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चित्रकारी का हुनर दिखा रहे जय सिंह चितौड, मुख्यमंत्री भी कर चुके सम्मानित

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चित्रकारी का हुनर दिखा रहे जय सिंह चित्तौड, मुख्यमंत्री भी कर चुके सम्मानित
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बिना गुरु के चित्रकारी में महारत, कैनवस पर उकेरता कल्पनाओं के रंग
चित्रकारी का हुनर दिखा रहे जय सिंह चित्तौड़, मुख्यमंत्री भी कर चुके सम्मानित
रामकिशन कश्यप
खिजराबाद।
हर इंसान के अंदर कोई ना कोई प्रतिभा होती है और यदि इंसान अपनी प्रतिभा पहचानकर कुछ ना कुछ करे तो वह बहुत बेहतर कर सकता है। गांव देवधर का जय सिंह चित्तौड़ भी अपनी प्रतिभा को पहचानकर चित्रकला के क्षेत्र में काफी नाम कमा चुका है। जय सिंह को बेशक विषम परिस्थितियों का सामना करना पड़ा हो लेकिन उसने अपनी हिम्मत ना हारते हुए अपनी प्रतिभा को काफी निखारा है। वे विश्व प्रसिद्ध चित्रकार विजेंद्र शर्मा दिल्ली निवासी को अपना आदर्श मानते हैं। चित्रकला में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने पर मुख्यमंत्री भी सम्मानित कर चुके हैं। इसके अलावा दर्जनों सम्मान प्राप्त कर चुका है।
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ब्रुश की कला में महारत
जय सिंह को ब्रुश कला में महारत है। इसी से अपने गरीब माता पिता एवं गांव देवधर का नाम रोशन किया है। उसे अपने क्षेत्र में बिना गुरु के ज्ञान हासिल है। बिना ग्राफ, बिना तकनीक, बिना मापतौल के फ्री हैंड चित्रकला में महारथ हासिल कर चुके हैं और उनके द्वारा बनाया गया कोई भी चित्र सटीक बैठता है। जयसिंह के अपने क्षेत्र में ही नही बल्कि पूरे प्रदेश में उनकी कला के फैन हैं। उसने गांव में ही अपना एक आर्टिस्ट केंद्र स्थापित किया है।
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दसवीं पास, पेंटिंग से चलता है खर्च
पांचवीं कक्षा की पढ़ाई निजी स्कूल में की लेकिन आर्थिक स्थिति ठीक ना होने के कारण और स्कूल की फीस ना भरने की वजह से उनको स्कूल से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। उसके बाद जय सिंह ने देवधर के सरकारी स्कूल में दाखिला लिया और दसवीं कक्षा तक पढ़ाई की। दसवीं कक्षा के बाद जय सिंह की हालत दयनीय होने की वजह से घर का खर्चा चलाने के लिए पेंटिंग का काम करने लगा।
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मिल चुके हैं दर्जनों पुरस्कार
जयसिंह को वर्ष 1999 से ही कला क्षेत्र में पुरस्कारों की झंडी लगने लग गई थी। शुरूआती दौर में उसने पंचायत, स्कूल, खंड, जिला स्तरीय और प्रदेश स्तरीय, जिला शिक्षा अधिकारी, बाल भवन, प्राथमिक स्कूल आदि में सम्मानित किया जा चुका है।
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सरकार की बेरुखी से आहत
उनका कहना है कि सरकार की बेरुखी के कारण चित्र कला में प्रदर्शन करने वाले इस क्षेत्र में काम नही करना चाहते और यह कला और कलात्मक कार्य करने वाली हस्तियां क्षेत्र में दम तोड़ती जा रही है। सरकार ऐतिहासिक धरोहरों पर कला का कार्य करवाए इससे कला के चित्रकारों को काम मिलेगा। वह महाभारत काल की प्राचीन धरोहरों पर भी काम कर सकते हैं। जय सिंह का कहना है कि सरकार प्राचीन धरोहरों पर कार्य करने के लिए विदेशों से चित्रकार बुलवाते हैं। लेकिन सरकार चाहे तो अपने ही प्रदेश से युवा चित्रकारों को मौका दे और रोजगार के आयाम प्रदान करे। नए युग में इंटीरियर की डिमांड अधिक बढ़ी है और नए युग में इंटीरियर के क्षेत्र में भी अच्छा काम कर सकते हैं।
फोटो नंबर- 24,25
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