यमुनानगर। पिछले 10 साल से सड़क सुरक्षा समिति की बैठक हो रही है। इसके बाद भी जिले में ब्लैक स्पॉट खत्म होना तो दूर, कम होने का नाम भी नहीं ले रहे। जिले में 70 ब्लैक स्पॉट ऐसे हैं जहां पर सबसे ज्यादा सड़क हादसे हो रहे हैं।
ऐसे में प्रशासन ने निर्णय लिया है कि अब सभी ब्लैक स्पॉट पर एक साथ काम न करके उन्हें कई चरणों में ठीक किया जाएगा। पहले चरण में उन शीर्ष 15 ब्लैक स्पॉटों की कमियाें को दूर किया जाएगा जहां पर सबसे ज्यादा हादसे हो रहे हैं। इसके बाद बचे ब्लैक स्पॉटों को भी धीरे-धीरे दुरुस्त करने की योजना तैयार की गई है। जानकारी के अनुसार सहारनपुर-पंचकूला नेशनल हाईवे-344 बनने के बाद से ही इस पर लगातार हादसे हो रहे हैं। हाईवे पर स्थित थाना छप्पर जंक्शन, भंभौली जंक्शन, कैल, सुढल जंक्शन, हरनौल, औरंगाबाद, खंडवा जंक्शन, करेहड़ा खुर्द व कलानौर के आस-पास आए दिन कोई न कोई हादसा होता ही रहता है। इसलिए इन्हें ब्लैक स्पॉट घोषित किया हुआ है।
इनके अलावा शहर में विश्वकर्मा चौक, महाराणा प्रताप चौक, ट्रक अड्डा खानचंद चौक, सेक्टर-18 टी-प्वाइंट, मटका चौक, भाई कन्हैया साहिब चौक व बूड़िया चौक पर भी होने वाले हादसों का ग्राफ कम होने का नाम नहीं ले रहा। हर माह होने वाली रोड सेफ्टी की बैठक में अधिकारियों को ब्लैक स्पॉट की कमियों को दूर करने को कहा जाता है। अधिकारी थोड़ा बहुत काम करते हैं लेकिन धरातल पर कुछ भी नजर नहीं आ रहा। यही वजह है कि इतने सालों बाद भी ब्लैक स्पॉटों की स्थिति जस की तस है। वहीं लोगों ने सड़कों के डिवाइडरों पर अवैध कट बना लिए हैं, तो कहीं बिना रिफ्लेक्टर लगे वाहनों को सड़कों पर खड़ा कर दिया जाता है। गत माह जगाधरी-बिलासपुर स्टेट हाईवे पर गुलाब नगर से लेकर जड़ौदा के बीच चार लोगों की जान जा चुकी है। टूटी सड़कें, सफेद पट्टी न होना, संकेतक या चेतावनी बोर्ड न होना भी हादसों का कारण बन रहा है।