संवाद न्यूज एजेंसी
यमुनानगर। जिले में काला पीलिया (हेपेटाइटिस बी व हेपेटाइटिस सी) के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में हर माह औसतन 20 नए मरीज सामने आ रहे हैं। पहले औसतन 15 केस ही आते थे। इससे विभाग की चिंता बढ़ गई है। हाल ही में हुई जांच के दौरान जिला कारागार जगाधरी में बंद 25 कैदी भी इस संक्रमण से ग्रस्त पाए गए हैं।
डॉक्टरों के अनुसार काला पीलिया फैलने के पीछे सबसे बड़ा कारण असुरक्षित तरीके अपनाना है। मेलों व सार्वजनिक स्थानों पर टैटू बनाने वाले अक्सर बिना उचित सफाई के उपकरणों का इस्तेमाल करते हैं। वे मशीन को केवल कपड़े से साफ कर देते हैं, जिससे संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। यदि मशीन की नोक किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आ चुकी है, तो वही उपकरण दूसरे व्यक्ति को भी संक्रमित कर सकता है।
इसी तरह असुरक्षित तरीके से कान छिदवाना और एक ही सूई का इस्तेमाल कर नशा करना भी संक्रमण फैलने का प्रमुख कारण बन रहा है। दंत उपचार के दौरान भी यदि औजारों को सही ढंग से स्टरलाइज नहीं किया जाता, तो संक्रमण का खतरा बना रहता है। स्वास्थ्य विभाग ने ऐसे मामलों को गंभीरता से लेते हुए निगरानी बढ़ा दी है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से काला पीलिया का उपचार मुफ्त उपलब्ध कराया जा रहा है। डॉक्टरों के अनुसार हेपेटाइटिस बी और सी के मरीजों को तीन से छह माह तक नियमित दवा लेना जरूरी होता है। इसके बाद दोबारा जांच कर बीमारी की स्थिति का आकलन किया जाता है।
काला पीलिया के लक्षण व बचाव
काला पीलिया के प्रमुख लक्षणों में आंखों व त्वचा का पीला पड़ना, कमजोरी, भूख न लगना, उल्टी, पेट दर्द और गहरे रंग का पेशाब शामिल हैं। कई मामलों में शुरुआत में लक्षण स्पष्ट नहीं होते, जिससे बीमारी देर से पकड़ में आती है। बचाव के लिए हमेशा साफ-सुथरे और स्टरलाइज उपकरणों का ही इस्तेमाल करवाएं। टैटू बनवाते समय और कान छिदवाते समय सावधानी रखें। एक ही सूई का इस्तेमाल कभी न करें। सुरक्षित रक्त चढ़ाने और स्वच्छ दंत उपचार पर ध्यान दें। हेपेटाइटिस बी का टीकाकरण भी प्रभावी बचाव है।
असुरक्षित उपकरणों से फैलता है रोग : डॉ. गोंदवाल
डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. विपिन गोंदवाल का कहना है कि काला पीलिया एक गंभीर संक्रामक रोग है, जो मुख्य रूप से संक्रमित रक्त या असुरक्षित उपकरणों के माध्यम से फैलता है। लोगों को टैटू बनवाते हुए, कान छिदवाने या किसी भी प्रकार की चिकित्सा प्रक्रिया के दौरान स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें। समय पर जांच और नियमित दवा लेने से इस बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से सभी आवश्यक सुविधाएं मुफ्त उपलब्ध कराई जा रही हैं।