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शिक्षा विभाग के फरमान ने बढ़ाया अध्यापकों का बोझ, विभाग की कार्यप्रणाली से रोष

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शिक्षा विभाग के फरमान ने बढ़ाया अध्यापकों का बोझ, विभाग की कार्यप्रणाली से रोष
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-पत्र जारी कर कक्षा तीसरी, चौथी व पांचवीं के पाठ्य पुस्तकों को प्राप्त करने को कहा
जठलाना। स्कूलों में परीक्षाओं का दौर जारी है। ऐसे में शिक्षा विभाग ने अध्यापकों पर एक अतिरिक्त बोझ भी डाल दिया है। शिक्षा विभाग के निदेशक ने पत्र जारी कर जिला के सरकारी स्कूल के मुख्यिाओं को कक्षा तीसरी, चौथी व पांचवीं की पाठ्य पुस्तकों को जिला शिक्षण एवं प्रशिक्षण केंद्र तेजली से प्राप्त करने के आदेश जारी किए है जिन्हें 14 मार्च तक प्राप्त करने के निर्देश है। शिक्षा विभाग के इस निर्देश से अध्यापकों में शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर रोष है। उनका कहना है कि एक ओर तो स्कूलों में परीक्षाओं का दौर चल रहा है वहीं दूसरी ओर स्कूलों में अध्यापकों की कमी भी है। ऐसे में इस प्रकार के आदेश जारी करना स्कूल की जरूरी गतिविधियों को प्रभावित करना है।
जिले के 5 ब्लॉक में है 491 स्कूल
जिला के 5 ब्लॉक रादौर, मुस्तफाबाद, साढ़ौरा, छछरौली व जगाधरी में प्राइमरी स्कूलों की संख्या 491 है। जिनके लिए विभाग की ओर से निर्धारित तीसरी, चौथी व पांचवीं कक्षाओं की पाठ्य पुस्तकें जिला शिक्षा विभाग द्वारा जारी कर दी गई है लेकिन इस वर्ष स्कूलों के इंचार्ज को इन्हें 14 मार्च तक जिला शिक्षण एवं प्रशिक्षण केंद्र तेजली से प्राप्त करना होगा।
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हर वर्ष स्कूलों में ही पहुंचती थी किताबें
राजकीय प्राथमिक शिक्षक संघ जिला महासचिव रामेश्वर बापा ने बताया कि हर वर्ष विभाग की ओर से स्कूलों में ही यह किताबें उपलब्ध करवाई जाती थी लेकिन इस वर्ष विभाग की ओर से यह फरमान जारी किया है कि किताबें तेजली केंद्र से प्राप्त की जाएं। स्कूलों में पहले ही अध्यापकों की कमी है और दूसरी ओर वार्षिक परीक्षाओं का दौर चल रहा है। ऐसे मेें विभाग का यह कार्य स्कूल के अध्यापकों पर अतिरिक्त बोझ डालने वाला है। जिले का क्षेत्र करनाल की सीमा से सटे गुमथला राव व काला आंब तक सटा हुआ है। ऐसे में इतनी दूर-दूर से शिक्षकों को पुस्तक प्राप्त करने के लिए तेजली जाना होगा इसलिए विभाग को इन आदेशों को वापिस लेना चाहिए।
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पहले देरी और अब दूरी को लेकर चर्चा में पाठ्य पुस्तकें
शिक्षा विभाग की ओर से जब से स्कूलों में बच्चों को पाठ्य पुस्तकें निशुल्क उपलब्ध करवाने की योजना शुरू की गई है, तब से हर वर्ष पुस्तके पहुंचने का मामला चर्चा में बना रहता है। गत सभी वर्षो में पाठ्य पुस्तकों को होने वाली देरी अकसर परेशानी बनी रहती थी। महीनों बीत जाने के बाद भी स्कूलों में किताबें नहीं पहुंच पाती थी जिससे बच्चों की शिक्षा प्रभावित होती थी लेकिन इस वर्ष जब जल्दी पुस्तकें उपलब्ध हो रही है तो उनकी दूरी को लेकर एक बार फिर यह चर्चा का विषय बन गई है। अध्यापकों की मांग है कि 31 मार्च तक सभी स्कूलों में यह किताबें उपलब्ध करवाई जाएं या ब्लॉक स्तर पर भेजी जाएं।
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