जिला शिक्षा सदन कार्यालय यमुनानगर। आर्काइव
जगाधरी। हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड ने गैर मान्यता वाले स्कूलों की सूची जारी की है। इसमें जिले के 40 स्कूल हैं। यहां 20 हजार से अधिक विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। सूची जारी होते ही यहां पढ़ने वाले विद्यार्थियों के अभिभावक चितिंत हो उठे है। चिंता का कारण यह है कि बोर्ड ने इन संस्थानों से मिलने वाली स्कूल लिविंग सर्टिफिकेट(एसएलसी) को भी अमान्य करार दिया है। ऐसे में इन स्कूलों की एसएलसी किसी भी मान्यता प्राप्त स्कूल में मान्य नहीं होगी।
अब शिक्षा निदेशालय और बोर्ड की सख्ती के कारण अभिभावकों अपने बच्चों के भविष्य की चिंता सताने लगी है। चूंकि अभिभावक अपने बच्चों का दाखिला दूसरे स्कूलों में करवाते हैं तो उनकी एसएलसी मान्य नहीं होगी। पिछले साल के अंत में शिक्षा निदेशालय ने जिले के कई स्कूलों को अमान्य करार दिया था। जिसके चलते यह स्कूल न तो दाखिले कर सकते थे और न ही कक्षाएं लगा सकते थे। इसके बाद नए सत्र की शुरुआत से पहले शिक्षा निदेशालय ने दोबारा जिला विभाग से ऐसे स्कूलों की सूची मांगी थी। विभाग ने दोबारा सूची निदेशालय को भेजी दी थी। परंतु जिला शिक्षा विभाग ने इन स्कूलों पर कोई कार्रवाई नहीं की। स्कूलों ने आदेशों व नियमों को ठेंगा दिखाते हुए इस बार फिर विद्यार्थियों का दाखिला ले लिया। दाखिलों के दौरान भी शिक्षा विभाग आंखें मूंदें रहा। जिसका खामियाजा विद्यार्थियों व अभिभावकों को भुगतना पड़ेगा।
सबसे ज्यादा गैर मान्यता वाले स्कूल शहर में
बोर्ड ने खंड शिक्षा के अनुसार, अमान्य स्कूलों की सूची जारी की है। सूची के अनुसार छछरौली खंड में दो स्कूल, रादौर व सरस्वतीनगर में दो-दो , साढ़ौरा में चार, बिलासपुर में छह, शहर में सबसे ज्यादा 24 स्कूल बिना मान्यता के हैं। यमुनानगर शहर की हमीदा कॉलोनी में ही नौ व जगाधरी शहर में छह ऐसे स्कूल चल रहे हैं।
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वर्जन
जिले में चल रहे सभी गैर-मान्य स्कूलों को दाखिला न करने व कक्षाएं न लगाने के आदेश दिए गए हैं। पिछले साल इन स्कूलों को अस्थायी मान्यता दे दी गई थी। अभी उनके पास कार्रवाई को लेकर बोर्ड और निदेशालय की ओर से आदेश नहीं आए हैं। निर्देश आने पर ऐसी स्कूलों पर कार्रवाई की जाएगी।
- धर्मेंद्र चौधरी, जिला शिक्षा अधिकारी।