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कर्जमाफी के लिए सड़क पर उतरे किसान

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कर्जमाफी के लिए सड़क पर उतरे किसान
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अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। कर्जमाफी और स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट लागू कराने की मांग को लेकर सामवार को किसान सड़क पर उतर आए। भारतीय किसान संघ के बैनर तले किसानों ने किसान भवन से लेकर लघु सचिवालय तक रोष मार्च निकाला। इसके बाद लघु सचिवालय में जमकर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद किसानों ने अंबाला सांसद रतन लाल कटारिया और डीसी को मुख्यमंत्री के नाम के ज्ञापन सौंपा। जल्द ही मांगें पूरी न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी।
भारतीय किसान संघ के बैनर तले किसान सोमवार सुबह किसान भवन में जुटे। यहां उन्होंने प्रदेश के वरिष्ठ उपाध्यक्ष रतन सिंह देवधर की अध्यक्षता में बैठक की। उसके बाद किसानों की मांगों को लेकर प्रदर्शन। किसान भवन से सभी किसान नेशनल हाईवे से वाहनों पर रोष मार्च निकालते हुए लघु सचिवालय पहुंचे। यहां किसानों ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद सांसद रतन लाल कटारिया और डीसी आरएस खरब को ज्ञापन दिया। यहां देवधर ने कहा कि हरियाणा के इतिहास में शायद किसी सरकार ने किसानों का इतना शोषण नहीं किया, जितना कि वर्तमान सरकार ने किया। हरियाणा में जिन फसलों का समर्थन मूल्य सरकार ने घोषित किया है, वह भी समर्थन मूल्य पर नहीं बिक रहीं। धान, सरसों, सूरजमुखी, चना, कपास आदि फसलों के किसानों का यह हाल है कि, वे अपने घर और खेतों की जरूरत तक पूरी नहीं कर पा रहे हैं। बैठक में हरियाणा के उपाध्यक्ष पंडित लक्ष्मी चंद ने सवाल उठाया कि जब पॉप्लर और सफेदा को सरकार ने 2008 में जंगल की लकड़ी न मान कर किसान की फसल घोषित किया है, तो सरकार इसका समर्थन मूल्य घोषित क्यों नहीं करती। वर्तमान में मंहगाई को देखते हुए और पॉप्लर-सफेदा की लागत के मद्देनजर इसका रेट 1500 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया जाए। इस मौके पर प्रदेश के युवा अध्यक्ष विकास राणा, उपाध्यक्ष राज कुमार खजूरी, सुरेश कनालसी, मेघ सिंह, मोहकम सिंह, नीरज गोस्वामी, पींटू राणा, सूरेश कांबोज, सरदार कुलविंद्र सिंह, सुखविंद्र, पींटू, पवन लक्षीबांस रहे।
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गांव-गांव जाकर बताएंगे सरकार की नाकामी
जिले के वरिष्ठ उपाध्यक्ष विश्वास शर्मा ने कहा कि भारतीय किसान संघ अगस्त में गांव-गांव जाकर सरकार की नाकामी को लेकर किसानों को जागरूक करेगी। भारतीय किसान संघ ने अपनी योजना के अनुसार यमुनानगर के सभी ब्लॉको में 25-25 गांव को चुना है। जिसमें मजबूत ग्राम कमेटियों का गठन किया जाएगा और सितंबर में किसानों का एक बड़ा सम्मेलन बुलाया जाएगा। जिसमें अपनी मांगों को लेकर सरकार को एक ज्ञापन दिया जाएगा और किसानों की मांगों को लेकर जो आंदोलन होगा, उसकी घोषणा सितंबर में की जाएगी।
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किसानों की मांगों पर ध्यान दे सरकार
किसान नेताओं ने बताया कि उनकी मुख्य मांगे हैं कि किसानों के सभी बैंकों के कर्जे तुरंत माफ किए जाएं, स्वामी नाथन आयोग की रिपोर्ट लागू की जाय, लक्कड़ मंडी में लकड़ी बेचने पर पारदर्शिता लाई जाए। जिले में बनाया जा रहा नेशनल हाईवे, जिस पर कोई अंडर पास, सर्विस लाइन नहीं है, तुरंत बनवाई जाए, किसानों को कम से कम 15 घंटे बिजली दी जाए।
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