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यमुनानगर-चंडीगढ़ रेल लाइन प्रोजेक्ट पर फिर लॉलीपॉप, 10 लाख रुपए आवंटित

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पिछले चार दशक से अधर में लटका है यमुनानगर-चंडीगढ़ रेल लाइन प्रोजेक्ट
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यमुनानगर। यमुनानगर से चंडीगढ़ वाया साढौरा, नारायणगढ़ रेल लाइन बिछने का अरमान ख्वाब बनकर ही रह गया है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर चार दशक पहले सर्वे तो हुआ, किंतु आगे रेलवे लाइन बिछाने की दिशा में कदम नहीं बढ़ सके हैं। इस ट्रैक के धरातल पर आने से न सिर्फ यमुनानगर बल्कि अंबाला, पंचकूला और चंडीगढ़ के लोगों को भी फायदा होगा। इस सौगात के लिए दशकों से इंतजार कर रहे युवा बुजुर्ग हो चले हैं, किंतु यमुनानगर-चंडीगढ़ रेल लाइन प्रोजेक्ट अब भी कागजों में अटका है। इस बार रेलमंत्री ने 91 किमी की इस लाइन के लिए 10 लाख रुपये का बजट आवंटित किया है। करोड़ों रुपये के प्रोजेक्ट के लिए केवल 10 लाख रुपये की धनराशि लॉलीपॉप ही है। इस रेल लाइन की जब से मांग की जा रही है, तब से अंबाला संसदीय सीट से कांग्रेस व भाजपा के सांसद बनते रहे हैं, फिर भी यह महत्वाकांक्षी परियोजना अधर में है।

पावंटा व कुरुक्षेत्र-करनाल रेल लाइन की मांग भी अधूरी
यमुनानगर-चंडीगढ़ के अलावा पावंटा और कुरुक्षेत्र-करनाल रेल लाइन बिछाने की मांग भी लंबे समय से की जा रही हैं। दैनिक रेल यात्री संघ समेत विभिन्न संगठन तीनों रेल लाइन के लिए कई वर्षों से संघर्षरत हैं, किंतु आज तक इन पर काम नहीं हो पाया। अंबाला संसदीय सीट से मौजूदा सांसद रतनलाल कटारिया भी यमुनानगर-चंडीगढ़ रेल लाइन का मुद्दा संसद में उठा चुके हैं।
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रेल बजट की पिंक बुक में अंबाला-सहारनपुर रेल ट्रैक पर कई आरओबी, अंडरपास आदि के लिए बजट पास किया गया है। इसके अलावा पुराने रेलवे क्वार्टर के स्थान पर नए क्वार्टर। इसी प्रकार जगाधरी वर्कशाप रेलवे कॉलोनीवासियों के लिए भी कई सौगात हैं। इसके अलावा कई अन्य कार्यों के लिए भी फंड जारी किया गया है ताकि इस रूट पर गाड़ियों की रफ्तार बढ़ाई जा सके।
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