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खनन विभाग ने सिचाईं विभाग से एनओसी लिए बिना दे दिया खनन का ठेका

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खनन विभाग ने सिचाईं विभाग से एनओसी लिए बिना दे दिया खनन का ठेका
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आरटीआई एक्टिविस्ट ने सीएम को दी शिकायत तो सिंचाई विभाग नींद से जागा
- खनन विभाग को नोटिस देकर पूछा-बिना इजाजत कैसे दे दिया ठेका
- सिंचाई विभाग द्वारा बनवाए गए तटबंधों के नीचे से निकाली जा रही रेत, तटबंध टूटने का खतरा
- सिंचाई विभाग ने आज तक नहीं ली अपने तटबंधों की सुध
- यमुना से सटे गांवों को बाढ़ से बचाने के लिए बनाए गए हैं तटबंध, तटबंध टूटे तो गांवों मेें आ जाएगा बाढ़ का पानी-
यमुनानगर। यमुना नदी में खनन का ठेका लेकर ठेकदार एक साल तक अवैध तरीके से खनन करता रहा, लेकिन खनन विभाग आंखे मूंदें रहा। ठेकेदार की भारी-भरकम मशीनें नदी किनारे गांवों को बाढ़ से बचाने के लिए करोड़ों रुपये की लागत से बनाए गए तटबंधों के नीचे से रेत निकालती रही, लेकिन सिंचाई विभाग भी इसकी अनदेखी करता रहा। गांवों के अस्तित्व व करोड़ों रुपये के तटबंध के टूटने का खतरा उत्पन्न होने पर एक आरटीआई एक्टिविस्ट ने इसकी शिकायत मुख्यमंत्री को की। इसके बाद सिंचाई विभाग नींद से जागा और आनन-फानन सिंचाई विभाग को नोटिस भेजा है कि नदी में खनन का ठेका देते समय उनसे एनओसी क्यों नहीं ली गई।
माइनिंग विभाग ने करीब एक साल पहले गुमथला क्षेत्र से गुजर रही यमुना नदी में खनन का ठेका दिया था। खनन ठेकेदार द्वारा गुमथला और गुमथला राव के बीच करीब डेढ़ किलोमीटर लंबी यमुना नदी में खनन किया जा रहा है। यह क्षेत्र बाढ़ ग्रस्त इलाके में आता है। हर साल यमुना नदी में बाढ़ आने पर इस क्षेत्र की सैकड़ों एकड़ खेत बाढ़ के पानी में डूब जाते हैं। यमुना नदी में कई सालों से हो रही भूमि कटाव के चलते नदी गुमथला गांव से करीब आधा किलोमीटर दूरी पर पहुंच चुकी है। बाढ़ के दौरान यमुना से सटे गांवों में बाढ़ का पानी न घुसे, इसके लिए सिंचाई विभाग हर साल यहां करोड़ों रुपये की लागत से तटबंध व स्टीनिंग का निर्माण करवाता है। इस साल भी इस इलाके में तटबंध व स्टीनिंग का निर्माण करवाया गया है। यमुना नदी में खनन ठेकेदार द्वारा नियमों को ताक पर रखकर नदी से रेत निकाली जा रही है। ठेकेदार की भारी-भरकम पोप्लाइन मशीनें नदी किनारे बने तटबंध के आसपास व तटबंध के नीचे से मोटा रेत निकाल रही हैं। इससे तटबंध के टूटने का खतरा बना हुआ है।
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बाक्स-
आरटीआई एक्टिविस्ट ने क्षेत्रीय विधायक को करवाया मौका-मुआयना
आरटीआई एक्टिविस्ट एडवोकेट वरियाम सिंह गुमथला के रहने वाले हैं। यमुना नदी में तटबंधों के नीचे से रेत निकाले जाने पर नियमों को ताक पर रखकर रात के समय खनन करने पर उन्होंने गत सितंबर में इसकी शिकायत मुख्यमंत्री को की थी। इसके बाद उन्होंने क्षेत्रीय विधायक श्याम सिंह राणा को भी इससे अवगत कराया। श्याम ङ्क्षसह राणा ने मौके का मुआयना किया। डॉ वरियाम सिंह की शिकायत के बाद सिंचाई विभाग ने आनन-फानन खनन विभाग को नोटिस जारी किया कि उन्होंने बिना सिंचाई विभाग की अनुमति के खनन का ठेका कैसे दे दिया। खनन विभाग को लिखे गए पत्र में सिंचाई विभाग के अधिकारी ने यह भी कहा कि खनन ठेकेदार तटबंधों के नदी में मिट्टी का बांध लगाकर यमुना के पानी के बहाव में परिवर्तन कर रहा है, जो कि कानूनन गलत है।
बॉक्स
रात में भी निकाली जा रही है यमुना से रेत
डॉ वरियाम सिंह का कहना है कि खनन ठेकेदार द्वारा नदी में तटबंध के नीचे से रेत निकाली जा रही है। साथ ही नदी में बांध बनाकर पानी का रुख बदल रहा है। इससे तटबंधों के टूटने व भूमि कटाव का खतरा बन गया है। रात के समय भी यमुना से पोप्लाइन मशीनों से रेत निकाली जा रही है, जबकि खनन की शर्तों के अनुसार रात के समय नदी से किसी भी कीमत पर रेत नहीं निकाली जा सकती।
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वर्जन-
गुमथला में खनन का ठेका देने के लिए सिंचाई विभाग को सूचना न देने का पत्र आया था, जिसका जवाब दे दिया गया है। यदि सिंचाई विभाग से अनुमति नहीं ली गई थी तो उनके अधिकारियों को खनन के दौरान आबजेक्शन क्यों नहीं किया। यमुना नदी में रात के समय माइनिंग नहीं हो सकती। हमारी टीम कई बार खनन क्षेत्र में रात को गई, लेकिन हमेें रात में माइनिंग होते नहीं मिली।
गुरजीत सिंह, डिस्ट्रिक्ट माइनिंग ऑफिसर।
फोटो-15,16
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