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भूख, लाचारी व बीमारी का जीवन जी रही चार मासूम बच्चियों को चाइल्ड लाइन ने बचाया

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भूख, लाचारी व बीमारी का जीवन जी रही चार मासूम बच्चियां
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भूख, लाचारी व बीमारी का जीवन जी रही चार मासूम बच्चियां
चाइल्ड लाइन की टीम ने पुलिस की मदद से रेस्क्यू कर अस्पताल पहुंचाया।
-एक की हालत गंभीर, तीन को चेकअप के बाद बालकुंज भेजा
-पिता की मौत, मां भी कई-कई दिन तक रहती है घर से बाहर
-खानी नहीं मिलने पर पानी पीकर सो जाती थी चारों बहनें
अमर उजाला ब्यूूूरो
यमुनानगर।
भूख, लाचारी व बीमारी का जीवन जी रही थी चार मासूम बच्चियां। सिर से पिता का साया उठ गया तो मां ने भी केयर करनी बंद कर दी। बच्चियों को अकेला छोड़कर वह कई-कई दिन तक घर से बाहर रहती थी। चारों बहनें घर पर ही कैद होकर रह गई। उम्र कम होने की वजह से वे खाना भी नहीं बना पाती और पानी पीकर सो जाती। हालात इतने बदतर कि बच्चियों का शरीर तक गलने लग गया। मंगलवार को चाइल्ड हेल्प लाइन की टीम ने पुलिस की मदद से चारों बच्चियों को रेस्क्यू किया। यमुनानगर जिले के आदि बद्री इलाके में ये चौकाने वाली घटना सामने आई हैं।
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मासूम बच्चियों को खाना बनाना नहीं आता। बड़ी बच्ची की उम्र 12 साल की है। गंदगी के माहौल में दयनीय हालात में रहने की वजह से ये बीमार हो गई। उनका शरीर जगह-जगह से गलने लग गया। एक बच्ची की हालत तो बहुत ही खराब है। चाइल्ड लाइन की निदेशिका डॉ. अंजू बाजपई व कॉर्डिनेटर भानू प्रताप पुलिस टीम के साथ वहां पहुंचे, तो बच्चियों की दुर्दशा देख कर सन्न रह गए।
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जख्मों से निकल रहा था मवाद
-कोऑर्डिनेटर भानू प्रताप ने बताया कि एक बच्ची बहुत बीमार है। उसके शरीर पर जगह जगह जख्म हैं जो कि बहुत बुरी तरह सड़ चुके हैं। उसके जख्मों से बदबूदार मवाद बह रही थी। सभी बच्चियां भूख व असुरक्षा के माहौल में पल रही थी। ये सात बहनें हैं एक नानी के पास रहती है, दो ताऊ व ताई के पास रहती हैं और ये चार मां के साथ रहती है। परंतु मां इनका बिल्कुल भी ध्यान नहीं रखती।
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ट्रामा में भर्ती करवाया
एक लड़की जिसकी हालात बहुत नाजुक थी, उसको ट्रामा सेंटर में भर्ती करवाया गया है। जहां पर उसका इलाज चल रहा है। अन्य तीन को प्राथमि उपचार के बाद छछरौली स्थित बालकुंज में भेज दिया है। ना तो बच्चियां स्कूल जाती हैं, ना आंगनबाड़ी सेंटर पर जाती है। ये दिन भर ऐसे ही बुरे हालातों में असुरक्षित घूमती रहती हैं।
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बाल कल्याण समिति करेगी देखरेख
उन्होंने बताया कि बच्चियों ने काउंसलिंग के दौरान बताया कि मां तो कभी खाना देती ही नहीं व ना हीं हमारा ध्यान रखती है। जब चाइल्ड लाइन की टीम वहां पंहुची तब भी मां वहां नहीं थी और बच्चियां कूड़े के ढेर पर खेल रही थी। टीम करीब दो घंटे वहां रही मां का तब भी कोई अता पता नही चला। इसलिए इनको चाइल्ड लाइन व पुलिस के द्वारा रेस्क्यू करवाया गया है। आगे की कार्यवाही बाल कल्याण समिति के दिशा निर्देश के अनुसार होगी।
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वर्जन
चाइल्ड लाइन की निदेशिका डॉ. अंजू बाजपई ने बताया कि जांच के दौरान आस पास के लोगों ने बताया कि बच्चियों के पिता अब इस दुनिया में नही हैं। हालात इतने खराब हैं कि बच्चों ने कई दिनों से भर पेट खाना भी नहीं खाया। लोगों ने बताया कि मां बच्चियों को छोड़ कर कई कई दिन घर से गायब रहती है। घर में गंदगी व सड़न का माहौल है।
फोटो नंबर 1
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