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बे-जुबानों में डाली जान: श्मशान से सौ ने भरी आसमान में उड़ान

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श्मशान में डाली जा रही बे-जुबानों में ‘जान’
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राहुल शर्मा
यमुनानगर। जिंदगी की खिड़की से फिर से उड़ चला एक परिंदा ख्वाहिशों की उड़ान भरने...एक कवि की लिखी पंक्ति (अनुवाद) जैन जीव दया केंद्र से बेजुबानों के इलाज पर चरितार्थ होती नजर आ रही है। सिटी सेंटर रोड पर सोंधी मोहल्ला के समीप स्थित श्मशान घाट में चल रहे जैन जीव दया केंद्र के पास जहां आए दिन चिताएं जलती हैं, वहीं से घायल और मरणासन्न पक्षी नि:शुल्क इलाज के बाद फिर से अपने गंतव्य की ओर रवाना हो रहे हैं। इस केंद्र में पक्षियों के ठीक होकर उड़ने तक दवा और दाना-पानी का इंतजाम है। यहां गर्मी में पक्षियों के लिए पंखे-कूलर और पानी के फव्वारे, सर्दी में हीटर जैसी सुविधाओं के इंतजाम हैं। बता दें कि यह जैन जीव दया केंद्र जैन मिलन की ओर से चलाया जा रहा है, जो जिले में इकलौता बर्ड अस्पताल है। इसे सिटी सेंटर रोड पर सोंधी मोहल्ला के स्थित श्मशान घाट में जुलाई-2015 में स्थापित किया गया। पहले दिन एक जख्मी कबूतर के मुफ्त इलाज से शुरू हुए केंद्र में अब तक जिलेभर से अलग-अलग प्रजातियों के करीब 400 घायल पक्षियों का इलाज किया जा चुका है। इनमें कबूतर, तोते, बगुले, मैना, बत्तख, चील आदि शामिल रहे। करीब सौ पक्षियों के ठीक होने पर खुले आसमान में उड़ने के लिए छोड़ा जा चुका है, जबकि मौजूदा समय में करीब सौ पक्षियों का इलाज चल रहा है। इस बीच कुछ मौत भी हो चुकी है।
पक्षियों के लिए होता है गायत्री मंत्र का जाप
जैन जीव दया केंद्र में पक्षियों को न सिर्फ मुफ्त इलाज व दवा मिल रही है, बल्कि उन्हें अलग-अलग मेन्यू के मुताबिक गेहूं, बाजरा, ज्वार, पनीर, दाल की पकौड़ी व मिर्ची (तोते के लिए) दिए जा रहे हैं। इसके अलावा उनके ठीक होने तक स्पीकर पर गायत्री व अन्य मंत्रों का हर वक्त जाप सुनाया जाता है। यहां गर्मी में इनके लिए पंखे-कूलर और सर्दी में हीटर के इंतजाम किए गए हैं। केवल घायल ही नहीं बल्कि खुले आसमान में उड़ने वाले पक्षियों के लिए भी केंद्र की छत पर दाना-पानी सहित पानी के फव्वारे लगाए गए हैं, जहां सुबह-शाम आकर परिंदे अठखेलियां करते हैं।
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कई तरह की बीमारी के अलावा करंट लगने के ज्यादा केस
जैन जीव दया केंद्र में इलाज के लिए लाए गए पक्षियों में ज्यादातर के केस करंट लगने के हैं। इसके अलावा पंख, पंजा, टांग टूटने, पैरेलाइज होने जैसी बीमारियों से पीड़ित पक्षी भी आ रहे हैं। उन्हें केंद्र में बाहर जैसा खुला माहौल देने के लिए घोंसले व झूले भी बनाए गए हैं। वहीं पंक्षियों को बाहर की हवा आती रहे और सुरक्षा बनी रहे। इसके लिए बड़े-बड़े जाल लगाए गए हैं।
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समाज के लोग दान से चला रहे केंद्र
जैन मिलन के प्रधान महेश जैन, संयोजक संदीप जैन, महामंत्री सुशील जैन, कोषाध्यक्ष पुनीत जैन ने बताया कि किसी को भी कहीं भी कोई जख्मी व बीमार पक्षी दिखे तो वह केंद्र में उसे ला सकता है। इसकी सूचना देने पर केंद्र से वालंटियर भी मौके पर जाकर पक्षी को लेकर आते हैं। प्रतिदिन करीब 2100 रुपये खर्च आता है, जो या तो समाज के लोग जन्मदिन या किसी खास मौके पर दान करते हैं। इस पर उनका नाम केंद्र में लगे बोर्ड पर लिखा जाता है। अन्यथा इसमें संस्था मिलकर सहयोग करती है।
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