हाईटेंशन से टेंशन, 50 हजार लोगों की जान को खतरा
लोग बोले, सरकार रैलियों पर खर्च कर रही करोड़ों, तार हटवाने पर कोई खर्च नहीं
पीएम, सीएम व एचवीपीएनएल को दर्जनों शिकायत दे चुके है लोग, नहीं हुआ समाधान
लोगों ने अब विधानसभा में डाली याचिका, दस विधायकों की कमेटी कर रही जांच
अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। शहर की चोपड़ा गार्डन, बैंक कॉलोनी, सरोजनी कॉलोनी समेत दर्जनभर कॉलोनियों के 50 हजार लोग हाई टेंशन तार से परेशान है। ये हाई टेंशन घर से सटकर निकल रही है। लोग न तो छत पर जा पा रहे है, न कपड़े सुखा पा रहे है। इतना ही नहीं लोग सर्दी के मौसम में धूप सेंकने भी छत पर नहीं जा सकते। बरसाती सीजन शुरू हो गया है। यदि कोई छत पर गया तो यह कहना मुश्किल है कि उसकी जान को खतरा नहीं होगा। कॉलोनियों के लोगों का कहना है कि सरकार रैली और अन्य आयोजनों पर तो करोड़ों खर्च कर रही है, लेकिन इन हाई टेंशन लाइनों के हटाने पर कोई खर्च नहीं कर रही। हाईटेंशन की चपेट में आने से दर्जनों जान जा चुकी है, लेकिन एचवीपीएनएल कोई सबक नहीं ले रही है। कॉलोनी के लोगों ने दर्जनों शिकायत पीएम ऑफिस, सीएम व एचवीपीएनएल उच्च अधिकारियों को भेजकर हाईटेंशन हटवाने की मांग की। लेकिन अभी तक इस संबंध में कोई कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई।
विधानसभा में डाली याचिका, दस विधायकों की कमेटी कर रही जांच : कॉलोनी के लोगों ने बताया कि जब कहीं से बात न बनी तो उन्होंने शहर विधायक घनश्याम दास अरोड़ा को मामले से अवगत करवाया। यहां से कार्रवाई का आश्वासन जरूर मिला लेकिन हुआ कुछ नहीं। इसके बाद उन्होंने विधानसभा में याचिका लगाई। अब यह मामला यहां से 10 विधायकों की कमेटी से होते हुए सीएम तक जाएगा। लोगों की मांग है कि इस मामले को सुरक्षा के मद्दे नजर ध्यान देते हुए तुरंत कार्रवाई की जाए।
दर्जनों लोगों की जा चुकी है जान : रिटायर्ड ईटीओई टीडी सोनी का कहना है कि वे वर्ष-2015 से हाई टेंशन को हटवाने के लिए प्रयासरत है। इस अवधि में हाई टेंशन की चपेट में आने से दर्जनों लोगों की मौत हो चुकी है फिर भी एचवीपीएनएल (हरियाणा विद्युत प्रसारण निगम लिमिटेड) सबक नहीं ले रहा। उनका कहना है कि उन्होंने प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री कार्यालय में पत्र लिखे। प्रधानमंत्री कार्यालय से उन्हें जवाब आया कि इस बारे में चीफ सेक्रेटरी हरियाणा को लिख दिया है, लेकिन अब तक उनकी तरफ से कोई न तो कार्रवाई हुई ना ही कोई जवाब आया।
पीएम को चार, सीएम को छह लिखे पत्र, नहीं आया जवाब : रिटायर्ड ईटीओई सोनी ने बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय में 8 जुलाई 2015, 28 अगस्त 2015, 19 सितंबर 2015 व 8 मई 2018 को पत्र लिखे। वहीं, मुख्यमंत्री हरियाणा को 15 मई 2014, 15 जुलाई 2016, 22 अक्तूबर 2016, 17 जनवरी 2017, 15 अक्तूबर 2017 व 8 मार्च 2018 को पत्र लिखे। इन पत्रों में से किसी का भी जवाब नहीं आया। इनके अलावा उन्होंने 15 चिट्ठी एचवीपीएनएल को लिखी। 17 जनवरी 2017 को, 15 जुलाई 2016 को, 25 अक्तूबर 2017 को व 3 अप्रैल 2018 को सीएम विंडो पर भी शिकायत दी।
अंडर ग्राउंड केबल बिछाने का आश्वासन दिया तो विड्राल कर दी थी शिकायत : कॉलोनीवासियों का कहना है कि उन्होंने जब सीएम विंडो पर पत्र लिखे तो अधिकारियों ने उन्हें बताया कि वे अंडर ग्राउंड केबल बिछाने लग रहे है। इसी को लेकर उन्होंने अपनी शिकायत विड्राल कर ली। विभाग के पत्र नंबर सीएच 22 दिनांक 27 सितंबर 2016 में अंडर ग्राउंड केबल का हवाला दिया गया था। इस बात को भी दो साल होने जा रहे है, लेकिन हाई टेंशन जस की तस है। उनका कहना है कि एक्सईएन ने एससी को चार पत्र व एसई ने चीफ इंजीनियर को सात पत्र लिखे। यह कार्रवाई सिर्फ कागजों में चल रही है। हकीकत के धरातल पर कुछ नहीं हुआ।
हाईटेंशन तार हटाए जाने तक लड़ेंगे लड़ाई : हाईटेंशन तार हटवाने केे लिए लड़ाई लड़ रहे रिटायर्ड ईटीओ टीडी सोनी का कहना है कि यह 50 हजार लोगों की सुरक्षा से जुड़ा मामला है। जब तक रिहायशी क्षेत्र से निकल रहे हाईटेंशन तार हटाए नहीं जाते तब तक वे लड़ाई लड़ते रहेंगे। उम्मीद है कि विधानसभा में लगाई गई याचिका पर कार्रवाई होगी। यदि यहां से बात न बनी तो हाई कोर्ट व सुप्रीम कोर्ट में याचिका डालेंगे।
45 साल से बसे है, सभी टेक्स देकर भी नहीं मिल रही सुरक्षा : कॉलोनी वासियों का कहना है कि कॉलोनियों को आबाद हुए 45 साल हो गए। सभी ने नक्शा पास करवाकर मकान बनवाए। यदि यहां निर्माण अवैध तो नक्शा क्यों पास किया गया। बिजली के दरों में बढ़ोतरी की गई। यहां पर घनी आबादी है। क्षेत्र में रहने वाले लोग प्रॉपर्टी टैक्स, हाउस टैक्स, सुविधा शुल्क, सीवरेज चार्जेज सहित अन्य सभी चार्ज नियमित दे रहे है। उनका यह भी कहना है कि वे सरकार को सभी टैक्स दे रहे है, लेकिन उसके बाद लोगों को सुरक्षा नहीं मिल रही है।
एचवीपीएनएल के एक्सईएन जीएस सरवारा का कहना है विभाग का कहना है कि यह एरिया 1973 में आबाद हुआ था। जबकि हाईटेंशन तार यहां पहले से था। लोगों को यहां पर मकान न बनाने की चेतावनी दी गई थी। अंडर ग्राउंड केबल बिछाने के लिए पांच करोड़ रुपये खर्च आने की संभावना है। उनके पास फंड की कमी है। अभी यह मामला विधानसभा कमेटी में विचाराधीन है। आदेश मिलते ही अंडर ग्राउंड केबल बिछाने का काम शुरू कर दिया जाएगा।
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