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्कूलों में बिना पुस्तकों के नौनिहालों को पढ़ा रहे गुरुजी...

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तीन महीने बीते, बच्चों में नहीं बंटी किताबें
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अमर उजाला ब्यूरो
यमुनानगर। शिक्षा सत्र शुरू हुए तीन महीने बीत गए। 24 जुलाई से परीक्षा भी होनी है, मगर अब तक प्राथमिक स्कूलों के बच्चों को किताबें नहीं बांटी गईं। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि, गुरुजी बच्चों को कैसे पढ़ा रहे हैं और वे कैसे परीक्षा देंगे।
जिले में 600 से अधिक प्राथमिक स्कूल हैं, जिनमें करीब 38 हजार बच्चे हैं। स्कूलों में शिक्षा सत्र एक अप्रैल से शुरू हुआ था। दो महीने पढ़ाई के बाद जून में ग्रीष्मकालीन अवकाश हो गए। जुलाई में स्कूल खुल चुके हैं। तीन महीने बीत जाने के बाद भी एक से पांचवीं तक की पुस्तकें और कापियां नहीं आई हैं। दो महीने तक अध्यापकों ने बिना पुस्तकों के बच्चों को जैसे-तैसे पढ़ाया। इस माह 24 जुलाई को बच्चों की मासिक परीक्षाएं शुरू होने जा रही हैं। अध्यापकों को इस बात की चिंता सता रही है कि अब तक बिना पाठ्य पुस्तकों के पढ़ाई करने वाले बच्चे परीक्षा कैसे देंगे।
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बच्चों को स्कूल न भेजने की धमकी दे रहे अभिभावक
बिना कॉपी-किताबों के स्कूल जा रहे बच्चों को देखकर उनके अभिभावक भी पढ़ाई को लेकर चिंतित हैं। अध्यापकों का कहना है कि अभिभावक आए दिन स्कूल आकर पूछते है कि कॉपी-किताबें कब आएंगी। अध्यापक भी कॉपी-किताबें जल्द आने का आश्वासन दे देते हैं, मगर अब परीक्षाएं सिर पर होने से अभिभावक खफा हैं। मारवा खुर्द प्राथमिक स्कूल के अध्यापक विनोद मोहड़ी ने बताया कि अभिभावक अब धमकी दे रहे हैं कि यदि कॉपी-किताबें नहीं आईं तो वे बच्चों को स्कूल भेजना बंद कर देंगे। उधर, स्कूलों में कॉपी-किताबों न होने से स्कूल में दाखिला लेने के इच्छुक बच्चों के अभिभावक उन्हें स्कूल भेजने से कतरा रहे हैं।
अब तक सिलेबस से अंजान अध्यापक
दो महीने तक अध्यापकों ने पुराने बच्चों की पुस्तकें लेकर बच्चों को पढ़ाया। प्रत्येक कक्षा में 30 से 40 बच्चे हैं, जबकि पुरानी किताबें तीन-चार ही मिल पाईं, ऐसे में ज्यादातर बच्चों के पास किताबें नहीं हैं। अब अध्यापकों के सामने सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि पाठ्य पुस्तक न आने से सिलेबस की भी जानकारी नहीं है।
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ऐसे तो सरकारी स्कूलों में और कम हो जाएगी संख्या
स्कूल में रोज अभिभावक आकर कॉपी-किताबों के लिए पूछ रहे हैं। अध्यापकों को जवाब देना मुश्किल हो रहा है। पहले ही सरकारी स्कूलों में बच्चों की संख्या कम है। ऐसे हालात में भला कौन अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में भेजेगा। हमारी मांग है कि 24 जुलाई को होने वाले परीक्षाएं रद की जाए। जब बच्चों के पास पाठ्य पुस्तकें ही नहीं पहुंची है तो वे परीक्षा कैसे दे पाएंगे।
सतपाल सिंह, जिला प्रधान, हरियाणा अनुसूचित जाति राजकीय अध्यापक संघ
स्कूलों में कॉपी-किताबें पहुंचाने का ठेका अलग-अलग ठेकेदारों को दिया हुआ है। स्कूलों मेें जल्द ही कॉपी-किताबें पहुंच जाएंगी।
सुरेश कुमार, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी
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