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पूरा वेतन मांगने पर स्वीपर ने प्रिंसिपल पर लगाया थप्पड़ मारने व धक्का देने का आरोप

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पूरा वेतन मांगने पर स्वीपर ने प्रिंसिपल पर लगाया थप्पड़ मारने व धक्का देने का आरोप
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सिविल अस्पताल में चल रहा स्वीपर का उपचार, सीएम विंडो व एसपी को दी शिकायत

अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। स्वीपर ने पूरा वेतन मांगने पर आईटीआई साढौरा के ठेकेदार व प्रिंसिपल पर थप्पड़ मारने व धक्का देकर गिराने का आरोप लगाया है। स्वीपर का सिविल अस्पताल में उपचार चल रहा है। पीड़ित स्वीपर का आरोप है कि चार माह पहले ही उसका वेतन बढ़ाकर 12620 रुपये किया गया था, लेकिन प्रिंसिपल की ओर से उसे केवल 6900 रुपये दिया जाता है। पूरे पैसे मांगने पर उसे प्रताड़ित किया गया। पीड़ित ने इसकी शिकायत सीएम विंडो, एसपी व डीसी को भी दी है।
साढौरा की वाल्मीकि बस्ती निवासी अशोक कुमार ने एसपी व डीसी को दी शिकायत में बताया कि वह और उसकी पत्नी सुदेश करीब आठ साल से राजकीय आईटीआई साढौरा में स्वीपर के पद पर कार्यरत है। पहले उसका वेतन 5240 रुपये था। उन्होंने अपने वेतन को लेकर आवाज उठानी शुरू कर दी। उन दोनों व चार अन्य स्वीपर ने इसकी शिकायत सीएम विंडो, डीसी व एसपी को दी। इसका पता जब ठेकेदार व प्रिंसिपल को पता चला तो उन्होंने सभी को काम से निकाल दिया। परंतु चार अन्य स्वीपर ने नौकरी जाने के डर से माफी मांग ली जो दोबारा काम पर लग गए। उन दोनों ने बात नहीं मानी तो 12 जनवरी 2017 को उन्हें आईटीआई से निकाल दिया गया। कुछ माह पहले प्रिंसिपल ने उसे दोबारा ड्यूटी पर आने की बात कहीं। तब प्रिंसिपल ने उसे 12620 रुपये वेतन देने का वादा किया। लेकिन चार माह से उसे केवल 6900 रुपये ही वेतन दिया जा रहा है। अशोक का आरोप है कि बुधवार को वह प्रिंसिपल से मिलने गया और बढ़ा हुआ वेतन मांगा तो उसके साथ वहां हाथापाई की। आरोप है कि उसे थप्पड़ मारा गया और धक्का देकर गिरा दिया। धक्का देकर गिरने से उसका सिर दीवार में लगा। उसकी पत्नी ने उसे सिविल अस्पताल में भर्ती कराया। जहां उसका उपचार चल रहा है।
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आरोप झूठे हैं, किसी से कोई हाथापाई नहीं : प्रिंसिपल
आईटीआई साढौरा के प्रिंसिपल अश्वनी कुमार का कहना है कि उन्होंने स्पीवर से कोई हाथापाई नहीं की है और न ही उसे नौकरी से निकाला। पहले स्वीपर अशोक, सुदेश व अन्य कर्मचारियों को वन टाइम ग्रांट के तहत पार्ट टाइम स्वीपर लगाया गया था। हमारा बजट खत्म होने के बाद सभी को काम पर आने से मना कर दिया। क्योंकि आईटीआई की सफाई कार्य प्रभावित हो रहा था इसलिए सरकार ने ठेकेदार के माध्यम से डीसी रेट पर सफाई कार्य कराने को कहा। 21 जून से ठेकेदार का ठेका शुरू हुआ। पांच स्वीपर शनिवार को काम पर नहीं आए इसलिए ठेकेदार पर हमने पांच हजार रुपये जुर्माना लगा दिया। ठेकेदार ने जुर्माना लगने पर दोनों को काम से निकाल दिया। --
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एसएमओ बोले, संस्थान हमारा है, हमसे पूछकर करें कवरेज
उधर, जब सिविल अस्पताल में मीडिया कर्मी उपचाराधीन अशोक से बातचीत करने पहुंचे तो कुछ नर्सों ने उनकी कवरेज करने के लिए एसएमओ की अनुमति दिखाने को कहा। जब एसएमओ डॉ. सुनील से बातचीत की गई तो उनका कहना था कि सिविल अस्पताल हमारा संस्थान है। उनके परमिशन के बिना यहां कोई कवरेज नहीं कर सकता।

फोटो : 20
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