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3500 शिकायतों के बाद भी नहीं शुरू हुई गिरदावरी, किसान बोले-क्या फसल कटने के बाद होगी
-12 दिन पहले हुई बारिश से खराब हुई फसल की कृषि विभाग के पास आई 3400 शिकायतें, जबकि छह दिन पहले हुई ओलावृष्टि में आ चुकी 100 शिकायतें
अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। दो बार की बारिश ने किसानों की फसल को तबाह करके रख दिया। जो बची उसकी भी गिरदावरी नहीं हो पा रही। इससे किसानों में रोष है। 12 दिन पहले हुई बारिश से खराब हुई फसल की 3400 शिकायतें और 11 अक्तूबर को आंधी के साथ आई बारिश व ओलावृष्टि से खराब हुई फसल की 100 से ज्यादा शिकायतें कृषि विभाग के पास आ चुकी हैं। ये वो शिकायतें हैं जिन किसानों का फसल बीमा हुआ है। शिकायतों के आधार पर विभाग रिपोर्ट तैयार कर सरकार व उच्च अधिकारियों को सौंपी जाती है, जिसके बाद गिरदावरी की प्रक्रिया शुरू होती है।
इतने हेक्टेयर में हुई थी धान की रोपाई व गन्ने की बिजाई
कृषि विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक जिले में इस बार 72 हजार हेक्टेयर पर धान की रोपाई और 30 हजार हेक्टेयर पर गन्ने की बिजाई हुई थी। लेकिन बारिश व ओलावृष्टि के कारण तकरीबन 100 प्रतिशत धान व 70 से 75 फीसदी गन्ने की फसल खराब होने का अनुमान है। हालांकि विभाग इतने हुए नुकसान की पुष्टि नहीं कर रहा, मगर किसानों के अनुसार इससे ज्यादा फसल खराब हो चुकी है।
इतना रुका पड़ा पिछला बीमा का पैसा
कृषि विभाग के अनुसार 200 किसान ऐसे हैं जिनका पिछले साल का करीब एक करोड़ रुपये फसल बीमा का रुका पड़ा है। पैसे रुकने की वजह किसानों द्वारा बैंकों से लिए गए लोन व अन्य कागजी कार्रवाई का पूरा न होना बताया गया है। और इस बार यूनिवर्सल शैंपो कंपनी पर फसल बीमा का टेंडर है। जोकि फसलों का बीमा कर रही है।
पटवारी की गिरदावरी के बाद मिलता है मुआवजा
बता दें कि पटवारी उन्हीं फसलों की गिरदावरी करता है जोकि फसल बीमा के तहत नहीं आती। वह मौके पर फसल खराब हुई का अनुमान लगाकर रिपोर्ट को तहसीलदार को सौंपता है। इसके बाद ही अगली कार्रवाई शुरू होती है।
केवल कागजों में हो रही गिरदावरी
भारतीय किसान संघ के जिलाध्यक्ष रामबीर सिंह चौहान के अनुसार 100 प्रतिशत फसलें खराब हो चुकी हैं। गिरदावरी के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है। गिरदावरी के दौरान किसान से कोई कांटेक्ट नहीं किया जाता। ऐसे में केवल कागजों में ही गिरदावरी होती है। कई गांव तो ऐसे हैं जहां अब गिरदावरी की प्रक्रिया तक शुरू नहीं हुई। किसान चारों तरफ से मरा पड़ा है लेकिन सरकार का किसानों की तरफ कोई ध्यान नहीं। फसल खराब होने से किसानों को रोटी के लाले पड़े हैं।
फिर क्या फसल कटने के बाद होगी गिरदावरी
भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष संजू गुंदियाना का कहना है कि सरकार जानबूझ कर गिरदावरी में देरी कर रही है। जबकि फसल कटाई जोरों पर, जब फसल कट जाएगी फिर क्या खाक गिरदावरी होगी। जबकि किसानों ने फसल नुकसान की शिकायतें काफी समय से कृषि विभाग में दी हुई हैं। उन्होंने खजूरी, जगूड़ी, टोपरा, इस्माइलपुर, बदनपुरी, हाफिजपुर, दौलतपुर, हरनौल, मंडेबर, रोड छप्पर, दामली, खुर्दी, सुखपुरा, खंडवा व नाहरपुर गांवों का दौरा किया। यहां फसलें पूरी तरह से तबाह हो चुकी हैं।
इस तरह से मिलता है फसल बीमा पर मुआवजा
फसल का नाम बीमित राशि (रुपये) किसान का प्रीमियम (रुपये)
धान 29,750 594.89
बाजरा 14,500 291.37
कपास 29000 582.75
मक्का 16,750 335.89
पहले जो बारिश हुई थी उसमें 3400 किसानों की शिकायतें आई थीं और 11 अक्तूबर को आंधी के साथ आई बारिश व ओलावृष्टि में खराब हुई फसल की 100 से अधिक शिकायतें आ चुकी हैं। यह सभी शिकायतें फसल बीमा के तहत आई हैं। विभाग ने इनकी रिपोर्ट बनाकर उच्च अधिकारियों को भेज दी है। गिरदावरी का काम फसल बीमा कंपनी का है।
-डॉ. सुरेंद्र यादव, डीडीए, यमुनानगर।
पटवारी लगातार मौके पर जाकर गिरदावरी कर रहे हैं और 21 अक्तूबर तक यह प्रक्रिया चलेगी। जैसे-जैसे गिरदावरी की रिपोर्ट आ रही है वैसे ही उसे रिपोर्ट अधिकारियों को सौंप दी गई है। मुआवजा सरकार को देना है। कब देना है सरकार ही जानती है।
-दर्शन लाल, तहसीलदार, यमुनानगर।