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डेयरी शिफ्टिंग के नाम पर बेजुबानों से क्रूरता, लहूलुहान कर पशुओं को ले गए निगम अधिकारी

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डेयरी शिफ्टिंग के नाम पर बेजुबानों से क्रूरता, लहूलुहान कर पशुओं को ले गए निगम अधिकारी
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अमर उजाला ब्यूरो
यमुुनानगर। पशु क्रूरता को लेकर सुप्रीम कोर्ट और सरकार भले ही गंभीर हो, लेकिन नगर निगम अधिकारी खुद पशुओं पर क्रूरता बरत रहे हैं। बुधवार को नगर निगम अधिकारियों द्वारा डेयरियों को शहर से बाहर शिफ्ट करने को लेकर चलाए गए अभियान के दौरान पशुओं को जबरदस्ती खोल दिया गया। डेयरी संचालकों का आरोप है कि उनके पशुओं की इतनी बेरहमी से पिटाई की गई कि कई पशु लहू लुहान हो गए। पुलिस फोर्स को लेकर पहुंचे नगर निगम के दस्ते का जिसने भी विरोध किया, उनके साथ हाथापाई करने लगे। अधिकारियों की इस गैर जिम्मेदाराना हरकत पर लोगों ने कड़ा रोष जताया। आजाद नगर में डेयरी संचालकों ने नारेबाजी कर प्रदर्शन भी किया।
शाम तक चारा भी नहीं डाला : नगर निगम की टीम ने इस दौरान 26 पशुओं को पकड़ा। इन्हें एक कैटल कैचिंग वाहन में भरकर नगर निगम के गोडाउन में लाया गया। कुछ पशुओं को पेड़ के नीचे बांध दिया गया और कुछ को कड़ी धूप में तपते रहे। शाम तक उनके चारे की कोई व्यवस्था नहीं की गई।
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संचालकों ने किया विरोध : निगम प्रशासन व पुलिस बल ने प्रोफेसर कॉलोनी, आजाद नगर व आसपास की अन्य कालोनियों में बनी डेयरियों को बाहर निकालने के लिये अभियान चलाया, लेकिन संचालक विरोध पर उतर आए। लोगों ने अंदर से ताले लगा लिये, लेकिन ड्यूटी मजिस्ट्रेट दर्शन लाल की अगुवाई में डेयरियों से पशुओं को निकाला गया। निगम प्रशासन की पूरी टीम लगातार दिन भर यह कार्रवाई करती रही।
दूर बनाएं गए हैं डेयरी कॉम्पलैक्स : लाल देवी, नरेश ओबरॉय, जगदीश, सुरेंद्र लांबा, नरेंद्र कुमार, अनिल लांबा, सोनू, अशोक लांबा, राजू आदि ने बताया कि दडवा, औरंगाबाद, कैल, रायपुर में डेयरी कॉम्पलैक्स बनाए गए हैं। इनमें से औरंगाबाद व कैल तो दस से 12 किमी दूर है। वहां कोई सुविधाएं भी नहीं दी गई है। ऐसे में फिलहाल डेयरी शिफ्ट करने के लिए कुछ वक्त चाहिए, लेकिन निगम अधिकारी व्यवस्था तो करते नहीं हमें उजाड़ने आ जाते हैं।
वहीं निगम अधिकारियों का कहना है कि शहर में करीब 270 डेयरी संचालक है, जिन्होंने 2004 में शहर से बाहर प्लाट लिये थे, लेकिन उसके बाद वह बार- बार सुविधांए न होने की बात कह कर वहां शिफ्ट नहीं हो रहे। शहर में गंदगी न फैले इसलिये इन डेयरियों को शिफ्ट किया जा रहा है। इन्हें 14 साल में नोटिस भी दिए गए, लेकिन वह नहीं मानें। अब उपायुक्त के आदेश पर कार्रवाई की जा रही है। वीरवार को वार्ड नगर 7, 9 व 10 में निगम ने अभियान चलाकर उन्हें बाहर शिफ्ट करने को कहा, लेकिन वह विरोध पर उतर आए।

मेरी भैंस खोल कर भगा दी। मैंने विरोध किया तो अधिकारियों ने मेरे साथ धक्का मुक्की की। यह तरीका गलत है और हम डीसी से मिलेंगे।
-लाल देवी
बेजुबानों के साथ भी क्रूरता की गई है। कई पशु जख्मी हो गए हैं। नगर निगम के अधिकारियों पर पशु क्रूरता का केस बनना चाहिए।
-नरेश ओबरॉय
सरकार लोगों को बसाती है, लेकिन यहां उल्टा हो रहा है। हमारे पशु खोलकर भगा दिए गए। हम बर्बाद हो गए हैं। कई लाख की भैंस आती है। अधिकारियों पर कानूनी कार्रवाई हो।
-जगदीश
डेयरी कॉम्पलैक्स में कोई सुविधा नहीं है। हमें सुविधाएं मिलेगी तो चले जाएंगे। अधिकारी काम करते नहीं हमें दुखी करने पहुंच जाते हैं।
-नरेंद्र लांबा
मेरे दो दुधारू पशु गुम हो गए हैं। उन्हें कहां रखा गया है यह भी नहीं बताया जा रहा। कुछ पशु नगर निगम के गोदाम में धूप में झुलस रहे हैं। उनको चारा पानी भी नहीं दिया गया।
-राजू

डेयरी संचालकों को लंबे समय से लगातार नोटिस दिए जा रहे हैं। कई बार उनके साथ बैठकें भी हुई। हर बार वह दस दिन का समय मांगते थे। अब वे दो महीने से लगातार दस दिन का समय मांग रहे थे, लेकिन वीरवार को प्रशासन व पुलिस बल के साथ मिलकर उन्हें कालोनियों से बाहर निकालने का काम शुरू कर दिया। यदि कोई विरोध करेगा तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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अनिल नैन, चीफ सेनेटरी इंस्पेक्टर, नगर निगम
अगर कोई शिकायत मिलती है तो पशुओं के साथ क्रूरता करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कड़ा एक्शन लिया जाएगा। मैंने फोटो और विडियो भी मंगाई है। इनकी जांच की जाएगी।
-संदीप जैन, अध्यक्ष, पशु क्रूरता निवारण समिति
फोटो नंबर
6 से 16
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