फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मेन पेज के लिए........ किसानों की दयनीय हालत के लिए सरकारें जिम्मेदार: बिरेंद्र सिंह

विज्ञापन
विज्ञापन
किसानों की दयनीय हालत के लिए सभी सरकारें जिम्मेदार : बीरेंद्र सिंह
विज्ञापन

बच्चों को रोजगार के लिए विदेश भेजकर पंजाब का किसान अन्य राज्यों से है खुशहाल
बोले- किसान एक बेटे को खेती में रखें, दूसरों को अन्य व्यवसायों में लगाएं, तभी होगा सही गुजारा
अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर/रादौर।
केंद्रीय इस्पात मंत्री बीरेंद्र सिंह ने कहा कि किसानों की दयनीय हालत के लिए सभी सरकारें जिम्मेदार हैं। 70 साल की आजादी के बाद भी देश के करोड़ों किसानों को उनका हक नहीं मिल पाया है। वे रविवार को रादौर के सत्यम पैलेस मेें किसान सम्मेलन में आए तीन हजार किसानों से सीधे मुखातिब हुए।
उन्होंने कहा किसी भी सरकार ने किसानों को उनका हक देने की पहल नहीं की। जिसका नतीजा है कि देश के 20 करोड़ से अधिक किसान खेती को छोड़ दूसरे कार्य करने पर मजबूर हो गए। खेती से किसान का आज गुजारा नहीं है। किसान को खेती के अलावा नौकरी, उद्योग धंधों, दुकानों व अन्य व्यवसाय करने पडे़ंगे, तभी किसान परिवार का गुजारा कर सकता है। उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि वह अपने एक बेटे को खेती में रखें और दूसरों को अन्य व्यवसायों में लगाएं, तभी परिवार का सही गुजारा हो सकता है। किसान जातियों में न बंटे तभी उन्हें कामयाबी मिल सकती है। उन्होंने कहा कि आज देश के एक प्रतिशत लोगों के पास कुल मुद्रा का 57 प्रतिशत धन है। जबकि देश के अन्य लोगों के पास 43 प्रतिशत धन है। देश का 20 लाख करोड़ रुपया अमीरों की तिजोरियों में सड़ रहा है। यदि यह भारी भरकम रकम मार्केट में आ जाए तो देश खुशहाल हो सकता है। पंजाब से 25 लाख लोग दुनिया के अलग-अलग देशों में जाकर रोजगार कर रहे हैं, क्योंकि पंजाब में किसान बच्चों को रोजगार के लिए विदेशों में भेज रहे हैं। इसी कारण पंजाब के किसान अन्य राज्यों के किसानों के मुकाबले खुशहाल हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

प्रोफेसर व किसान की तुलना कर समझाया
बीरेंद्र सिंह ने कहा कि 1965 में प्रोफेसर का वेतन 242 रुपये प्रतिमाह था। जबकि किसान की गेहूं का भाव उस समय 64 रुपये प्रति क्विंटल था। आज किसान की गेहूं का भाव 1735 रुपये प्रति क्विंटल है। जबकि प्रोफेसर का वेतन सवा लाख रुपये महीना है। इस प्रकार किसान के गेहूं के भाव में 19 गुणा बढ़ोत्तरी हुई। जबकि प्रोफेसर के वेतन में 60 गुणा वृद्धि हुई है। इस प्रकार हुई वृद्धि के हिसाब से किसान को उसकी गेहूं के लगभग 6 हजार रुपये प्रति क्विंटल दाम मिलने चाहिए थे। जब तक देश का किसान एकजुट नहीं होगा, तब तक कोई भी सरकार उनकी आवाज को नहीं सुनेगी। जिस दिन देश के किसान एक हो गए तो उस दिन सरकारों को किसानों की सभी मांगें पूरी करनी पड़ेगी।
फोटो-43
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें