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बिजली बिल में सुधार को लेकर भटक रहे उपभोक्ता

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बिना मीटर रीडिंग के थमा दिया बिल, भटक रहे उपभोक्ता
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बिना बिजली यूनिट अंकित किए भेज दिया गया बिल, सुधार को लेकर परेशान हैं उपभोक्ता
अमर उजाला ब्यूरो
जगाधरी। बिजली निगम की ओर से बिल बनाने और मीटर रीडिंग का काम ठेकेदार के माध्यम से कराए जाने पर कई तरह की खामियां सामने आ रही हैं। ठेकेदार के कारिंदे ने बिना मीटर रीडिंग के ही उपभोक्ताओं को बिजली का बिल थमा दिया है। उपभोक्ताओं में नौकरीपेशा, दुकानदार, महिलाएं, और बुजुर्ग बिलों की गलत रीडिंग का पता लगने के बाद मिलिट्री ग्राउंड स्थित बिजली कार्यालय पहुंच रहे हैं। विभाग की ओर से दिए गए कई बिलों में मीटर की रीडिंग अंकित नहीं है तो कई उपभोक्ताओं को कंप्यूटराइज बिल पर पेन से लिखकर रीडिंग थमा दी गई है। विश्वकर्मा कॉलोनी, अंबाला रोड स्थित गांव में बिल देखकर कई उपभोक्ताओं के होश उड़ गए। कंप्यूटराइज्ड बिल होने के बावजूद विभाग द्वारा मीटर की रीडिंग और बिल की राशि को ठीक ढंग से डिफाइन नहीं किया गया है। इससे उपभोक्ताओं को पता ही नहीं लग पा रहा है कि जो बिल उनके पास आया है वो कितना सही है। बिजली कार्यालय में बुजुर्ग लोगों को कार्यालय के एक कमरे से दूसरे कमरे में बिल को ठीक कराने के लिए भेजा जा रहा है।
बिल में 0 यूनिट अंकित होने के बावजूद भेजा 2592 रुपये का बिल
गीडीएन हॉस्पीटल के नजदीक रहने वाले अमीचंद ने बताया कि वो मेडिकल प्रैक्टिसनर है। उनकी डिस्पेंसरी में लगी बिजली की मीटर को ठीक ढंग से रीडिंग किए बगैर बिल भेज दिया गया। बिजली विभाग की ओर से फरवरी माह के बिल में 0 यूनिट बिजली के मीटर की रीडिंग है। लेकिन विभाग ने 2592 रुपये का बिल बनाकर भेज दिया। दुकान में लगे मीटर की रीडिंग करने से पता चलता है कि जनवरी से फरवरी के बीच 41 यूनिट बिजली खपत की गई। जबकि विभाग ने 171 यूनिट के बिजली का बिल भेज दिया है। बिजली कार्यालय जाकर पूछा तो कहा कि आपका बिल ठीक है। पिछले चार दिनों से ऑफिस का चक्कर काटने के बाद भी मीटर रीडिंग ठीक नहीं किया गया। जब विभाग के कर्मचारियों से बिल की रीडिंग ठीक करने को कहा तो आगे अधिकारियों के पास भेज दिया। जब अधिकारियों के पास गए तो वो ऑफिस में नहीं मिले। बिजली कर्मचारी ने शुक्रवार को कहा कि साम तक मीटर की रीडिंग करवा देंगे।
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कंप्यूटराइज्ड बिल पर बिना यूनिट अंकित किए दिया 2157 रुपये का बिल
अंबाला रोड स्थित निवासी सुरेश कुमार ने बताया कि विभाग ने 4 महीने का 2157 रुपये बिल भेज दिया। कंप्यूटराइज्ड बिल होने के बावजूद उस पर मीटर रीडिंग अंकित नहीं है। जब बिजली कार्यालय गये तो वहां लगे कर्मचारी ने मोबाइल द्वारा बिजली यूनिट का पता कर कलम से बिल पर 2157 रुपये का बिल थमा दिया। ऐसे में पता नहीं चल पा रहा कि महीने में कितने यूनिट बिजली खपत घर में की गई। विभाग ने बिना मीटर रीडिंग किए ही बिल दे दिया है। बिजली बिल के रीडिंग पता लगाने के चक्कर में दो दिन की दिहाड़ी का नुकसान उठाना पड़ा। अंत में शुक्रवार को मजबूरी में बिना बिजली यूनिट पता लगे बिल जमा करवाना पड़ा।

बिल को देखकर रीडिंग पर नहीं भरोसा
विश्वकर्मा कालोनी के रहने वाले सन्नी ने बताया कि बिजली निगम ने तीन महीने थका 693 रुपये बिजली का बिल दिया है। जबकि मकान में एक किरायेदार भी रहते है। ऐसे में विभाग द्वारा दिए गए बिल को लेकर संशय है। विभाग ने बिना मीटर रीडिंग किए बिजली बिल थाम दिया है। ऐसा लगता है विभाग ने मीटर देखे बगैर अंदाजे से बिल भेज दिया है। हालांकि बिजली बिल को जमा करवा दिया है। छोटे मोटे काम कर घर का गुजारा चल रहा है। अगर विभाग ठीक ढंग से मीटर चेक कर सही बिल अभी ही बता देते तो रुपया जमा करना आसान होता। लेकिन डर है कि कहीं अगले महीने विभाग ज्यादा बिल ना भेज दे। इसको जमा करवाना मेरे लिए मुश्किल ना हो जाए।
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ठेकेदार के अधीन आने से बिल से संबंधी आ रही गड़बड़ी
जगाधरी वार्ड नंबर 4 के पार्षद मौजी सेठी का कहना है कि बिजली बिल में त्रुटि को लेकर कई लोगों की शिकायत आई है। जबसे विभाग ने बिजली बिल को ठेकेदार के हाथों सौंपा है तब से लोगों की शिकायत ज्यादा सुनने को मिल रही है। ठेकेदार बिना बिजली बिल की रीडिंग किए लोगों को बिल भेज रहे है। इसके कारण स्थानीय लोगों में विभाग और सरकार के खिलाफ गुस्सा पनप रहा है। सरकार को जनता की हित को ध्यान में रखते हुए बिजली बिल को प्राइवेट हाथों में देने की बजाय पक्के कर्मचारी लगानी चाहिए।

फोटो-9 से 12
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