड में नहीं है। इस पर चावल वापसी की समय सीमा बढ़ाने से पहले मिलों में उपलब्ध धान और चावल का वास्तविक सत्यापन कराया जा रहा है।
जिले में मुख्यालय स्तर से गठित 24 टीमें विभिन्न राइस मिलों का निरीक्षण कर रही हैं। प्रत्येक टीम को सात से आठ राइस मिलों में जाकर धान और चावल के स्टॉक की जांच करने की जिम्मेदारी दी गई है। जिले में करीब 185 राइस मिल हैं, जिन्हें सरकार की ओर से धान कुटाई के लिए आवंटित किया गया था। सत्यापन रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि मिलों में कितना धान और चावल शेष है तथा समय सीमा बढ़ाने की मांग कितनी उचित है।
भौतिक सत्यापन प्रक्रिया में पहली बार तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। राइस मिलों में धान और चावल के स्टॉक का पूरा डाटा मोबाइल एप के माध्यम से ऑनलाइन दर्ज किया जा रहा है। यह एप जियो टैगिंग प्रणाली से जुड़ी हुई है, जिससे अधिकारी केवल संबंधित राइस मिल परिसर में रहकर ही जानकारी अपलोड कर सकते हैं। मिल परिसर से बाहर निकलते ही एप काम करना बंद कर देती है। इससे बाद में आंकड़ों में फेरबदल या गलत जानकारी दर्ज करने की संभावना काफी हद तक समाप्त हो गई है। संवाद
सत्यापन से स्थानीय अधिकारियों को रखा दूर
खास बात यह है कि इस बार स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों को सत्यापन प्रक्रिया से दूर रखा गया है। पहले यह कार्य संबंधित एसडीएम के नेतृत्व में गठित टीमों या उनके प्रतिनिधियों की ओर से किया जाता था, लेकिन धान घोटाले के बाद पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए एफसीआई और खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के दूसरे जिलों के अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
70 करोड़ के धान घोटाले के बाद बढ़ी सतर्कता
जिले में 13 नवंबर 2025 को करीब 70 करोड़ रुपये के धान घोटाले का मामला सामने आया था। खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक एवं उपभोक्ता मामले विभाग के महानिदेशक अंशज सिंह की जांच में इस घोटाले का खुलासा हुआ था। इसके बाद मामले की जांच के लिए पुलिस अधीक्षक कमलदीप गोयल ने एसआईटी का गठन किया था। जांच के दौरान मुख्य आरोपी छछरौली निवासी राइस मिलर संदीप सिंगला को गिरफ्तार किया गया था। उसकी जमानत याचिका पर 27 जुलाई को सुनवाई प्रस्तावित है। संदीप सिंगला के नाम पर सात राइस मिलें हैं। उसके और उसकी पत्नी रितिका सिंगला के खिलाफ छछरौली, प्रतापनगर और व्यासपुर थानों में मामले दर्ज हैं। एसआईटी अब तक संदीप सिंगला के अलावा हैफेड के सीनियर मैनेजर शैलेंद्र कुमार और परचेज मैनेजर अनिल कुमार को भी गिरफ्तार कर चुकी है। वहीं विभागीय स्तर पर खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के इंस्पेक्टर मनोज यादव, सविता, विनोद कुमार तथा एएफएसओ देवेंद्र कुमार को सेवा से बर्खास्त किया जा चुका है।
राइस मिलों में धान का भौतिक सत्यापन मुख्यालय की ओर से गठित टीमें कर रही हैं। राइस मिलर चावल लौटाने के लिए थोड़ा समय और देने की मांग कर रहे हैं। सत्यापन के बाद ही समय सीमा बढ़ाने पर विचार किया जाएगा। फिलहाल 30 जून तक सारा चावल लौटाना है। - विभु गोयल, निरीक्षक, खाद्य एवं आपूर्ति विभाग।