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सवा सौ करोड़ रुपये की गन्ने की पेमेंट का फंसा पेंच, किसानों ने तीन घंटे तक रखा लघु सचिवालय का घेराव

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सवा सौ करोड़ रुपये की गन्ने की पेमेंट का फंसा पेंच, किसानों ने तीन घंटे तक किया लघु सचिवालय का घेराव
मिल प्रबंधन ने सोमवार तक पेमेंट का आश्वासन दिया, तब जाकर उठे किसान

सरस्वती शुगर मिल से जुड़े यमुनानगर, अंबाला, कुरुक्षेत्र जिलों के 26 हजार किसान प्रभावित
अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। किसानों की गन्ने की पेमेंट का पेंच एक बार फिर से फंस गया। पेमेंट न मिलने से नाराज किसानों ने गुरुवार को पहले जगाधरी अनाज मंडी में पंचायत की। उसके बाद नारेबाजी करते हुए लघु सचिवालय में पहुंचकर तीन घंटे तक घेराव रखा। किसानों ने एकजुट हो जोरदार नारेबाजी की और वहीं बैठ गए। किसान तब तक नहीं उठे, जब तक उन्हें कोई संतोषजनक आश्वासन नहीं मिला। हालांकि इससे पूर्व डीसी गिरीश अरोड़ा ने ज्ञापन लेकर उन्हें समझाने का प्रयास किया, लेकिन वे नहीं माने। वे मौके पर मिल प्रबंधन को बुलाने की मांग पर अड़ गए। मामला बिगड़ता देख डीसी ने मिल प्रबंधन से फोन पर बात की। उसके बाद सरस्वती शुगर मिल के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट डीपी सिंह मौके पर पहुंचे। उन्होंने किसानों को सोमवार से किसानों के खाते में गन्ने की पेमेंट डलवाने की बात कही। जिसके बाद किसान शांत हुए।
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हाइवे जाम करने की थी योजना
डीसी के समझाने के बाद भी रोषित किसान नहीं माने। उन्होंने किसानों को मिल में जाकर प्रबंधन से मिलने की बात कही। लेकिन वह नहीं माने। इसपर किसान मिल प्रबंधन को मौके पर ही बुलाने की बात को लेकर अड़ गए। किसानों की योजना थी, यदि पेमेंट का हल नहीं निकला तो वे पुराना नेशनल हाइवे जाम कर देंगे। लेकिन इसकी नौबत नहीं पड़ी। इसके बाद मौके पर मिल के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट डीपी सिंह पहुंचे। उनका कहना था कि सरकार ने गन्ने का रेट तो तय कर दिया है, लेकिन उनके पास कोई भी पत्र नहीं आया जिस कारण वह गन्ने की पेमेंट नहीं कर सके अब सरकार का पत्र आया है। सोमवार को पेमेंट खाते में डालनी शुरू कर दी जाएगी।
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26 हजार किसान पेमेंट न मिलने से प्रभावित
सरस्वती शुगर मिल 20 नवंबर को शुरू हो गया था। मिल को चले डेढ़ माह हो चुका है। और अब 40 लाख क्विंटल गन्ना मिल में पिराई के लिए आ चुका है। वहीं रोजाना एक लाख गन्ने की पिराई होती है। इस मिल से यमुनानगर, अंबाला व कुरुक्षेत्र के 26 हजार किसान जुड़े हैं जोकि गन्ने की पेेमेंट न होने से प्रभावित हैं।
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बीते साल भी फंस गई थी गन्ने की पेमेंट
बता दें कि बीते साल भी गन्ने की 100 करोड़ रुपये बकाया पेमेंट फंस गई थी। पेमेंट को लेने के लिए किसानों को धरने, प्रदर्शन और हाईवे जाम तक करने पड़े। यहां तक रादौर में हक लेने के लिए किया गया रोड जाम के दौरान पुलिस के लाठीचार्ज का सामना भी करना पड़ा। कई बार अधिकारियों व मिल प्रबंधन से भी नोंकझोंक हुई। तब जाकर उनकी पेमेंट हुई थी।
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600 क्विंटल गन्ना डाल चुके किसान
शाहपुरा के किसान गुरमुख सिंह बताते हैं कि उन्होंने 13 एकड़ में गन्ने की फसल लगाई है। और मिल में 20 नवंबर से गन्ना गिरा रहे हैं। और अब तक मिल में 600 क्विंटल गन्ना डाल चुके हैं परंतु एक बार भी पेमेंट नहीं मिली। पेमेंट न मिलने के कारण घर का खर्च भी सही तरीके नहीं चल पा रहा है। ऐसे में वे कहां जाएं। हर पेमेंट को लेकर यही दिक्कत आती है, लेकिन सरकार का किसानों की दिक्कतों का कोई ख्याल नहीं है।
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पेमेंट न मिलने से बच्चों की फीस भी नहीं दी
भारतीय किसान यूनियन के जिला प्रधान संदीप उर्फ संजू का कहना है कि आठ एकड़ में गन्ना खड़ा है। मिल चलते हुए गन्ना गिराना शुरू कर दिया था। पेमेंट न मिलने के चलते अभी तक मुफ्त में ही गन्ना डाल रहे हैं। पेमेंट न मिलने से बच्चों की फीस भी नहीं दी जा रही। किसानों की तकलीफ कोई सुनने वाला नहीं है, जबकि किसान आर्थिक तंगी से गुजर रहा है।
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इन्हें सौंपी नई जिम्मेदारी
घेराव से पूर्व जगाधरी अनाज मंडी में हुई मीटिंग में किसानों ने गुरमुख सिंह शाहपुरा व राजीव ससौली को जिला उपप्रधान की जिम्मेदारी सौंपी है। उन्होंने कहा कि उन्हें जो जिम्मेदारी सौंपी गई है उस पर वे खरा उतरेंगे और भारतीय किसान यूनियन को ओर मजबूत करने का काम करेंगे।
फोटो-। 15, 16, 17, 18 व 19
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