खिजराबाद। किसानों के हिस्से का यूरिया खाद प्लाई फैक्ट्रियों में सप्लाई हो रहा है, जबकि किसानों को खाद से महरूम होना पड़ रहा है। यह पूरा सिस्टम एक दिन से नहीं बल्कि लंबे समय चल रहा है। हैरत की बात है कि कृषि विभाग को भी इसके बारे में भनक तक नहीं है। विभाग की इसी लापरवाही का फायदा अब ये फैक्टरी संचालक उठा रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जब उन्हें खाद की जरूरत होती है उन्हें नहीं मिलता, ऐसे में उनके हिस्से का खाद फैक्ट्रियों में भेजा जा रहा है। जिससे उनमें रोष है। लोगों का कहना है विभाग को इसमें कार्रवाई करने की मांग की है। किसानों ने बताया कि एक यूरिया का बैग 268 रुपये में मिलता है और प्लाई फैक्टरी में यही बैग 400 रुपये में बिकता है। प्लाई फैक्टरी में ग्लू बनाने के लिए यूरिया की आवश्यकता पड़ती है। बिना यूरिया के ग्लू के प्लाई को नहीं चिपकाया जा सकता। एक जानकारी के अनुसार एक प्रेस से 10 से 12 घंटे में आठ से दस हजार फीट प्लाई बोर्ड बनाया जा सकता है। प्लाई बोर्ड को चिपकाने के लिए 1300 से 1500 किलोग्राम ग्लू की जरूरत होती है। वहीं रोजाना चले तो प्लाई फैक्टरी को प्रतिदिन 15 हजार क्विंटल ग्लू की जरूरत पड़ती है। यदि टेक्निकल ग्रेड यूरिया को खरीदकर ग्लू बनाया जाए तो लगभग रेट में आधा फर्क पड़ता है। खेत में डालने वाले यूरिया से 15 रुपये किलो ग्लू बनता है। सरकार द्वारा यूरिया की कालाबाजारी और अन्य राज्यों में बेचने से बचाने के लिए आधार कार्ड पर यूरिया देने की स्कीम लागू की हुई है।
प्लाई फैक्टरी के लिए अलग से कमर्शियल यूरिया आता है।और खेतों में डालने वाला यूरिया अलग होता है। कोई फैक्टरी संचालक यदि खेतों में डालने वाला यूरिया इस्तेमाल करता है वह कानूनन गलत है। ऐसा करने वाले फैक्टरी संचालक और बेचने वाले के खिलाफ पुलिस में मामला दर्ज करवाया जाएगा और लाइसेंस भी रद किया जाएगा।
-बलबीर सिंह भान, क्वालिटी कंट्रोल निरीक्षक, कृषि विभाग।