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रिटायर होने के बाद बच्चों को मुफ्त पढ़ा रहे हैं नेशनल अवार्डी अध्यापक जय कुमार

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सेवानिवृत्ति के बाद भी बच्चों को मुफ्त पढ़ा रहे अध्यापक जय
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-स्कूलों में जाकर शिक्षा एवं समाज सेवा के प्रति बच्चों व अध्यापकों को कर रहे हैं जागरूक
अमर उजाला ब्यूरो
खिजराबाद। जो व्यक्ति किसी भी काम को करने से न तो थकता और न ही कभी हारता है। केवल अपने कार्य के प्रति समर्पण भावना व सत्य निष्ठा तथा जुनून और जज्बा रखता है, वही इंसान समाज में अपने कार्य के प्रति समर्पित होता है और जीवन में सफलता भी प्राप्त करता है। ऐसे ही हमारे समाज में एक व्यक्ति है जिन पर यह बात खरी उतरती है। वह राष्ट्रपति अवार्ड से सम्मानित देवधर गांववासी जय कुमार सिंह रोहिला।
रोहिला शिक्षा का दीप जलाने में अब भी जी जान से जुटे हुए हैं। 38 वर्ष सेवा के बाद शिक्षा विभाग से रिटायर हो गए हैं। फिर भी 69 साल की उम्र में सभी स्कूलों में जाकर बच्चों को पढ़ाना तथा निस्वार्थ सामाजिक कार्यकर्ता के तौर पर लोक हित व देश हित में समाज सेवा कार्य करने का मिशन जारी रखा है। बेगमपुर स्कूल के बच्चों व अध्यापकों को शिक्षा, समाज सेवा तथा शिक्षा से वंचित बच्चों को अधिक से अधिक स्कूल में दाखिला दिलाने के लिए प्रेरित किया। रोहिला ने बताया कि उनके पढ़ाए विद्यार्थी आज उच्च पदों पर आसीन हैं। इनमें एडवोकेट अनिल कुमार गढ़वा हरियाणा विधानसभा के लॉ ऑफिसर हैं। राजपाल दड़वा सरपंच, बनारसी दास हिंदी प्रवक्ता, नरेश कुमार जेई, सुरेंद्र कुमार अध्यापक आदि उच्च पदों पर काम कर रहे हैं। राष्ट्रपति अवार्ड के साथ साथ दर्जनों अवार्ड से सम्मानित जयकुमार रोहिला आज भी बच्चों में शिक्षा की अलख जगाने और उन्हें नैतिक शिक्षा देने निकल पड़ते हैं। उनका कहना है कि वह सप्ताह में तीन से चार दिन छछरौली व खिजराबाद के सरकारी स्कूलों में जाकर बच्चों की क्लास लेते हैं और बच्चों को समझाते हैं कि आज के वक्त में पढ़ाई एक ऐसा हुनर है, जिसे कोई छीन नहीं सकता। इसलिए ज्यादा से ज्यादा उच्च शिक्षा ग्रहण करें और अपने परिवार व समाज के लिए मिसाल कायम करें।
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मरणोपरांत देहदान का ले चुके हैं संकल्प
नेशनल अवार्डी जय कुमार रोहिला ने जिला रेडक्रॉस समिति यमुनानगर व समाजसेवी कमल धमीजा की प्रेरणा से प्रेरित होकर 5 सितंबर को शिक्षक दिवस पर अपनी दोनों आंखें व 2012 को अपने शरीर के सभी अंग मरणोपरांत दान करने का दृढ़ संकल्प लिया। उनका कहना है कि मरकर जलने के बाद इस मानव शरीर का कुछ नहीं बनता। न हीं वह किसी के काम आता है। उन्होंने आह्वान किया कि आप सभी को चाहिए कि देहदान करने का संकल्प लें। हमारे शरीर के अंग किसी इंसान को जिंदगी दे सकते हैं।

फोटो नंबर 20
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