पहाड़ों पर हुई भारी बारिश से नदियां उफान पर, किनारे दरकने से ग्रामीणों के उड़े होश
-सीजन की पहली बारिश से यमुना पहुंची 1.87 लाख क्यूसिक पार
-यमुना किनारे बसे गांववासियों की धड़कने हुई तेज, लेवल बढ़ा तो मचेगी तबाही
-छोटी नदियों में पानी आने से शहजादवाला में बहा निर्माणाधीन पुल
- खिजराबाद व बिलासपुर क्षेत्र की चिक्कन नदी, बरसाती नदी, खिल्लावाला नदी में आया पानी
अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर/खिजराबाद। पहाड़ी इलाके में हुई भारी बारिश से जिला की सीमा से गुजर रही यमुना नहर में 1.87 लाख क्यूसिक पानी आने से उफान पर आ गई। जोकि 70 हजार क्यूसिक के खतरे से निशान से ऊपर बह रही है। जबकि बीती रात यमुना में 40 हजार क्यूसिक पानी था। लेकिन एकाएक आई भारी बारिश के चलते इसका स्तर सुबह नौ बजे 136785 लाख क्यूसिक पर पहुंच गया। हालांकि शाम चार बजे तक 92329 रह गया था। मगर शाम सात बजे इसका लेवल फिर से बढ़ गया। जोकि 1.87 लाख क्यूसिक पर पहुंच गया। उधर यमुना के उफान पर आने से आसपास बसे ग्रामीणों की धड़कने बढ़ गई हैं। जिसके चलते उनकी रातों की नींद उड़ गई। क्योंकि अगर यमुना को जल स्तर ओर बढ़ा तो पानी सीधा नजदीकी गांवों में घुस जाएगा, जिसके चलते तबाही मच सकती है।
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शहजादवाला-मेघूवाला के बीच बन रहा पुल बहा
जिससे स्थानीय नदियां भी उफान पर हो गए, ऐसे में शहजादवाला और मेघूवाला के बीच बन रहे पुल की निर्माण सामग्री पानी में बह गई। उधर बनियांवाला में सिंचाई विभाग द्वारा बनाए गए स्टड किसानों के किसी काम के नहीं रहे। जिसके चलते फसलों में पानी घुस गया। शहजादवाला के सरपंच प्रतिनिधि विजयपाल ने बताया कि चिक्कन नदी और खिल्लांवाला नदी में आए पानी से गांव का जिला मुख्यालय से संपर्क पूरी तरह टूट चुका है। गांव में जाने के लिए तीन रास्ते हैं और तीनों ही रास्ते पानी ने समाप्त कर दिए। ग्रामीणों का कहना है कि मार्केट बोर्ड द्वारा शहजादवाला और मेघूवाला को जोड़ने के लिए पुल का निर्माण करवाया जा रहा है लेकिन पानी के तेज बहाव की वजह से निर्माण सामग्री पानी में बह गई जिससे ठेकेदार को नुकसान हो गया है।
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नदी किनारे पत्थर के लगाए स्टड भी नाकाफी
बनियांवाला के सरपंच अंकित गुप्ता व नंबरदार सुलेख चंद के अनुसार सिंचाई विभाग द्वारा गांव में नदी के किनारे पत्थर के स्टड लगाए जोकि नाकाफी हैं। बल्कि विभाग द्वारा सरकार के पैसे का दुरुपयोग किया गया है। विभाग द्वारा जहां पर पत्थर आदि का काम करना चाहिए था, वहां पर किया नहीं केवल काम के नाम पर पैसा व्यर्थ किया गया है। उधर, यमुना में आए उफान से लाक्कड़ और कन्यावाला गांव के लोगों की नींद उड़ गई। ग्रामीण पहल सिंह, बिरम, संजीव व राहुल आदि का कहना है कि सरकार द्वारा दो साल से बेलगढ़ पटड़ी के पास बसे लगभग एक दर्जन गांवों के लिए किसी भी तरह का बाढ़ राहत कार्य नहीं करवाया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार को चाहिए कि वह बेलगढ़ और यमुना किनारे बसे गांवों के लोगों को भी सुध लें। ग्रामिणों का कहना है कि हथनीकुंड बैराज पर यमुना का जलस्तर 1.87 हजार क्यूसिक से ऊपर है और बेलगढ़ में वही यमुना पानी किनारों को छूकर निकल रहा है। ऐसे में यदि यमुना का जलस्तर ओर भी मुश्किल खड़ी हो जाएगी। ग्रामीणों का कहना है कि पहले यमुना में पानी का बहाव यूपी की ओर से था, लेकिन हरियाणा में दिन रात हो रहे अवैध खनन की वजह से यमुना में हरियाणा की ओर गहरे गड्ढे होने से पानी का बहाव भी बेलगढ़ क्षेत्र में हरियाणा की ओर हो गया है। जिससे बाढ़ आ सकती है। उधर मार्केट बोर्ड के एक्सईएन अतुल गर्ग का कहना है कि शहजादवाला में बन रहे पुल की सामग्री बह जाने की जानकारी है। जायजा लेने के लिए मौका भी देखा गया था। जिसको देखते हुए जल्द ही नया रास्ता बना दिया जाएगा और पुल निर्माण का कार्य भी जारी रहेगा।
नोट: कृप्या से रादौर से आई यमुना संबंधी खबर को इसमें जोड़ लें।
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