श्रद्धालुओं ने गुरुद्वारा सरोवरों में लगाई श्रद्धा की डुबकी
अमर उजाला ब्यूरो
बिलासपुर। ऐतिहासिक एवं प्राचीन तीर्थ स्थल कपाल मोचन ऋषि मुनियों, पीरों पंगबरों, शूरवीर, योद्धाओं और गुरुओं का क्षेत्र है। यहां की धरती को ऋषि मुनियों ने अपने तपोबल से पावन किया है। सिंधु वन में स्थित इस धार्मिक स्थल में मुख्य पर्व गुरु नानक देव के जन्मोत्सव पर कार्तिक पूर्णिमा को मनाया जाता है। ग्रामीण आंचल के लोग महीने की अमावस्या, पूर्णिमा व एकादशी के अवसरों पर श्रद्धालु यहां स्नान करने पहुंचते है। श्रद्धालुओं के इस क्रम में अभी से पंजाब व अन्य राज्यों से लोग पहुंचने शुरू हो गए है। शुक्रवार को भी लगभग दो सौ भक्तों ने कपाल मोचन व ऋण मोचन के साथ गुरुद्वारा सरोवरों में स्नान किया व मत्था टेका।
भीड़ से बचने के लिए हर साल पहले आते है स्नान करने :
मोगा से आए हरजीत सिंह, संगरूर से आए सुमान सिंह, राज सिह, शकुंतला का कहना है कि वे मेले की भीड़ से बचने के लिए हर वर्ष इन्हीं दिनों कपाल मोचन में पहुंच कर स्नान व पूजा अर्चना कर जाते है। लुधियाना से आए एक अन्य जत्थे के साथ महिलाएं गीता, कांता, रानी ने बताया कि पंच भीखी शुरू होने से पूर्व वे कपाल मोचन, आदि बद्री, हरिद्वार में स्नान कर वापस अपने अपने क्षेत्र में पहुंच अपने मंदिर व गुरू स्थानों पर पहुंच गुरू नानक जन्मोत्सव मनाते है। भीड़ से बचने के लिए सूरज कुंड व सरोवरों में स्नान कर पहले ही चले जाते है। वहीं कपाल मेला में श्रद्धालुओं का आना शुरू हो चुका है प्रशासन ने ऋण मोचन सरोवर के समीप से मुख्य एंट्री पर बेरिकेट लगाने शुरू कर दिए है। जो अंतिम चरण में है। मेला अधिकारी नवीन आहुजा का कहना है प्रशासन की ओर से तैयारियों को अंतिम दिया जा रहा है। मेले के शुरू होने से पहले आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधाओं का भी विशेष ध्यान रखा गया है।
सड़क बनी परेशानी का सबब
बिलासपुर के शिव चौक से कपाल मोचन तक जाने वाली सड़क की क्षतिग्रस्त अवस्था को लेकर डीसी ने प्रशासनिक अधिकारियों की बैठक में विभाग के अधिकारियों को सख्त शब्दों में निर्देश दिए थे। लेकिन विभाग के अधिकारी अपने कार्य में सुस्त नजर आ रहे है। पूरे मार्ग पर वाहनों के गुजरने से धूल व मिट्टी के गुबार बन जाते है। केवल न्यायालय परिसर के समीप पानी का छिड़काव करके अपने कार्य की इतिश्री कर ली जाती है। बिलासपुर से धनौरा तक लगभग पंद्रह किलों मीटर लंबी सड़क पर कही पर भी पानी का छिड़काव नहीं किया जा रहा है। जिसके कारण शिक्षण संस्थानों में जाने वाले छात्रों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है।