लंबित मांगों पर टूटा सब्र का बांध, 435 कर्मचारियों ने दी गिरफ्तारी
अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। लंबित मांगों को लेकर विभिन्न विभागों के कर्मचारियों के सब्र का बांध मंगलवार को टूट गया। कच्चे-पक्के कर्मचारियों ने भाई कन्हैया साहिब चौक से लघु सचिवालय तक रोष मार्च निकाला। इसके बाद सचिवालय परिसर में प्रदर्शन कर करीब 435 कर्मचारियों ने सामूहिक गिरफ्तारी दी। पुलिस ने सभी को हिरासत में लिया और करीब सात बसों में बैठाकर पुलिस लाइन ले जाकर छोड़ दिया। कर्मचारियों के प्रदर्शन को लेकर सचिवालय में पुलिस बल तैनात रहा।
मंगलवार सुबह करीब ग्यारह बजे हरियाणा कर्मचारी महासंघ के बैनर तले विभिन्न विभागों के कर्मचारी यूनियनों और संगठनों के पदाधिकारी, सदस्य भाई कन्हैया साहिब चौक पर एकत्रित हुए। इसमें रोडवेज कर्मचारी यूनियन, हरियाणा अध्यापक संघ, इनकम टैक्स यूनियन, सक्षम यूनियन, कराधान विभाग, आंगनबाड़ी वर्कर यूनियन, आशा वर्कर यूनियन, बिजली कर्मचारी संघ, सर्व कर्मचारी संघ, पब्लिक हेल्थ कर्मचारी यूनियन आदि के सदस्य शामिल हुए। सभी ने हरियाणा कर्मचारी महासंघ के आह्वान पर पहले से प्रस्तावित जेल भरो आंदोलन के तहत भाई कन्हैया साहिब चौक से रोष मार्च निकाला। इसमें कर्मचारी एनएच-73(चंडीगढ़-रुड़की) से सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए जिला सचिवालय पहुंचे। सचिवालय परिसर में कर्मचारियों ने जोरदार प्रदर्शन किया। इसके बाद जिला पुलिस को सामूहिक गिरफ्तारियां दी। पुलिस की ओर से करीब 435 कर्मचारियों को हिरासत में लेकर करीब सात बसों में बैठाकर पुलिस लाइन ले जाकर छोड़ दिया गया। मौके पर हरियाणा बिजली बोर्ड यूनियन के मनदीप शर्मा, मोहन लाल, जयसिंह, राजेश कुमार, तिलक राज शर्मा, सुधीर कुमार, राजिंद्र सिंह, प्रशांत, धर्मवीर सिंह, ब्रह्मपाल, मंजीत सिंह, रोडवेज कर्मचारी यूनियन से जिला प्रधान वरयाम सिंह, प्रांतीय प्रधान फूलकुमार, ईश्वर सिंह, पब्ल्कि हेल्थ से रामकुमार, कश्मीरीलाल, कर्मजीत राठी, अध्यापक संघ से जयदेव आर्य, रवींद्र राणा, गुरमीत सिंह, रमेश शर्मा, जगदीप कालिया, सुनील शास्त्री, सक्षम यूनियन की ओर से दीपक शर्मा, विपिन बराड, आबकारी व कराधान यूनियन से रमेश कश्यप, हरियाणा कर्मचारी महासंघ से कश्मीरी लाल, विरंद्र कांबोज, सुनील कुमार, कर्मसिंह, जसमेर, फूलकुमार कांबोज, दिलावर सिंह आदि मौजूद रहे।
अब भी नहीं मानीं मांगें तो होगा बड़ा आंदोलन: हरियाणा राजकीय अध्यापक संघ के राज्य प्रधान प्रदीप सरीन, महासंघ के जिला प्रधान अशोक शर्मा ने बताया कि मुख्यमंत्री ने कर्मचारियों की मांगें मान ली, लेकिन उन्हें लागू करने में सरकार आनाकानी कर रही है। कई बार यूनियनों के साथ सरकार की बातचीत हुई, लेकिन सरकार महज आश्वासन देती है। बैठक के बाद कर्मचारियों के साथ फिर वही पुराना रवैया अपनाया जाता है, जिसे अब कर्मचारी सहन नहीं करेगा। भाजपा सरकार ने सत्ता में आने से पहले जो वादे कर्मचारियों से किए थे, वह आज तक पूरे नहीं किए गए। सरकार को कई बार चेताने के बाद ही जेल भरो आंदोलन का फैसला लिया गया। उन्होंने चेतावनी दी कि अब भी कर्मचारियों की मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो महासंघ के आह्वान पर बड़े आंदोलन की तैयारी करेंगे, जिसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी।
ये हैं मुख्य मांगें:-कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने की सरकार ने पॉलिसी बनाई थी, लेकिन अब तक उन्हें पक्का नहीं किया गया है, सरकार जल्द कच्चे कर्मचारियों को पक्का करे।
केंद्र सरकार जो सुविधाएं अपने कर्मचारियों को दे रही है, वह आज तक राज्य में लागू नहीं की गई, इन सुविधाओं को सरकार राज्य लागू करे।
कैशलेस मेडिकल पॉलिसी को जल्द लागू किया जाए। कर्मचारियों को समान काम-समान वेतन मिले।
गेस्ट टीचरों को हटा दिया गया, जिससे वह बेरोजगार हो गए, जिन्हें स्कूलों में समायोजित किया जाए।