ग्रामीण बोले- दो पुलिस कर्मी आए, खानापूर्ति कर चलते बने, सब मिले हुए हैं
- माइनिंग माफिया द्वारा ओवरलोड ट्रकों को रोकने के लिए बैठे ग्रामीणों पर हमले का मामला
- लोगों ने लगाया आरोप- सरकार के संरक्षण में हो रही हैं गुंडागर्दी
अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर।
साबापुर गांव में कुर्सियों पर बैठे ग्रामीणों पर किए गए ताबड़तोड़ हमले के बाद लोग रातभर डर के साये में रहे, लेकिन पुलिस ने मामले में कोई कार्रवाई नहीं की। गुस्साएं लोग बुधवार सुबह सड़क पर आ गए। ग्रामीणों ने यहां सरकार व पुलिस पर खनन माफिया को संरक्षण देने के आरोप लगाए और जमकर हंगामा किया। ग्रामीणों का कहना था कि हमला करने के काफी देर बाद केवल दो पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे और खानापूर्ति कर चले गए। ग्रामीणों ने बताया कि खनन माफिया के आतंक के चलते गांव के लोगों ने पुलिस को फोन किया, लेकिन पुलिस मौके पर नहीं पहुंची। जब हमलावर फरार हो गए तो उसके काफी देर बाद दो सिपाही गांव में पहुंचे। आरोप है कि वह भी खानापूर्ति कर वहां से चलते बने। सीसीटीवी फुटेज में हमलावरों का कोहराम देखने के बाद भी पुलिस चुप है। ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस खनन माफिया से मिली हुई है। पुलिस के संरक्षण में खनन माफिया ओवरलोडेड वाहन लेकर सड़कों से निकल रहे है।
17 साल का लड़का चलाता मिला ट्रैक्टर
गांव के काफी संख्या में महिला, पुरुष व बच्चे सड़क के बीचों बीच खड़े रहे और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी करने लगे। ग्रामीणों ने मार्ग पर चल रहे खनन सामग्री से भरे वाहन रोके। इसी दौरान रेत व पत्थरों से भरी दो ट्रैक्टर ट्रॉली आई। ग्रामीणों ने उन्हें रोक लिया। एक ट्रैक्टर पर बैठे चालक की उम्र महज 17 साल की थी और उसके पास कोई भी लाइसेंस नहीं था।
घरों में महिलाओं पर भी की पत्थरबाजी :
सड़क पर उतरी गांव की महिलाओं ने बताया कि रात के समय खनन माफिया के गुंडो ने लोगों के घरों पर भी पत्थरबाजी की। जिससे घरों के अंदर बैठी महिला बाल बाल बची। उनका कहना है कि माइनिंग माफिया के हौसले बुलंद हो रहे है और पुलिस घटना के कई घंटे बीतने पर भी हरकत में नहीं आई।
ये हुआ अब तक
शहजादपुर-बहरामपुर रोड पर ओवरलोड व हैवी ट्रैफिक के खिलाफ सात मई को साबापुर, बाकरपुर, बहरामपुर, कैतमंडी के ग्रामीणों ने मोर्चा खोला था। इसके बाद उनकी विधायक घनश्याम दास अरोड़ा व डीएसपी के साथ बैठक हुई थी। जिसमें हैवी ट्रैफिक रोकने का आश्वासन दिया था। लेकिन हैवी ट्रैफिक न रुकने पर ग्रामीण एकजुट होकर नौ मई को जिला सचिवालय पहुंचे थे। यहां ग्रामीणों ने एसडीएम व डीसी को शिकायत दी थी। लेकिन फिर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद ग्रामीणों ने स्वयं ही ओवरलोड को रोकना शुरू कर दिया। जिसके बाद स्पीकर कंवरपाल व यमुनानगर विधायक घनश्याम दास अरोड़ा की अध्यक्षता में 21 मई को जगाधरी के पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में बैठक हुई। बैठक में ग्रामीण और खनन व्यवसाय से जुड़े लोग भी शामिल हुए। दोनों पक्षों में कोई सहमति न बनने पर स्पीकर व कंवरपाल मीटिंग से चले गए थे। इसके बाद 22 मई को साबापुर में डीएसपी राजेंद्र सिंह की अध्यक्षता में मीटिंग हुई थी। जिसमें दोनों पक्षों में मार्ग से दिन के समय दोपहर एक बजे से लेकर शाम पांच बजे तक खाली वाहन व रात को दस बजे से सुबह पांच बजे तक लोडिड वाहन चलाने पर सहमति बनी थी। इस समझौते को अभी दस घंटे भी नहीं बीते थे कि रात को करीब साढ़े 11 बजे ग्रामीणों पर हमला हो गया।
साबापुर में झगड़ा होने की सूचना मिलते ही वे पुलिस बल सहित मौके पर पहुंचे थे। सुबह चार बजे तक वे गांव में ही डटे रहे। ग्रामीणों द्वारा लगाए आरोप गलत है। मामले की शिकायत आई है। शिकायत में जिन आरोपियों के नाम बताए है, वे सीसीटीवी फुटेज में नहीं दिखाए दे रहे। मामले की जांच की जा रही है। घायल के ब्यान होने पर आगामी कार्रवाई की जाएगी।
- इंस्पेक्टर हरदीपेंद्र सिंह, एसएचओ, थाना बुड़िया।
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