एनएचएम कर्मचारियों की हड़ताल को आशा वर्कर्स का समर्थन
अमर उजाला ब्यूूरो
यमुनानगर। पिछले सात दिनों से यमुनानगर सिविल अस्पताल में हड़ताल कर धरने पर बैठी एनएचएम वर्कर्स को सोमवार को आशा वर्कर्स ने अपना समर्थन दिया। दोनों ने एकजुट होकर शहर की सड़कों पर रोष प्रकट किया। कर्मचारियों ने हाथों में तख्तियां व बैनर लेकर नारेबाजी करते हुए प्यारा चौक पर पहुंचे। यहां उन्होंने आधा घंटा नारेबाजी करने के बाद स्वास्थ्य विभाग का पुतला फूंका। उसके बाद कर्मचारी वापिस रोष मार्च निकालते हुए सिविल अस्पताल में धरने पर बैठ गए। कर्मचारियों ने कहा कि जब तक उनकी तीन मांगों पर विभाग की सहमति नहीं बन जाती तब तक कर्मचारी हड़ताल पर रहेंगे। उधर, एनएचएम कर्मचारी संघ के प्रधान अमित गुर्जर ने कहा कि मांगों को लेकर कई बार उच्च अधिकारियों से बात की जा चुकी है लेकिन सिर्फ आश्वासन के कुछ नहीं मिला, जिससे कर्मचारियों में गहरा रोष है। उन्होंने कहा कि यदि इस बार मांगें पूरी नहीं हुई तो कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे। उधर, कर्मचारियों के हड़ताल पर चले जाने से स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित होने लगी हैं। दैनिक कार्य पेंडिंग पड़े हैं। यहां तक अस्पताल में कर्मचारियों की संख्या घट चुकी है।
आज होगी एसीएस से बातचीत
प्रधान अमित गुर्जर व सूरजभान ने बताया कि सोमवार को एनएचएम कर्मचारी संघ का चार सदस्यीय मंडल जिसमें महासचिव हरिराज, लीगल एडवाइजर विक्रम सोनी, सहसचिव कुलविंद्र कौर तथा अंबाला के महासचिव एवं स्टेट बॉडी सदस्य हरिंद्र सिंह को चंडीगढ़ में विभागीय एमडी अमनीत पी कुुमार ने बातचीत के लिए बुलाया। लेकिन वार्तालाप विफल रही। जिसके बाद स्टेट बॉडी की तरफ से हड़ताल को जारी रखने के लिए कहा गया है। एनएचएम नेता सूरज भान ने बताया कि मंगलवार को अब विभागीय एसीएस ने दोबारा से बातचीत के लिए बुलाया है। उन्होंने कहा कि यदि वार्तालाप सफल रही तो हड़ताल खत्म कर दी जाएगी, अन्यथा हड़ताल को अनिश्चितकालीन कर दिया जाएगा।
ये सेवाएं हो रही सबसे ज्यादा प्रभावित
550 कर्मचारियों के हड़ताल पर चले जाने से डिलीवरी, जन्म प्रमाण पत्र, एबुंलेंस, कंप्यूटर और अकाउंटस डिपार्टमेंट प्रभावित होगा। हड़ताल से सबसे ज्यादा एंबुलेंस और डिलीवरी सेवाएं प्रभावित हुई हैं। एनएचएम में 85 ड्राइवर व ईएमटी हैं जिनमें 50 फीसदी ड्राइवर हड़ताल पर हैं। जिससे मरीजों और तीमारदारों को एंबुलेंस लेने के लिए भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा रहा है।