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कोरोना की‘तीसरी लहर’ निपटने को 60 बेड का बनेगा पीकू वार्ड, फिलहाल नीकू वार्ड से चल रहा काम

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जिले में कोरोना की तीसरी लहर से निपटने के लिए जिला प्रशासन और स्वास्थ्य महकमा तैयारियों में जुटा है। जिला मुख्यालय पर स्थित अस्पतालों में चार बाल रोग विशेषज्ञ की तैनाती है। जबकि जिले में बच्चों की संख्या ढाई लाख से अधिक है। बालरोग विशेषज्ञों की कमी को देखते हुए कोविड वार्डों में तैनात चिकित्सकों को भी प्रशिक्षित किया जा रहा है। यहीं नहीं स्वास्थ्य विभाग निजी अस्पतालों के बालरोग विशेषज्ञों से भी मदद ले सकता है। इसके लिए आईएमए (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन) से बात की जा रही है। साथ ही जिला अस्पताल व ईएसआई अस्पताल में 60 बेड का पीकू (पीडियाट्रिक इंटेसिव केयर यूनिट) बनाने की तैयारी चल रही है। यहां फिलहाल 16 बेड का नीकू (नियोनेटल इंटेसिव केयर यूनिट) संचालित है, जिसमें आठ बच्चे भर्ती हैं।
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कोरोना की तीसरी लहर में बच्चों के अधिक प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। इसे लेकर राज्य सरकार ने सभी सीएचसी में बच्चों के लिए वार्ड बनाने और विशेष एंबुलेंस तैनात करने के निर्देश दिए हैं, लेकिन फिलहाल जिले की सीएचसी में एक भी बालरोग विशेषज्ञ नहीं हैं। दूसरी ओर जगाधरी अस्पताल में दो बालरोग विशेषज्ञ डॉ. सुमिता और डॉ. देविना तैनात हैं, जबकि जिला अस्पताल यमुनानगर में स्थापित निकू वार्ड में एक बालरोग विशेषज्ञ डॉ. पारुल वशिष्ठ तैनात हैं। इसके अलावा सिविल सर्जन डॉ. विजय दहिया खुद बाल रोग विशेषज्ञ हैं। उन्होंने बताया कि तीसरी लहर को ध्यान में रखते हुए अस्पताल के अंदर बच्चों के लिए 60 बेड का पिकू वार्ड बनाया जा रहा है। लगभग तीन सप्ताह में तैयार होने की उम्मीद जताई जा रही है। आवश्यकता पड़ने पर पिकू वार्ड में बेडों की संख्या और भी बढ़ाई जा सकती है। --संवाद
तीन सप्ताह में पिकू वार्ड तैयार होने की उम्मीद
-तीसरी लहर को ध्यान में रखते हुए तैयारियां चल रही हैं। उम्मीद है कि तीन सप्ताह में 60 से 70 बेड का पिकू वार्ड बनकर तैयार हो जाएगा। जिसमें आठ बेड का आईसीयू जिला अस्पताल में बनाया जा रहा है। वहीं ईएसआई अस्पताल में अन्य ऑक्सीजन बेड बनाए जाएंगे। लोगों को भी सचेत रहना चाहिए और बच्चों का विशेष ध्यान रखना होगा।
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-डॉ.विजय दहिया, सिविल सर्जन एवं बाल रोग विशेषज्ञ।
-बच्चों की इम्यूनिटी काफी मजबूत होती है, लेकिन फिर भी बच्चों पर ध्यान देना जरूरी है। अभिभावकों और बच्चों को कोरोना गाइडलाइन का सख्ती से पालन करना होगा, तभी हम इसके खतरे को कम कर सकते हैं।
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-डॉ. पारुल वशिष्ठ, बाल रोग विशेषज्ञ, जिला अस्पताल।
फोटो-21 से 24 तक
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