संवाद न्यूज एजेंसी
जगाधरी। जिले में 1600 से अधिक टीबी मरीजों को पोषण किट का इंतजार है। पोषण किट की नियमित उपलब्धता न होने से मरीजों को उपचार के साथ पौष्टिक आहार जुटाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
अब प्रशासन ने टीबी मरीजों को पोषण और सामाजिक सहयोग उपलब्ध करवाने के लिए उद्यमियों की सीएसआर गतिविधियों को निक्षय मित्र योजना से जोड़ने की पहल की है। इसके तहत प्रशासन की ओर से औद्योगिक इकाइयों से मरीजों को गोद लेकर नियमित रूप से पोषण किट उपलब्ध करवाने की अपील की जा रही है।
टीबी मरीजों के उपचार में दवाओं के साथ पौष्टिक आहार की भी अहम भूमिका होती है। पर्याप्त पोषण मिलने से मरीजों को कमजोरी से उबरने और स्वास्थ्य में सुधार करने में मदद मिलती है। सरकार की ओर से टीबी मरीजों को प्रतिमाह एक हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। इसके बावजूद कई मरीजों को सामाजिक सहयोग और अतिरिक्त पोषण की जरूरत रहती है। प्रशासन का प्रयास है कि अधिक से अधिक मरीजों को निक्षय मित्रों से जोड़ा जाए, ताकि उन्हें उपचार के दौरान जरूरी मदद मिल सके।
उपायुक्त प्रीति ने औद्योगिक इकाइयों के प्रतिनिधियों से टीबी मरीजों को गोद लेकर नियमित रूप से पोषण किट उपलब्ध कराने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि टीबी उन्मूलन केवल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि स्वस्थ समाज के प्रति सभी को अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए। इस अभियान में समाज के प्रत्येक वर्ग की भागीदारी जरूरी है। सीएसआर के माध्यम से औद्योगिक इकाइयां मरीजों के पोषण और उपचार में महत्वपूर्ण सहयोग दे सकती हैं। इसे लेकर उपायुक्त प्रीति ने विभिन्न विभाग के अधिकारियों की बैठक लेकर निर्देश दिए।
निक्षय मित्र बनकर दे सकते हैं सहयोग
कोई भी व्यक्ति, संस्था, एनजीओ, शिक्षण संस्थान, सीएसआर इकाई, निर्वाचित जनप्रतिनिधि, सरकारी कर्मचारी या ग्राम सरपंच निक्षय मित्र बनकर टीबी मरीज को गोद ले सकता है। इसके तहत मरीजों को पोषण किट उपलब्ध करवाने के साथ उपचार के दौरान आवश्यक सहयोग भी दिया जा सकता है। प्रशासन ने सामाजिक, धार्मिक और शैक्षणिक संस्थाओं के अलावा विभिन्न सभाओं और संगठनों से भी इस अभियान में भागीदारी की अपील की है।