लहराती फसलों के साथ यमुना में समा गई जमीन, एमएलए के घर पहुंचे किसान
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लहराती फसलों के साथ यमुना में समा गई जमीन, एमएलए के घर पहुंचे किसान,
बोले-विधायक जी, अब आपका ही सहारा, बर्बाद होने से बचा लो
-किसानों का आरोप-अधिकारियों को सूचना देते हैं तो वे खनन माफिया व ठेकेदारों तक पहुंचा देते हैं बात। फिर ठेकेदार देते हैं धमकी।
-पांच करोड़ में ठेका लेकर ठेकेदारों ने 114 करोड़ रुपये के तटबंध तोड़ दिए।
-एसडीएम व डीएसपी पर गंभीर आरोप, सीबीआई से जांच करवाने की मांग।
-माइनिंग के खेल की सीबीआई जांच की मांग।
-तीन दिन में न्याय नहीं मिला तो आंदोलन होगा।
अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर
यमुना के खनन ने गुमथला क्षेत्र के सैकड़ों किसानों को भूमिहीन कर दिया है। यमुना के बढ़े हुए पानी ने लहराती फसलों के साथ सैकड़ों एकड़ जमीन को अपने अंदर समा लिया है। चार दिन पहले जहां धान व गन्ने की फसल लहरा रही थी, वहां अब पानी बह रहा है। दस से ज्यादा किसानों की पचास एकड़ जमीन का अस्तित्व पानी में घुल गया है। मंगलवार शाम को पीड़ित किसान रादौर के एमएलए श्याम सिंह राणा के आवास पर पहुंचे और भूमि बचाने की गुहार लगाई। किसानों ने कहा कि ठेकेदारों ने पांच करोड़ में ठेका लेकर 114 करोड़ रुपये के तटबंध तोड़ दिए। जिसकी वजह से पानी खेतों में घुस गया और इस सीजन में ढाई सौ एकड़ जमीन यमुना में शामिल हो गई है। किसानों ने रादौर की एसडीएम व डीएसपी पर भी गंभीर आरोप लगाएं हैं। विधायक ने किसानों के सामने ही अधिकारियों को कॉल करके रिपोर्ट तलब की है। साथ ही आश्वासन दिया कि वे इस मामले में मुख्यमंत्री से बात करेंगे। इस दौरान वरयाम सिंह, शिव कुमार, रामकुमार, अमरजीत, सचिन, राहुल, रामेश्वर, मोलूराम, अनिल कुमार, देशराज, सुरेंद्र, श्योराम, शिशु, महिंद्र, रजनीश, राजकुमार आदि मौजूद रहे।
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जहां खनन, वहीं कटाव
किसान मजदूर संघर्ष समिति अध्यक्ष वरयाम सिंह व शिव कुमार संधाला ने बताया कि जहां खनन किया गया था, वहीं पर 90 फीसदी कटाव हुआ है। जबकि अन्य स्थानों पर यमुना ने कोई नुकसान नहीं किया। कई जगह पर तो यमुना दो किमी चौड़ी हो गई है। यानी ठेकेदारों ने जमकर मुनाफा कमाया और किसान के हाथों से उसकी जमीन भी चली गई।
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-डेरों का नामोनिशान मिटा
गुमथला निवासी रमेश चंद यमुना पार डेरे में रहता था। करीब दस एकड़ भूमि पर खेती करता था। दो दिन पहले इस भूमि पर धान की फसल लहरा रही थी, लेकिन अब यमुना वहां से बह रही है। इसी तरह दो दर्जन से ज्यादा डेरों का नामोनिशान मिट चुका है और चारों तरफ पानी ही पानी नजर आ रहा है। इसके अलावा अमिलाल, सिंघ राम, गुरचरण सिंह, शेर सिंह, रमेश, अमरजीत सिंह, अनिल कुमार, सुभाष, शिव कुमार आदि की जमीन भी यमुना में चली गई।
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किसानों के अधिकारियों पर गंभीर आरोप
-यमुना में जोरशोर से भारी भरकम मशीनें खनन कर रही हैं।
-अधिकारियों को जानकारी दी जाती है तो वे ठेकेदारों तक सूचना भेज देते हैं।
-ठेकेदार किसानों को मारने तक की धमकी देते हैं।
-हथियारबंद बाउंसरों द्वारा दी जाती है किसानों को धमकी।
-अधिकारी झूठी रिपोर्ट तैयार करते हैं।
-रॉयल्टी में भी हेराफेरी कर सरकार को करोड़ों का चूना लगाया जा रहा है।
-रादौर की एसडीएम व डीएसपी को भ्रष्ट बताया।
-माइनिंग के खेल की सीबीआई से जांच करवाई जाएं।
-जो भ्रष्ट अफसर हैं, उन्हें सस्पेंड करें।
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विधायक का पक्ष
-गुमथला क्षेत्र के किसान अपनी शिकायत लेकर मेरे पास आएं थे। मैंने संबंधित विभाग के अधिकारियों से रिपोर्ट तलब की है। अगर खनन की वजह से किसानों को नुकसान हुआ है तो मैं मुख्यमंत्री साहब से बात करूंगा। अगर कोई अधिकारी दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। -श्याम सिंह राणा, विधायक, रादौर
फोटो नंबर 33 से 38