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हड़ताल का 7वां दिन: सबकुछ चौपट, पटरी से लूढ़का आवाम, समर्थन में कूदे दूसरे संगठन

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133 बसें चलीं, लेकिन यात्रियों को नहीं मिली राहत, 12 विभागों के समर्थन से हालात और बिगड़े
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-संगठनों ने एकजुट हो पहले बस स्टैंड के बाहर नारेबाजी की, फिर जुलूस निकाल वर्कशॉप के सामने दिया धरना यमुनानगर। प्राइवेट बसों को ठेके पर लेने के विरोध में रोडवेज कर्मचारियों की हड़ताल सातवें दिन भी जारी रही। हड़ताल के चलते सबकुछ चौपट हो गया है और आमजन परेशानी झेलने को मजबूर है। तीन दिन स्कूल बसों का सहारा लिया गया, मगर बात नहीं बनी। स्कूल खुलने से बसें भी वापस लौट गई। सोमवार को नए स्टाफ को ड्यूटी चढ़ाया गया और निजी बसों समेत 133 बसें विभिन्न रूटों पर निकाली गई, लेकिन इन बसों के चलाएं जाने से भी यात्रियों को राहत नहीं मिली और जनता बसों के लिए भटकती नजर आई। क्योंकि कौनसी बस किसी रूट पर जा रही है, इसका पता यात्रियों को नहीं चल पा रहा था। जिससे स्थिति संभलने की बजाय ओर बिगड़ गई।

हड़ताल में शामिल हुए 12 विभागों के कर्मचारी
अध्यापक, पीडब्ल्यूडी, पब्लिक हेल्थ, रिटायर्ड कर्मचारी संघ, हरियाणा सक्षम यूनियन, नगर पालिका, फायर ब्रिगेड, अंबेडकर युवा मंच, बिजली कर्मचारी समेत 12 संगठन एकजुट हो यमुनानगर बस स्टैंड पर पहुंचे। यहां कर्मचारियों की संख्या 200 से अधिक थी। कर्मचारियों ने हाथों में बैनर लेकर प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। स्टैंड के अंदर पौना घंटा नारेबाजी करने के बाद सभी संगठन नारेबाजी करते हुए जुलूस की शक्ल में वर्कशॉप के सामने धरने पर बैठे रोडवेज कर्मचारियों को समर्थन दिया।
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तीन ड्राइविंग टेस्ट में फेल 45 पास
सरकार ने ड्राइवर के लिए 504 और कंडक्टर पदों के लिए 905 पदों पर भर्ती निकाली है। जिसके तहत उन ड्राइवरों को रखा जा रहा हैं जिनके पास तीन साल का अनुभव है। जबकि कंडक्टर के लिए दस साल का अनुभव मांगा गया है। सोमवार को आरटीए विभाग ने ठेकेदार द्वारा रखे जाने वाले 147 ड्राइवरों की लिस्ट भेजी। इनमें से 45 ने मेडिकल व ड्राइविंग टेस्ट पास किया जबकि तीन कैंडिडेट फेल हो गए। चयनित स्टाफ को रोडवेज की चाबियां सौंप रूट पर भेजा गया।

133 बसें भेजी गई रूटों पर
सोमवार को कुल 133 बसें रूटों पर भेजी गई। इनमें से रोडवेज की 61, स्कूल की 10 और प्राइवेट 62 बसें विभिन्न रूटों पर चली। वहीं रूटों पर भेजने से पहले कर्मचारियों ने बसों के आगे रूट चस्पाए गए, ताकि यात्रियों को उस रूट पर जाने के लिए बस को ढूंढने में कोई परेशानी न हो।

यात्री बोले-सरकार निकम्मी, कर्मचारी उनसे दो कदम आगे
बस स्टैंड पर खड़े यात्री हरदेव, अशोक कुमार, आशीष कुमार, प्रीतम सिंह, मनोज कुमार, बलबीर सिंह आदि ने बताया कि सरकार तो निकम्मी है ही ऊपर से रोडवेज कर्मी दो कदम आगे हैं। दोनों के विवाद में आम आदमी पिस रहे हैं। कौनसी बस कहां जा रही है, इसके बारे में पता ही नहीं चल पाता। कागज पर रूट लिखकर शीशे पर चिपकाया जा रहा है, जो दिखाई भी नहीं देता।
-महिला यात्री पूनम, आरती, कमलजीत कौर, रेणू बाला ने बताया कि जितनी परेशानी इस समय हो रही है उतनी पहले कभी नहीं हुई। पहले हड़ताल एक या दो दिन चलती थी, मगर सप्ताह भर से बसें बंद है ऐसे में उन्हें सबसे ज्यादा दिक्कत उठानी पड़ रही है।

25 अक्तूबर है आखिरी डेट
केवल तीन माह के लिए ही यह भर्ती निकाली गई है। जिस फार्म को भरने के लिए 25 अक्तूबर आखिरी तारीख है। यमुनानगर बस स्टैंड पर फार्म भरने की प्रक्रिया जारी है। फार्म भरने के लिए आने वाले अधिकतर आवेदनकर्ता 28 साल से कम उम्र के ही हैं जिस कारण वह इसको लेकर काफी दुविधा में फंसे हुए हैं। वहीं शर्तों के अनुसार कंडक्टर पद के लिए अगर आवेदकर्ता का चयन हो जाता है तो उसे 19 हजार 900 रुपये मासिक का वेतन दिया जाएगा।
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आज 45 ड्राइवरों का मेडिकल व ड्राइविंग टेस्ट करवाकर उन्हें रोडवेज की चाबियां सौंप कर रूट पर भेजा गया है। इसके अलावा 133 में से रोडवेज की 61, स्कूल की 10 और प्राइवेट 62 बसें चली हैं। यमुनानगर में कितने ड्राइवर व कंडक्टर रखे जाने है इसके बारे में सरकार को ही पता है।
-रविंद्र पाठक, जीएम, यमुनानगर।
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