व्यापारियों की गुहार, ट्रेड लाइसेंस से मुक्ति दिलाओ एमएलए साहब,
विधायक ने कहा, आपके वकील के तौर पर मुख्यमंत्री से करूंगा पैरवी
शहर के व्यापारियों ने प्रदेश में ट्रेड लाइसेंस बनाने बंद करवाने की मांग की
अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर।
ट्रेड लाइसेंस के खिलाफ शहर के व्यापारी एकजुट होने लगे हैं। शनिवार को उद्योग व्यापार मंडल की शाखा के प्रतिनिधिमंडल ने विधायक घनश्याम दास अरोड़ा से मिलकर मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन दिया। जिसमें प्रदेश के नगर निगम के द्वारा बनाए जा रहे ट्रेड लाइसेंस खत्म करने की मांग की गई। व्यापारियों ने विधायक से कहा कि वे सरकार को जीएसटी दे रहे हैं, ऐसे में ट्रेड लाइसेंस के नाम पर उनके साथ अत्याचार किया जा रहा है। जिसकी कोई जरूरत नहीं है। इसलिए प्रदेश सरकार इस टैक्स से व्यापारियों को मुक्ति दें। विधायक ने व्यापारियों को आश्वासन दिया कि वे आपके वकील के तौर पर मुख्यमंत्री से ट्रेड लाइसेंस खत्म करवाने की पैरवी करूंगा।
उद्योग व्यापार मंडल व कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स के कार्यकारी अध्यक्ष संजय मित्तल ने बताया कि व्यापारी वर्ग हमेशा सरकार का सहयोग करता है। आज व्यापारी आर्थिक मंदे के दबाव में आ चुका है। व्यापार करना बहुत कठिन हो गया है। जब केंद्र सरकार द्वारा जीएसटी का कानून पास हो चुका है तो अन्य लगने वाले टैक्स या लाइसेंस, टोल टैक्स समाप्त होने चाहिए। इस मौके पर ट्रांसपोर्ट मंडल अध्यक्ष तारा चंद सैनी, न्यू मार्केट अध्यक्ष, संदीप मखीजा, मनीष लांबा, जिला सचिव दीपक बडोला, दीपक कपूर, गुलशन सचदेवा, विक्की, अश्वनी शर्मा, शम्मी आदि मौजूद रहे।
सरकार पर वादे से मुकरने का आरोप
व्यापारियों ने कहा कि केंद्र सरकार व राज्य सरकार का चुनावी वादा था है कि सरकार बनने के बाद कोई नया टैक्स, टोल टैक्स या लाइसेंस नहीं लगाया जाएगा। सरकार ने जीएसटी लगाते समय भी वादा किया था कि पूरे राष्ट्र में एक कानून, एक फार्म, एक टैक्स होगा। व्यापारियों पर और कोई अन्य टैक्स या लाइसेंस नहीं लगाया जाएगा, लेकिन अब प्रदेश सरकार अपने वादे से मुकर रही है। प्रदेश सरकार के द्वारा व्यापारी कल्याण आयोग के गठन के बाद व्यापारियों के पंजीकरण की योजना की जानकारी भी मुख्यमंत्री के द्वारा रोहतक रैली में दी गई।
व्यापारियों की पीड़ा समझे सरकार
उन्होंने विधायक से मांग की है कि वे मुख्यमंत्री के समक्ष व्यापारियों की पीड़ा बताएं। ट्रेड लाइसेंस व टैक्स को प्रदेश से समाप्त करवाया जाए। प्रदेश के सभी नगर निगमों को भंग किया जाए। सभी नगर निगमों के द्वारा ट्रेड लाइसेंस जैसे काले कानून से भ्रष्टाचार व अफसरशाही बढ़ेगी। व्यापारी मंदे व कर्जों से परेशान है। व्यापारी को बचाया जाए। लाइसेंस व करों में राहत दी जाए। सरकार मेड इन इंडिया के तहत बाहर से व्यापारियों को आने का न्योता दे रही है, लेकिन स्थानीय व्यापारियों पर करों व लाइसेंस का दबाव डाल रही है।
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