गांव के एकमात्र पशु अस्पताल में कोई भी पशु चिकित्सक न होने से पशुपालकों में रोष है। इससे जहां पशुपालकों के पशुओं को भयंकर बीमारी होने का खतरा है। ग्रामीण अश्वनी, राजेश, प्रवीण, राजकुमार व ललित आदि का कहना है कि उनके पशुओं को मुंहखुर की बीमारी ने अपनी चपेट में ले लिया है। ग्रामीणों ने बताया कि खिजराबाद में पशु चिकित्सालय खुले हुए तो कई साल हो गए लेकिन आज तक यहां पशु चिकित्सक की नियुक्ति नहीं हो पाई जिसकी वजह से पशु को अपने पशुओं की चिकित्सा के लिए निजी डॉक्टर या मलिकपुर स्थित पशु चिकित्सालय जाना पड़ता है जो कि काफी महंगा साबित होता है। ग्रामीणों ने मांग की है कि खिजराबाद के पशु चिकित्सालय में एक पशु चिकित्सक की स्थायी नियुक्ति की जाए जिससे ग्रामीणों को अपने पशुओं की चिकित्सकीय जांच करवाने में कोई दिक्कत ना आए
पशु चिकित्सालय बन रहा खंडहर
ग्रामीणों का कहना है कि खिजराबाद का पशु चिकित्सालय घास फूस और कबाड़ की वजह से खंडहर बनता जा रहा है। इस परिसर में कभी-कभार पशु चिकित्सक जांच के कैंप जरूर लगते हैं लेकिन यहां पर पशु चिकित्सक आज तक नहीं आया है जिसे ग्रामीणों में काफी रोष है।
खिजराबाद के सरकारी अस्पताल में चिकित्सक नहीं है यह उनकी जानकारी में है, लेकिन फिर भी विभाग की तरफ से जल्द ही कोई न कोई विभाग का सहायक नियुक्त कर दिया जाएगा जिससे ग्रामीणों को अपने पशुओं की चिकित्सा जांच करवाने में दिक्कत नहीं आएगी।