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शहीद रॉकी का स्मारक बनवाने के लिए तीन साल से ठोकरें खा रहा परिवार, अब बैठेगा भूख हड़ताल पर

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डीसी से सीएम तक लगाई गुहार, नहीं बना शहीद का स्मारक, भूख हड़ताल पर बैठेगा परिवार
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-गांव रामगढ़ माजरा निवासी रॉकी 2015 में उधमपुर जम्मू-कश्मीर में हुआ था शहीद, कार्यकारी अभियंता ने 34 लाख 50 हजार रुपये का बनाया था बजट
सुरेश सैनी
यमुनानगर। 5 अगस्त 2015। इस तारीख को शायद प्रशासन व जिले की जनता भूल गई हों, लेकिन बिलासपुर खंड का गांव रामगढ़ माजरा का प्रीतपाल का परिवार इसे कभी नहीं भूल पाएगा। इसी तारीख ने कलेजे के टुकड़े को हमेशा के लिए जुदा कर दिया। परिवार को जहां बेटे से जुदा होने का गम है वहीं देश के लिए कुर्बानी देनी की खुशी भी। तब उस वक्त प्रदेश सरकार ने भी शहीद रॉकी की याद में उनके गांव में स्मारक व प्रवेश गेट बनाने की घोषणा की थी, जो अभी तक नहीं बने। परिवार बेटे का स्मारक बनवाने के लिए तीन साल से हर चौखट पर जा चुका है। सिवाय आश्वासन के कुछ नहीं मिला। लेकिन अब परिवार 11 अक्तूबर को जिला सचिवालय में भूख हड़ताल पर बैठेगा। शायद दोबारा से प्रशासन व सरकारें जाग जाएं।
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सीमएम की घोषणा के बाद बनाया गया था बजट
ज्ञात हो 5 अगस्त 2015 को रॉकी जम्मू के उधमपुर में आतंकवादियों से लोहा लेते हुए शहीद हो गया था। तब मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर परिवार को सांत्वना देने के लिए पहुंचे थे। उस दौरान सरकार सरकार ने रॉकी की याद में उनके गांव में स्मारक और प्रवेश गेट बनाने की घोषणा की थी। इसके बाद पीडब्ल्यूडी ने 34 लाख 50 हजार रुपये का बजट बनाया था। बजट बनने के बाद फाइल को चंडीगढ़ अप्रूवल के लिए भेजा गया था। लेकिन बजट को भेजे तीन साल बीत चुके हैं मगर फाइल थोड़ी सी भी नहीं सरकी, जिससे शहीद परिवार में रोष है।

नहीं बना स्मारक तो करेंगे भूख हड़ताल
शहीद रॉकी के छोटे भाई रोहित का कहना है स्मारक बनवाने की फाइल चंडीगढ़ पीडब्ल्यूडी में पड़ी है, जिसे तीन साल है। इसके बारे में वह डीसी से लेकर मुख्यमंत्री तक मिल चुके हैं यहां तक सरकार को याद करवाने के लिए सीएम विंडो पर भी स्मारक बनवाने की मांग कर चुके हैं। बावजूद इसके कोई एक्शन नहीं हुआ। लेकिन अब उनकी मजबूरी बन चुकी है। वह स्मारक बनवाने के लिए 11 अक्टूबर को जिला सचिवालय में परिवार भूख हड़ताल पर बैठेगा, जो उनकी मजबूरी बन चुकी है।

जान देकर बचाई 44 साथियों की जान
ज्ञात हो कि उधमपुर में आतंकवादियों से मुठभेड़ में शहीद हुए बीएसएफ के जवान रॉकी ने अपने प्राणों के बलि देकर अपने साथियों की जान बचाई। बीएसएफ के 44 जवान बस में सवार होकर जम्मू से कश्मीर जा रहे थे। जम्मू से करीब 50 किलोमीटर दूर पहुंचने पर अचानक एक आतंकवादी बस के सामने आ गया और उसने बस पर ताबड़तोड़ गोलियां चलानी शुरू कर दी थीं। रॉकी चालक के बगल की सीट पर बैठा हुआ था। आतंकवादी द्वारा चलाई गई गोली चालक के साथ-साथ रॉकी को भी लगी। बुरी तरह घायल होने के बावजूद रॉकी ने बस में चढ़ने का प्रयास कर रहे आतंकवादी को गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया। मारे गए आतंकवादी के पास हैंड ग्रेनेड भी था। यदि आतंकवादी बस में चढ़ने में सफल हो जाता तो कई जवानों की जान जा सकती थी।
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मुझे इसके बारे में जानकारी नहीं थी। मामला अब मेरे संज्ञान में आ चुका है। शहीद रॉकी का गांव में स्मारक बनवाया जाएगा। मैं इस बारे में विभागीय अधिकारियों से बात करूंगा।
-नरबीर सिंह, पीडब्ल्यूडी विभागीय मंत्री, हरियाणा सरकार।

फोटो-5 व 6
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