फर्म से लेकर लाइसेंस तक फर्जी, दो साल से चल रहा था फर्जीवाड़ा, दो और गिरफ्तारी
-सरकार को प्रति महीने पांच से दस करोड़ रुपये तक के राजस्व का नुकसान, फर्जी फर्म संचालक आइडेंटीफाई
रामकिशन कश्यप
खिजराबाद। माइनिंग माफिया की ओर से फर्जी बिल बनाकर रेत-बजरी को दूसरे राज्यों में सप्लाई करने वाले रैकेट की परतें खुलनी शुरू हो गई हैं। इनके तार हरियाणा ही नहीं बल्कि यूपी, उत्तराखंड, हिमाचल और पंजाब के सप्लायरों से जुड़े हुए हैं। शुक्रवार को पुलिस ने एक मुंशी और उसके सहयोगी को भी गिरफ्तार किया है। अभी तक की पूछताछ में खुलासा हुआ है कि यह गोरखधंधा दो साल से चल रहा था। इस खेल में केवल एक फर्म नहीं बल्कि अन्य कई फर्जी और लाइसेंस प्राप्त फर्म भी शामिल बताई जा रही है। खनन एक्सपर्ट का कहना है कि गहनता से जांच की जाए तो यह यमुनानगर का अब तक सबसे बड़ा घोटाला है। प्रति महीने पांच से दस करोड़ रुपये का तक चूना सरकार को लगाया गया। पुलिस जांच में जगाधरी निवासी अरुण राणा और ध्रुव राणा का नाम भी सामने आया है। इन्होंने ही मैसर्ज डीआर माइनिंग एंड क्रशिंग कंपनी के नाम से फर्जी फर्म बनाई थी।
फर्जी कंपनी के नाम पर जीएसटी और सेल टैक्स नंबर
जिस कंपनी के पास माइनिंग विभाग का एमडीएल लाइसेंस ही नहीं है। उस फर्म को बिना किसी जांच के जीएसटी और सेल टैक्स नंबर तक जारी कर दिए गए। इस घोटाले में खनन विभाग और कराधान विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत भी सामने आ सकती है। वहीं फर्जी बिल बुक, फर्जी मुहर के साथ-साथ अन्य बिल्टियां भी छपवाई गईं। पूछताछ में पता चला है कि दो साल से यह फर्जीवाड़ा चल रहा था। ऐसा नहीं है कि स्थानीय पुलिस और खनन विभाग को इसके बारे में जानकारी न हो। लेकिन, किसी भी अधिकारी ने अभी खनन की पर्चियां चेक नहीं की।
फटकार पड़ी तो की जांच
दरअसल अमर उजाला ने रॉयल्टी व गलत बिल के बारे में अधिकारियों को चेताया था, लेकिन खनन अधिकारी की ओर से पांच बजे के बाद कॉल नहीं करने की बात कही गई। इसे प्रमुखता से प्रकाशित किया गया। यह बात चंडीगढ़ तक पहुंच गई और आला अधिकारियों ने जिले में तैनात अधिकारियों को फटकार लगाई। सख्ती का असर ये हुआ कि अधिकारी फील्ड में उतरे और ओवरलोड ट्रकों में भरे खनन के बिल जांचने शुरू किए तो ये घोटाला सामने आया।
बॉर्डर पर भी सेटिंग
अन्य राज्यों के नाकों पर भी इनकी सेटिंग होती थी। वहां से बिलों को चेक करके गाड़ी को आगे जाने दिया जाता था, इसकी भी जांच की जाएगी। फैजपुर से पकड़े गए मुंशी और उसका सहयोगी तो इस गोरखधंधे की छोटी सी कड़ी मात्र थे। वे तो कमीशन पर फर्जी बिल काटते थे और गाड़ियों वालों को कम से कम एक हजार का बिल थमा देते थे। इस गोरखधंधे की असली मलाई तो कोई और ही खा रहा था।
------
फर्जी बिल मामले में कुल चार लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और दो लोगों के नाम सामने आए हैं। इनमें जगाधरी के अरुण राणा व ध्रुव राणा के नाम शामिल हैं। इस मामले में और भी लोगों के नाम सामने आ सकते हैं।
-शमशेर सिंह राणा, खिजराबाद थाने के जांच अधिकारी
फोटो