अंकल फोटो न खींचो, स्कूलों की छुट्टियां कराओ....
गुरुवार को टेम्परेचर रहा 42 डिग्री सेल्सियस के पार, गर्मी व लू से बचाव को प्रशासन ने जारी की एडवाइजरी
सबसे ज्यादा स्कूली बच्चे झेल रहे गर्मी का सितम, दोपहर बाद स्कूल से तेज धूप में लौटते वक्त छूट जाते हैं पसीने-
बच्चे बोले- गर्मी के मारे स्कूलों में घुंटता है दम, स्कूल से घर तक आते-आते सूरज चूस लेता है सारी एनर्जी
अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। अंकल फोटो न खींचो, स्कूलों की छुट्टियां कराओ...यही शब्द गुरुवार को तपती धूप में झूलसते व पसीने से तर बच्चों की जुबां से उस वक्त निकले, जब अमर उजाला प्रतिनिधि ने उन्हें अपने कैमरे में कैद किया। सप्ताहभर से बढ़ती गर्मी से दोपहर के समय 40 से बढ़कर अधिकतम तापमान 42 डिग्री सेल्सियस के पार होने लगा है। गुरुवार दोपहर में 43 डिग्री टेम्परेचर दर्ज किया गया। जबकि न्यूनतम तापमान 23 डिग्री सेल्सियस रहा। मौसम विभाग की मानें तो अगले कुछ दिन राहत के आसार नहीं हैं। उधर, मौसम को देखते हुए जिला प्रशासन की ओर से लोगों के लिए एडवाइजरी जारी की गई है।
बीते सप्ताहभर से पड़ रही भीषण गर्मी ने जन-जीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। सूरज की तपती व झूलसती धूप के साथ लू के रूप में गर्मी हवाएं भी लोगों पर सितम ढाने का काम कर रही हैं। लोग गर्मी में बाहर निकलने से बचने लगे हैं और घरों व दफ्तरों में ही दुबके रहते हैं। दोपहर में शहर की व्यस्त सड़कें भी सुनीं पड़ जाती हैं। इस बीच स्कूल से लौटते वक्त बच्चों को गर्मी का सबसे ज्यादा सितम झेलना पड़ रहा है। स्कूल से झूलसा देने वाली धूप में लौटते वक्त बच्चों के पसीने छूट जाते हैं। गुरुवार को भी दोपहर के दो से तीन बजे के बीच स्कूलों से बच्चे लौटते नजर आए, जो पीठ पर भारी-भरकम स्कूल बैग को उठाए व गले की टाई को ढीला कर पानी की बोतल टांगे हुए थे और एक हाथ में पसीना पोछने को रूमाल पकड़े हुए थे। उनमें बंटी व बब्लू ने कहा कि गर्मी के मारे स्कूलों में दम घुंटता है और स्कूल से घर तक आते-आते सूरज उनकी सारी एनर्जी चूस लेता है। उन्होंने कहा कि स्कूल में कुछ लिखते वक्त भी हाथ का पसीना नोटबुक पर आ जाता है और बार बार प्यास के मारे गला सुखता है। उनका गर्मी में स्कूल आने का बिल्कुल मन नहीं करता, इसलिए उनकी छुट्टियां की जानी चाहिएं।
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एडवाइजरी पर अमल करने से हो सकता है कारगर बचाव: बढ़ती गर्मी से बचाव के लिए आमजन को दैनिक जीवन में एहतियात बरतने की सलाह देते हुए डीसी गिरीश अरोड़ा ने विभिन्न विभागों के अधिकारियों को भी जरूरी जिम्मेदारियां निभाने के निर्देश दिए। डीसी ने कहा कि बढ़ते तापमान के मद्देनजर यदि सावधानी न बरती जाएं तो गर्म हवाओं व लू से शारीरिक तनाव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है, जिससे मृत्यु भी हो सकती है। लू के प्रभाव को कम करने तथा गर्मी के स्ट्रोक से बचाव के लिए आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा जारी एडवाइजरी पर अमल करने से कारगर बचाव हो सकता है।
- गर्मी से शरीर में पानी की मात्रा तेजी से कम होती है, इसलिए पूरे दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पियें, प्यास महसूस न हो तब भी पानी पियें। इससे शरीर का तापमान नियंत्रित रहता है और हम डी-हाइड्रेशन के शिकार होने से बच जाते हैं।
- धूप में बाहर जाने के दौरान हल्के रंगो के, ढीले फिटिंग के तथा सूती कपड़े पहनें।
- सुरक्षात्मक चश्में, छाता, पगड़ी, दुपट्टा, टोपी, जूते या चप्पलों का उपयोग करें।
- यात्रा करते समय पानी जरूर साथ में रखें।
- यदि आप बाहर काम करते हैं तो टोपी या छाते का उपयोग करें तथा सिर, गर्दन, चेहरे और अंगों पर नम कपड़ा रखें।
- शरीर को पुन हाइड्रेट करने को ओआरएस का घोल, घर का बना पेय जैसे लस्सी, नींबू पानी, छाछ का प्रयोग करें।
- गर्मी के स्ट्रोक, गर्मी के दाने या गर्मी से ऐंठन, कमजोरी, चक्कर आना, सिर दर्द, मितली और दौरे के लक्षणों को पहचानें तथा यदि आप बेहोशी या बीमार महसूस कर रहें हैं तो तत्काल चिकित्सचक से परामर्श करें।
- जानवरों को छाया में रखें ओर उन्हें पीने का पर्याप्त पानी दें।
- अपना घर ठंडा रखें। दिन के दौरान पर्दे, शटर का उपयोग करें। रात में खिडकियां खुली रखें। पंखों, नम कपड़ों का प्रयोग करें। ठंडे पानी से स्नान करें।
- कार्यस्थल के पास ठंडे पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करें।
- दोपहर 12 से 3 बजे के बीच बाहर जाने से बचें। भारी, काले व तंग कपड़े पहनने से बचें।
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