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अब पेंसिल रोकेगी बालश्रम, पोर्टल पर लापता व रेस्क्यू बच्चे का मिलेगा डाटा

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यमुनानगर। देशभर के बाल श्रमिक, बाल भिक्षुक व लापता बच्चों या अगवा बच्चों का डाटा अब एक ही जगह मिल सकेगा। इसके लिए केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने पोर्टल की शुरुआत की है। बालश्रम में कमी लाने को लेकर इस पोर्टल की शुरुआत की गई है। इसका नाम पेंसिल रखा गया है। इसका उद्देश्य मजदूरी की दलदल में धंसे बच्चों को रेस्क्यू कर उनकी कांउसलिंग कर उनके हाथ में पेंसिल पकड़ा उन्हें पढ़ाना भी है। इसलिए इसका नाम पेंसिल पोर्टल रखा गया है। वहीं लापता बच्चों का डाटा भी इस पोर्टल पर मिल जाएगा। जिससे उन्हें ढूंढने, रेस्क्यू करने व उनके घर तक पहुंचाने में काफी मदद मिलेगी। वहीं रेस्क्यू किए गए बच्चे की जानकारी भी इस पर अपलोड करनी होगी। इसके लिए हर जिले में नोडल अधिकारी की नियुक्ति की जा रही है। इसी के साथ ही हर माह पोर्टल पर रिपोर्ट करनी होगी कि इस माह कितने बच्चों को रेस्क्यू किया गया, ऐसे कितने बच्चों को स्कूल भेजा गया है। इसकी मॉनीटरिंग की जाएगी, ताकि पता चल सके कि इस दिशा में उठाया गया यह कदम कितना कारगर साबित हो रहा है।
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हर माह मिलते हैं सौ से ज्यादा मामले
यमुनानगर जगाधरी पौराणिक व औद्योगिक नगरी है। जिले में बालश्रम, बाल भिक्षुक, लापता व अगवा कर बच्चों को लाने के हर माह 80 से 100 मामले मिलते हैं। चाइल्ड लाइन की नोडल अधिकारी व बाल संरक्षण समिति की सदस्य डॉ. अंजू वाजपेयी ने बताया कि चाइल्ड लाइन, जिला बाल संरक्षण समिति, जिला बाल कल्याण समिति के पास करीब 80 से 100 मामले हर माह आते हैं। जिन्हें संबंधित संस्था निपटाती है। उन्होंने बताया कि सबसे ज्यादा चाइल्ड लाइन के पास करीब 50 से 60 केस हर महीने आते हैं।
यमुनानगर के लिए कारगर सिद्ध होगा पोर्टल
यमुनानगर-जगाधरी बहुत बड़ी औद्योगिक नगरी है। जहां देश के हर राज्य से लोग काम करने आते हैं। यहां विश्व का सर्वाधिक स्टील का बर्तन बनाया जाता है, वहीं एशिया की सबसे ज्यादा प्लाई बनाने वाली इकाईयां भी हैं। जिसमें लाखों प्रवासी काम करते हैं। वहीं इन इकाईयों, फैक्ट्रियों में काम करने के लिए बच्चों को लाया जाता है। वहीं दुकानों, होटलों व रेस्तरां में भी प्रवासी बच्चों को बहला फुसला कर लाया जाता है, जिसके बाद उनसे यहां काम करवाया जाता है। ऐसे में यह पेंसिल पोर्टल संस्थाओं के लिए मददगार साबित होगी।
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पोर्टल से मिलेगी यह सहायता
पोर्टल पर देश के किसी भी राज्य व जिले से लापता बच्चों व वहां से रेस्क्यू किए गए बच्चों की पूूरी जानकारी होगी। ऐसे में यह आसानी से पता चल जाएगा कि लापता किस राज्य व जगह का है। यमुनानगर में अब तक रेस्क्यू किए गए बच्चों के साथ सबसे बड़ी परेशानी संवाद की थी। अधिकतर बच्चे पूर्वोत्तर भारत व उत्तर दक्षिण भारत के थे। जिन्हें सिर्फ अपनी क्षेत्रीय भाषा ही आता थी। जिस कारण उनके अभिभावकों व परिजनों के बारे जानकारी लेने में भारी परेशानी होती है। ऐसे में पोर्टल से ऐसे बच्चों की पूरी जानकारी मिल जाएगी, जिससे उनके परिजनों तक पहुंचना आसान होगा।
कोई भी कर सकेगा पोर्टल पर शिकायत
इस पोर्टल पर आम नागरिक भी शिकायत कर सकता है। अगर किसी को कोई बच्चा किसी दुकान, फैक्टरी, होटल, रेस्तरां, घर काम करते या भीख मांगते दिखे तो वह इसकी सीधी शिकायत पोर्टल पर कर सकता है। इसके लिए व्यक्ति को जानकारी के साथ उसकी लोकेशन के साथ पेंसिल डॉट जीओवी डॉट इन साइट पर लॉग इन करके शिकायत कर सकता है। इसके साथ वह बच्चे को रेस्क्यू करने बारे में जानकारी व ट्रेस भी कर सकता है।
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