फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मोटी फीस देने पर भी क्या इन टंकियों का पानी पीएंगे हमारे लाल?

विज्ञापन
विज्ञापन
प्रस्तावित लीड:- (खबर केवल अपने पास)
विज्ञापन

मोटी फीस देने पर भी क्या इन टंकियों का पानी पीएंगे हमारे लाल?
खिजराबाद में लोगों ने खोली निजी स्कूल की पोल, छत पर चढ़कर जांची पानी की टंकियां
3 टंकियां में एक पर नहीं था ढक्कन, अन्य दो टंकियों से मिली काई, ईंटे और पड़ा था बंदरों का मलमूत्र
प्रिंसीपल बोली; पानी साफ करने को लगा है वाटरप्योरी फायर, जांच करने पर वाटर प्यूरी फायर भी मिला खराब
अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर/खिजराबाद। निजी स्कूल में अभिभावकों द्वारा मोटी फीस देने पर भी उनके बच्चों को स्वच्छ पेयजल की सुविधा तक नहीं मिल पा रही है। कुछ ऐसा ही खिजराबाद के एक निजी स्कूल में हो रहा है, जिसकी पोल खुद वहां पढ़ रहे बच्चों के अभिभावकों ने खोली। स्कूल में पानी की टंकियों में गंदगी का पता लगने पर कुछ बच्चों के अभिभावकों ने स्कूल की छत पर चढ़कर टंकियों की जांच की। उन्हें तीन टंकियों में जहां एक पर ढक्कर नहीं मिला वहीं, अन्य दो टंकियों से काई व ईटें व बंदरों का मलमुत्र व अन्य गंदगी मिली। अभिभावकों को पता चला कि इन्हीं टंकियों का पानी पीकर न सिर्फ उनके बल्कि अन्य बच्चे व स्टाफ सदस्य भी प्यास बुझाते हैं। इसका जवाब मांगने पर प्रिंसीपल ने कहा कि पानी साफ करने को वाटर प्यूरीफायर लगा है, लेकिन जब नीचे जाकर जांच की गई तो वाटर प्यूरीफायर भी खराब मिला।
इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि स्कूल में बच्चों के स्वास्थ्य के साथ खिलावाड़ हो रहा है। गनीमत रहीं कि समय रहते कि समय रहते गांव किशनपुरा निवासी विरेंद्र वालिया, सुशील धीमान ने इस बारे पता लगने पर तुरंत स्कूल में छत पर रखीं पानी की टंकियों की जांच कराई। हालांकि स्कूल में अभी कोई बच्चा पीनी पीने से बीमार नहीं पड़ा, लेकिन ज्यादा समय तक यह दूषित पानी पीने से बच्चों के साथ स्टाफ सदस्य भी बीमार पड़ सकते थे।
विज्ञापन

बॉक्य
कई वर्षों से नहीं कराई गई होगी टंकियों की सफाई: अभिभावकों ने जब प्रिंसीपल को स्कूल की छत पर ले जाकर पानी की टंकियों की जांच की तो एक टंकी से ढक्कन गायब मिला। जबकि दूसरी टंकी के ऊपर बंदरों द्वारा मलमुत्र आदि किया हुआ था और अंदर काई जमी हुई थी। तीसरी टंकी में ईंटे गिरी हुई थी और काफी काई भी जमी हुई थी। अभिभावकों ने इसका जवाब मांगा तो प्रिंसीपल द्वारा पानी के वाटर प्यूरीफायर से साफ होने की बात की गई, लेकिन जब नीचे जाकर वाटर प्यूरीफायर जांचा गया तो वह भी खराब मिला। अभिभावकों ने कहा कि पानी की टंकियों का हाल देख अंदाजा लगाया जा सकता है कि कई वर्षों से इनकी सफाई नहीं की गई होगी।
बॉक्स
टंकियों के अंदर भी जाता होगा बंदरों का मलमूत्र: किशनपुरा के विरेंद्र वालिया ने कहा कि जब बंदर पीने के पानी की टंकी के ऊपर मलमूत्र कर सकते हैं तो हो सकता है कि यह मलमूत्र पानी की टंकियों में भी गया होगा। इसके अलावा टंकियों में काफी गंदगी जमी थी। इनका पानी किसी भी सूरत में पीने लायक नहीं है। बावजूद इसके अंजाने में इस पानी से बच्चे प्यास बुझा रहे हैं, जो उनकी सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है।
बॉक्स
सुविधा के नाम मोटी फीस देने पर भी ये हालात: स्कूल में पानी की टंकियों के बुरे हालात देख यहां पढने वाले बच्चों के अभिभावकों ने कहा है कि स्कूल की ओर से सुविधा के नाम पर हर साल मोटी फीस ली जाती है। स्कूल में बच्चों को सब प्रकार की सुविधा मिले, इसत्नलिए वह हर साल फीस देने को तैयार रहते हैं। लेकिन स्कूल की ओर से बच्चों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने को पानी की टंकियों की सफाई करने तक की जहमत नहीं उठाई जा रही है। जबकि यह दूषित पानी पीने से बच्चों को दस्त, उल्टी, डायरिया जैसे रोग हो सकते हैं।
विज्ञापन

वर्जन
पीने के पानी कि टंकियों पर ढक्कन लगे हुए थे। बंदरों ने टंकी को खोलकर ढक्कन कहीं गिरा दिया। आज ही सभी टंकियों की सफाई करवा नया ढक्कन मंगाकर टंकी पर रखाएंगी।
सुनीता गुलाटी, प्रधानाचार्य, निजी स्कूल, खिजराबाद।
फोटो-11 से 15
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें