तिगरा गांव की हर गली में सरहद के रक्षक
यमुनानगर। गांव तिगरा भले दो समुदायों के बीच लंबे समय तक चले विवाद से मशहूर रहा, लेकिन अब यहां की एक खासियत पर हर कोई गर्व कर रहा है। वह यहां के युवाओं में देश सेवा करने को लेकर जुनून है। इसी बदौलत 2000 की आबादी वाले गांव के करीब 250 घरों में हर सातवां घर फौजी परिवार का है। कई युवाओं ने गांव की सड़कों पर दौड़ तो कुछ ने गांव को मिले आधे-अधूरे स्टेडियम में खुद को सेना के लिए तैयार किया। इस वक्त गांव से 33 लोग देश के रक्षक बन मातृभूमि की सेवा कर रहे हैं। जबकि गांव से ही चार फौजी रिटायर्ड हो चुके हैं। इनमें से एक की मौत हो चुकी है। सेना में जाने को लेकर यहां के युवाओं के जुनून को देख न सिर्फ गांव के बड़े-बुजुर्ग बल्कि जिले को भी नाज होने लगा है।
भारतीय सेना में सैनिक भीसम छुट्टी लेकर इन दिनों गांव में आए हुए हैं। उन्होंने बताया कि उनकी भरतीय सेना में 2013 में भर्ती हुई। वह अभी श्रीनगर में पोस्टेड हैं। उन्होंने बताया कि वह और गांव से भारतीय सेना में शामिल अन्य युवाओं ने सड़कों पर ही सुबह-शाम दौड़ लगाई। तब अभ्यास के लिए कोई जगह व सुविधा नहीं थी, लेकिन 12वीं करने के बाद से भारतीय सेना में जाने का मन बना लिया। जैसे ही कहीं भी भर्ती का पता चलता था, बस साथियों के साथ वहां पहुंच जाते थे। कई बार ट्राई करने के बाद वह सेना में भर्ती हो पाए। अब गांव में स्टेडियम की जगह है, लेकिन वह आधा-अधूरा है। यहां दौड़ व अन्य अभ्यास कर लगातार युवा सेना में जा रहे हैं। अगर सरकार स्टेडियम में कोच, खेल व अभ्यास से संबंधित सुविधाएं दे तो गांव से सेना में जाने वाले युवाओं की संख्या में और इजाफा होगा।
छुट्टी पर घर आए सैनिक भी कराते हैं अभ्यास
गांव से लगातार सेना में जा रहे युवाओं को देख अन्य युवाओं में भी देश सेवा करने की अलख जगी। स्टेडियम में कोच व अन्य सुविधाएं न होने पर भी गांव के युवा खुद के बलबूते अपने आपको सेना में जाने के लिए तैयार कर रहे हैं। युवा खुद ही स्टेडियम में दौड़ने के लिए बने ट्रैक को दुरुस्त रखते हैं। वहीं, भारतीय सेना में तैनात गांव के सैनिक जब कभी छुट्टीी लेकर घर आते हैं, तो वह इन युवाओं को सेना में जाने के लिए जरूरी टिप्स देने के साथ अभ्यास भी कराते हैं।
करीब 12 लाख की ग्रांट रुकने से रुके स्टेडियम के काम
गांव की सरपंच ओमलता राणा ने बताया कि गांव में 2014 में तीन एकड़ स्टेडियम की जगह मिली। इस पर करीब 30 लाख से चारदीवारी, ट्रैक व अन्य काम होने थे। स्टेडियम की चारदीवारी व ट्रैक तैयार करा दिया है, लेकिन करीब 12 लाख की ग्रांट नहीं मिली। इससे अन्य कार्य नहीं हो पाए। गांव के युवा ही ट्रैक को दुरुस्त रखते हैं। गांव से भारतीय सेना में लगातार जा रहे युवाओं को देखते हुए यहां के लिए कोच, चौकीदार रखना चाहिए। साथ ही खेल व अभ्यास की सुविधाएं मुहैया हों।
गांव से सेना में शामिल 33 में तीन भाइयों की जोड़ी भी
गांव से सेना में मौजूदा समय में तैनात 33 में तीन भाइयों की जोड़ियां भी शामिल हैं। इनमें इनमें देवेंद्र व जसविंद्र पुत्र नरेश, जोहर व दीपक पुत्र सोमपाल, जसविंद्र व बलविंद्र पुत्र सुबोध हैं। यानि एक ही घर से दो-दो युवा भाई भारतीय सेना में भर्ती होकर देशसेवा कर रहे हैं।
भारतीय सेना में ऑन ड्यूटी
दुष्यंत राणा पुत्र पवन सिंह, दुष्यंत पुत्र रामबीर, देशराज पुत्र नेपाल, देसराज पुत्र इसम सिंह, विरेंद्र राणा पुत्र ओमपाल, विरेंद्र पुत्र राजपाल, विकास पुत्र सतीश, सचिन पुत्र सुधीर राणा, लाकेंद्र पुत्र महीपाल, संजय पुत्र सुरेंद्र, राजेंद्र पुत्र धीर सिंह, गुरनैल पुत्र तेजपाल, गौरव पुत्र संजीव, कर्ण पुत्र सुलिंद्र, भीसम पुत्र चंद्रपाल, विपन पुत्र राजेश, रवि पुत्र लेख सिंह, गौतम पुत्र लेखराज, मनोज राणा पुत्र शोसिंह, मुकेश पुत्र धर्मसिंह, सुशील पुत्र जगदीश, राहुल शर्मा पुत्र ओमप्रकाश, रमन पुत्र अशोक, विशाल पुत्र शेरपाल, सुनील राणा पुत्र हुकम सिंह, नसीब पुत्र मेघराज, संदीप पुत्र ओमप्रकाश
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तीन भाइयों की जोड़ी भी शामिल
देवेंद्र व जसविंद्र पुत्र नरेश, जोहर व दीपक पुत्र सोमपाल, जसविंद्र व बलविंद्र पुत्र सुबोध
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सेना से सेवानिवृत्त
उदय सिंह पुत्र बुध सिंह, रामसिंह पुत्र रामलाल, पूर्णचंद पुत्र तेलू राम, फूलचंद पुत्र तेलू राम
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एक मर्चेंट नेवी में ऑन ड्यूटी
पवन पुत्र मामचंद
फोटो-17 से 22