सवारियां ढोने में प्रदेश में सबसे आगे यमुनानगर डिपो, लगातार तीन साल से नंबर वन
-पिछले साल से 8 प्रतिशत ज्यादा सवारियां ढोई
-8 करोड़ 78 लाख के रेवेन्यू का आंकड़ा पार किया
-पहली बार किसी डिपो ने इतनी कमाई की
-166 बसों के साथ है सातवें नंबर पर
-15 अगस्त पर जिला या राज्य स्तर पर डिपो को किया जा सकता है सम्मानित
अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। लगातार तीसरे साल भी यमुनानगर रोडवेज डिपो प्रदेश में नंबर वन पर कायम है। डिपो ने पिछले साल की अपेक्षा इस साल 8 प्रतिशत ज्यादा सवारियां ढोई हैं। जिसके चलते डिपो का रेवन्यू 8 करोड़ 78 लाख का आंकड़ा पार कर गया। जबकि इससे पहले डिपो में इतनी कमाई नहीं हुई है। इसके अलावा व्हीकल यूटिलाइजेशन मई माह में 334 किलोमीटर प्रति वाहन व प्रतिदिन चली, यानी डिपो की बसें आम दिनों की अपेक्षा 5 किलोमीटर अधिक चली हैं। हालांकि डिपो में काफी समय से बसों का भारी टोटा है। बावजूद इसके डिपो यात्रियों को ज्यादा सुविधा देने में सबसे आगे है।
इस तरह टूटा डिपो का रिकॉर्ड : साल 2017 में डिपो की बसें 329 किलोमीटर प्रति वाहन प्रति दिन चली थी। जबकि इस साल मई माह तक 334 किलोमीटर चली हैं। 5 किलोमीटर ज्यादा चलने से डिपो को इस साल 8 करोड़ 78 लाख रुपये का रेवन्यू हुआ है, जबकि 2017 में 8 करोड़ 38 लाख था यानी पिछले साल की तुलना में इस बार डिपो को 40 लाख ज्यादा रेवन्यू हुआ है जोकि सीधा सरकार के खजाने में गया है।
78 प्रतिशत सवारियां ढोई : इतना ही नहीं यमुनानगर डिपो ने 2017 की अपेक्षा इस साल 78 प्रतिशत सवारियां ढोई हैं। जबकि पिछले साल 70 प्रतिशत ही थी। बता दें कि डिपो में 166 बसें हैं जिनमें ऑनरूट 153 है इनमें रोजाना 20 हजार यात्री सफर कर रहे हैं, जिनसे विभाग को रोजाना 14 लाख रुपये का राजस्व हो रहा है। बावजूद इसके डिपो में बसों का भारी टोटा है।
166 बसों के साथ है सातवें नंबर पर : आंकड़ों के मुुताबिक राज्य में कुल 24 डिपो और 13 सब डिपो हैं। इनमें कुल 3938 बसें हैं जिनमें 3200 बसें ऑन रूट हैं। इन्हीं बसों में राज्य का 13 लाख यात्री सफर कर रहा है। इससे सरकार को 3.50 करोड़ का राजस्व हो रहा है। लेकिन यमुनानगर डिपो बसों की संख्या मेें सातवें नंबर पर है। बावजूद इसके यमुनानगर डिपो यात्रियों को सुविधाएं देने के मामले में प्रदेश में पहले नंबर पर कायम है। विभाग के अनुसार लगातार नंवर वन आने पर यमुनानगर डिपो को इस बार 15 अगस्त पर सम्मानित किया जा सकता है।
यमुनानगर डिपो शुरू से ही सुविधाएं देने में नंबर वन रहा है। लेकिन सरकार को डिपो में बसों की संख्या बढ़ाने पर भी ध्यान देना चाहिए। आज प्रदेश में रोडवेज बसों की संख्या बढ़ने की बजाय कम हो चुकी है जिसका खामियाजा राज्य के 13 लाख यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है। मगर सरकार तो विभाग को निजीकरण करने पर तुली हुई है।
- हरिनारायण शर्मा, राज्य प्रधान, ऑल हरियाणा रोडवेज वर्कर्स यूनियन।
यमुनानगर डिपो इस बार भी नंबर पर आया है। जोकि डिपो के लिए बहुत बड़ी बात है। पिछले साल से 8 प्रतिशत ज्यादा सवारियां ढोई हैं जिनसे 8 करोड़ 78 लाख का रेवन्यू हुआ है। इसके अलावा व्हीकल यूटिलाइजेशन मई माह में 334 किलोमीटर प्रति वाहन प्रतिदिन चली, यानी डिपो की बसें आम दिनों की अपेक्षा 5 किलोमीटर अधिक चली हैं।
- रविंद्र प्रसाद पाठक, महाप्रबंधक, रोडवेज विभाग, यमुनानगर।
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