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यमुना के अवैध बांधों का निरीक्षण करने दिल्ली से पहुंची हाईकोर्ट की टीम

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यमुनानगर। यमुना पर खनन ठेकेदार और माइनिंग माफिया द्वारा बनाएं गए अवैध रास्तों और बांधों का निरीक्षण करने के लिए रविवार को दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा गठित समिति के सदस्यों ने रविवार को यमुनानगर जिले का दौरा किया। सबसे पहले कमेटी के सदस्य ताजवाले बैराज से 17 किलोमीटर नीचे कनालसी गांव गए। कनालसी का दौरा करने के बाद उन्होंने मंडौली गांव का भी दौरा किया। हाईकोर्ट द्वारा गठित कमेटी में शामिल दिल्ली उच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति इंदरमीत कौर, अतिरिक्त मुख्य सचिव (सेवानिवृत्त) निवेदिता हरन और कोर्ट मित्र वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश खन्ना ने हरियाणा के इंजीनियर इन चीफ बिमल कुमार व मुख्य अभियंता मोहनलाल राणा और जिले के अन्य विभागों के अधिकारियों के साथ मीटिंग भी की। समिति के सदस्यों के मुताबिक वे नदी के किनारे, अवैध रास्तों और बांधों के साथ-साथ उन कामों का निरीक्षण करने पहुंचे हैं, जिनकी वजह से दिल्ली को पानी की आपूर्ति बाधित होती है। यह समिति सुनवाई की अगली तारीख से पहले अदालत को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।
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दिल्ली जल बोर्ड की टीम ने किया था दौरा
दरअसल एसबी त्रिपाठी ने यमुना के प्रवाह को पुनर्जीवित करने के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय में एक आवेदन दिया था। जिसमें कहा गया था कि हरियाणा क्षेत्र में यमुना में जगह-जगह अवरोध उत्पन्न किए जा रहे हैं। जिससे नदी का अस्तित्व खतरे में हैं। हाईकोर्ट ने स्टेटस जानने के लिए दिल्ली जल बोर्ड को कहा था और 8 मई को रिपोर्ट मांगी थी। जिस पर दिल्ली जल बोर्ड के अधिकारियों ने 3 मई, 2019 को यमुनानगर का दौरा किया था। इस टीम को कनालसी में यमुना पर अवैध रास्ता मिला था। जिस पर अधिकारियों ने चिंता जताई थी कि इससे दिल्ली में पानी कम पहुंचेगा और गर्मी में दिल्ली को भीषण किल्लत झेलनी पड़ सकती है और वजीराबाद प्लांट बंद हो सकता है। इसके बाद हाईकोर्ट ने समिति का गठन किया था।
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दिल्ली जल बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अनिल कुमार सिंह द्वारा हाल ही में यमुना नदी के मुख्य धारा में पानी के बहाव को अवरोध करने बारे मुख्य सचिव डीएस ढेसी को एक पत्र लिखा था। जिस पर स्थानीय अधिकारियों ने कुछ दिनों पहले कनालसी, मंडोली, बीबीपुर, पोबारी, एमटी करहेड़ा, गुमथला और नगली सहित कई अन्य गांवों में बनाए गए पुलों को तोड़ने की कार्रवाई की थी। हालांकि यह कार्रवाई खानापूर्ति थी।
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अमर उजाला ने उठाया था मुद्दा
यमुना नदी पर बनाएं गए अवैध रास्तों और बांधों के मुद्दे को अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित किया था। जिस पर अधिकारियों ने इन पुलों को तोड़ने की कार्रवाई की थी। अब दिल्ली हाईकोर्ट ने एक याचिका की सुनवाई करते हुए एक समिति गठित कर स्टेटस रिपोर्ट तलब की है। दरअसल दिल्ली जल बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि इन अवैध बांधों और रास्तों की वजह से दिल्ली को पानी कम मिल रहा है। जिससे इन गर्मियों में पेयजल की भारी किल्लत उठानी पड़ सकती है और दिल्ली में बड़ा पानी का संकट बन सकता है।
वर्जन
जल सेवा प्रभाग जगाधरी के कार्यकारी अभियंता विनोद कुमार ने कहा कि दिल्ली उच्च न्यायालय की गठित समिति के सदस्यों ने कनालसी और मंडौली गांवों का दौरा किया। उन्होंने संतोष व्यक्त किया है क्योंकि उन गांवों में यमुना की मुख्य धारा में कोई रुकावट नहीं थी। हमने यहां बने रास्तों को पहले ही हटा दिया था।
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फोटो नंबर 76
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