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10 करोड़ की लागत से बीकेडी रोड पर बना पुल चढ़ा ओवरलोड की भेंट, एक सिरा धंसने से खुला जोड़

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10 करोड़ की लागत से बीकेडी रोड पर बना पुल चढ़ा ओवरलोड की भेंट, एक सिरा धंसने से खुला जोड़
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- हादसा से बचने के लिए लोगों ने स्वयं पत्थरों का ढेर लगाकर लगाई पेड़ की टहनी
- रोजाना 35 से अधिक गांव के 40 हजार से अधिक लोग निकलते है पुल से
अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर।
बीकेडी (बुड़िया-खदरी-देवधर) मार्ग पर बुड़िया के पास पश्चिमी यमुना नहर पर 10 करोड़ रुपये की लागत से बना पुल ओवरलोड वाहनों की भेंट चढ़ गया। पुल का एक सिरा नीचे धंस जाने से उसका जोड़ खुल गया है। जोड़ खुल जाने से पुल के एक छोर पर हुए गड्ढे के कारण हादसा न हो इसके लिए कुछ लोगों ने अपने स्तर पर छोटे पत्थरों का ढेर लगाकर पेड़ की टहनी लगा दी। पुल से क्षेत्र के 35 गांवों के करीब 45 हजार लोग गुजरते हैं। इस पुल से रोजाना खनन जोन से आने वाले दो हजार ट्रक खनन सामग्री लेकर गुजरते हैं।
बीकेडी रोड पर कुछ साल पहले ही 10 करोड़ रुपये की लागत से पश्चिमी यमुना नहर का पुल बनाया गया था। एक साल पहले भी इस पुल का एक सिरा धंस गया था। जिसके बाद पीडब्ल्यूडी विभाग की तरफ से इसकी मरम्मत कराई गई। लेकिन पुल का दायीं तरफ का सिरा नीचे धंसने से इसका जोड़ खुल गया। कुछ लोगों ने यहां पर पेड़ की टहनी लगाकर उसके दोनों तरफ गटके का ढेर लगा दिए। यह देखकर ऐसा लगता है कि जैसे पुल के बीच कोई पौधा उग गया हो। पुल के धंसने के बावजूद भी ओवरलोडेड वाहन का निकलना लगातार जारी है। प्रशासन की ओर से इस पर रोक नहीं लगाई गई।
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ओवरलोड वाहनों से पहले धंसी थी सड़क
पूर्व पश्चिमी यमुना नहर पर बने पुल की सड़क भी धंस गई थी। नई सड़क बनने तथा पुल शुरू होते ही भारी वाहनों की आवाजाही बढ़ने से फिर से सड़क धंस गई। इस रास्ते से एक दो नहीं, बल्कि 35 से अधिक गांवों के हजारों लोग गुजरते हैं। ऐसे में ग्रामीणों को परेशानी का सामना पड़ रहा है। सड़क पर पड़े गड्ढे को मिट्टी के साथ भरकर औपचारिकता की गई थी। इसकी सही से मरम्मत नहीं की गई।

ये गांव हैं प्रभावित
पुल से होकर शहजादपुर, कनालसी, भोगपुर, मेहर माजरा, टपरी, मंडोली, दादूपुर, नंदगढ़, हल्दरी गुजरान, नत्थनपुर, देवधर, ईस्माइलपुर, लोहरीवाला, छोटा दमोपुरा, जयरामपुर, मंडोली गागट, फतेहगढ़ समेत 35 से अधिक गांवों के लोग रोजाना इस पुल से निकलते हैं।

लोग बोले, नया टूटा, पुराना पुल आज भी ठीक
लोगों ने बताया कि नहर पर ब्रिटिश काल में बनाया गया पुल आज भी ठीक स्थिति में है, जबकि नया पुल दो वर्ष में ही खस्ताहाल नजर आने लगा है। पुराने पुल पर बैठ कर लोग मछली का शिकार करते हैं। कुछ दोपहिया वाहन चालक इस रास्ते से होकर गुजरना पसंद करते हैं। लोगों का कहना है कि पुल निर्माण में कंपनी द्वारा लापरवाही बरती गई। वहीं प्रशासन ओवरलोड वाहनों को रोक नहीं पा रहा है। जिससे पुल व सड़क टूट चुकी है।
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बुड़िया पुल के धंसने की जानकारी नहीं है। यदि ऐसा कुछ है तो बुधवार को ही कर्मचारियों को भेजकर जांच करवाई जाएगी। जांच में जो कमी मिलेगी उसे ठीक कर दिया जाएगा।
आरके टिंडवाल, एक्सईएन, पीडब्ल्यूडी एवं बीएंडआर।

फोटो : 32 व 33
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